अनामिका अनु की इन कहानियों में स्त्री जीवन का भरापूरा संसार अपनी अभिलाषाओं के साथ, त्रासदियों के साथ, रहस्यमयी मुस्कान के साथ, शारीरिकता के ग़रूर के साथ, सपनों की उधेड़बुन के साथ महकता दिखाई देता है. यहाँ राग है, अनुराग है, जीवन के अनोखे आलाप है. इन कहानियों में एक गर्भवती की मछली खाने की अधूरी इच्छा है, लुप्त होते खिलौनों का रहस्य है, असीम दूरी में प्रेम को बचाने की छटपटाहट है, एक वृद्ध देह की आसक्ति पूर्ण होते समय की सिहरन है. यहाँ शरीर, मन और आत्मा तक की भूख है और उसे मिटाने की करुणामयी लालसा भी है. इन कहानियों की भाषा जीवनरस से भरपूर है, जिसमें अनूठी कोमलता के साथ स्त्री देह का रुधिर धधकता दिखाई देता है.

अनामिका अनु ने अपनी कहानियों का संसार बहुत कुशलता से और आत्मविश्वास के साथ रचा-सहेजा है. कहानी को वह बहुत सहजता से किंवदंतियों में ढाल कर, उनमें लोककथाओं के जादुई तत्व बुनकर, उन्हें एक व्यापक परिवेश का हिस्सा बनाती है. स्त्री-जीवन के साधारण अनुभवों की अनदेखी गहराइयों को सहृदयता से छूती-सहेजती इन कहानियों की चुभन लम्बे समय तक टीसती रहती है.
अपने हिस्से में आये जीवन का सहज स्वीकार करती, सच्चाइयों से बेझिझक रूबरू होती यह स्त्रियां अपने रोजमर्रा की विडम्बनाओं के साथ, अपने अस्तित्व के सार्थकता की खोजबीन करती हैं. आधुनिक स्त्री जीवन के इस अनोखे आख्यान को पढ़ना एक विलक्षण अनुभव है.
प्रफुल्ल शिलेदार
( वरिष्ठ कवि लेखक और अनुवादक)













