dilli-ka-babuसरकार के बदलने का हरियाणा के उन बाबुओं के लिए कोई खास मतलब नहीं है, जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा शासन में बच गए थे, लेकिन उन्हें अशोक खेमका और संजीव चतुर्वेदी जैसे अधिकारियों से काफी संघर्ष करना पड़ा. इन दोनों ने अपने कार्यकाल में एक स्वतंत्र लाइन लेने की कोशिश की थी. लेकिन, अब ऐसा लग रहा है कि मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार भी पूर्ववर्ती सरकार के मार्ग का ही अनुसरण कर रही है. बाबू सर्किल वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं गुड़गांव के डिवीजनल कमिश्‍नर प्रदीप कासनी के अचानक स्थानांतरण से आश्‍चर्यचकित है. कासनी इस पद पर एक महीने पहले ही आए थे. सूत्रों का कहना है कि कासनी ने राजस्व अधिकारियों और कुछ शक्तिशाली भूमि माफियाओं के बीच गठजोड़ के बारे में एक रिपोर्ट तैयार की थी. इसी वजह से कासनी को उनके पद से हटाया गया. हालांकि, आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि यह तबादला प्रशासनिक कारणों से हुआ है, लेकिन अभी तक उन्हें कोई नई ज़िम्मेदारी नहीं दी गई है. बाबुओं को आशंका है कि कहीं वह भी एक और खेमका न बन जाएं.

 

हताश राजनयिक

अब जबकि पीएमओ मोदी सरकार के ज़्यादातर कामों की बागडोर अपने हाथ में ले चुका है, ऐसे में अकेली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ही नहीं हैं, जो थोड़ी अनिश्‍चित नज़र आ रही हैं. राजनयिक भी विदेशी शिष्टमंडल से बातचीत करने में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं. विदेश सेवा के अधिकारियों ने इस मसले को विदेश सचिव सुजाता सिंह के समक्ष भी रखा है. दरअसल, पेरू में जलवायु परिवर्तन पर हुई एक वार्ता में अमेरिकी शिष्टमंडल से बातचीत का मा़ैका न दिए जाने को लेकर विदेश मंत्रालय का प्रतिनिधिमंडल नाराज़ बताया गया. इस तरह के कई और भी उदाहरण हैं. हालांकि, मीडिया ने सुषमा स्वराज और मोदी के बीच ऐसे मामले को उठाया है, जहां उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया है, लेकिन विदेश सेवा के अधिकारियों के मामले में ऐसा नहीं हुआ है. अब जबकि बराक ओबामा 26 जनवरी को भारत आ रहे हैं, तो जाहिर है कि विदेश सेवा के अधिकारी इस मौ़के से जुड़ी गतिविधियों में शिरकत करना चाहेंगे. ऐसी चर्चा चल रही है कि अमेरिका में भारत के राजदूत सुब्रह्मण्यम जयशंकर (जो शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं) को प्रधानमंत्री मोदी के विदेश नीति सलाहकार के तौर पर वापस बुलाया जा सकता है. यह क़दम पीएमओ को और ज़्यादा शक्तिशाली बना देगा.

 

लीक होती सूचना

सबसे चिंताजनक होता है सत्ता के शीर्ष से सूचनाओं का लीक होना. इस लिहाज से देखें, तो मोदी सरकार, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सूचना के प्रवाह को लेकर काफी सजग है, के शीर्ष से सुरक्षा क़ानूनों के उल्लंघन करने वाली सूचनाएं लीक हो रही हैं. यह विडंबना भी है और शर्मनाक भी. हाल में भारत की परमाणु पनडुब्बी से संबंधित वर्गीकृत दस्तावेज़ मीडिया में लीक हुए. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल काफी गुस्साए और उन्होंने कई मेमो जारी कर दिए तथा ज़िम्मेदार पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. डोभाल की ओर से की गई इस कार्रवाई ने ख़तरे की घंटी बजा दी है. हाल में मंत्रिमंडल सचिवालय ने गृह सचिव अनिल गोस्वामी को निर्देश दिया है कि वह एनएसए के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्‍चित करें और यह भी कि राष्ट्रीय सुरक्षा को कमज़ोर कर सकने वाली सूचनाएं लीक न हों.

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