जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले के बाद घाटी में हालत नाजुक बने हुए हैं. ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 35-A को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के मद्धेनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. राज्य में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है. जम्मू कश्मीर में अलगाववादी नेता यासीन मलिक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. जो जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट का मुखिया भी है. केंद्र सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया है. जिसमें इसमें सीआरपीएफ की 45, बीएसएफ की 35, एसएसबी की 10 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां शामिल है.

दरअसल संविधान का अनुच्छेद 35A धारा 370 से जुड़ा है. अनुच्छेद 35-A के तहत ही जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा हासिल है. जिससे जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा को राज्य के लिए कानून बनाने के विशेष अधिकार मिले हुए हैं. अनुच्छेद 35A के चलते किसी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है. अनुच्छेद 35A के मुताबिक अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की राज्य के बाहर किसी लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं. साथ ही उसके बच्चों के भी राज्य में कोई अधिकार नहीं रह जाते. हालांकि साल 2002 में हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस प्रावधान को समाप्त कर दिया था. 7 अक्तूबर 2002 को हाईकोर्ट की एक बेंच ने बहुमत के आधार पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर की लड़की के राज्य के बाहर के व्यक्ति से शादी करने के बाद भी राज्य का स्थायी निवासी होने का उसका अधिकार बना रहेगा.

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14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ा गया था. लेकिन संविधान सभा से लेकर संसद की किसी भी कार्यवाही में अनुच्छेद 35A को संविधान का हिस्सा बनने से जुड़े किसी भी संविधान संशोधन या फिर बिल बिल जिक्र नहीं मिलता है. दरअसल अनुच्छेद 35A को लागू करने के लिए सरकार ने धारा 370 के अंतर्गत मिली शक्तियों का प्रयोग किया था.

1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बनाया गया था. इसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया है. इसके मुताबिक सिर्फ वो व्यक्ति ही जम्मू कश्मीर का स्थायी नागरिक माना जायेगा जो 14 मई 1954 या उसके 10 साल पहले से राज्य का नागरिक रहा हो. साथ ही उसने वहां संपत्ति भी अर्जित की हो.

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 35A हटाने की मांग लंबे समय से हो रही है. दलील दी जा रही है कि अनुच्छेद 35A की आड़ में संविधान से मिले अधिकारों को जम्मू-कश्मीर राज्य में छीन लिए गए हैं. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है.2014 में एक गैर सरकारी संस्था वी द पीपुल ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 35Aको लेकर एक पीआईएल दायर की थी. अनुच्छेद 35A से सम्बंधित लगभग 20 याचिकाएं कोर्ट लंबित है. 14 बार लिस्ट होने के बावजूद भी अभी तक मामले पर सुनवाई नहीं हुई है.