शायद 2008 की बात है . मै गुजरात में एडवोकेट मुकुल सिन्हा के निमंत्रण पर गुजरात के दंगे के बाद चल रहे शांती सद्भावना के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गया हुआ था. तो महाराष्ट्र से मराठी अखबारों के प्रतिनिधियों के फोन आने लगे. और उन्होंने कहा कि “आज के मराठी अखबारों में महाराष्ट्र नक्सलवाद विरोधी विशेष पुलिस प्रमुख के द्वारा दिया गया प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार प्रकाशित खबर मे 56 ( शायद छप्पन का आंकड़ा महाराष्ट्र की पुलिस का काफी पसंदीदा आंकडा है.) लोगों की लिस्ट मे आप का भी नाम नक्सलवादियों मे है. इसपर आपकी प्रतिक्रिया जानने के लिए हमने फोन कीया है. तो मैने कहा कि मै “कल नागपुर पहुंच रहा हूँ. आप छपी हुई खबर के पेपर लेकर मेरे घर पर कल दोपहर के बाद आईऐ तो मै विस्तार से बात करुँगा.” अहमदाबाद से नागपुर पहुचने के बाद सकाळ मराठी अखबार के प्रतिनिधि का फोन आया की “आप को फुर्सत हो तो हम आए ?” तो मैंने कहा कि “हां आप अखबार में प्रकाशित खबर को लेकर आएइ.” मैंने सकाळ के प्रथम पृष्ठ पर ही वह खबर महाराष्ट्र नक्सलवाद निर्मूलन विशेष पथक के प्रमुख आई पी एस पंकज कुमार गुप्ता के द्वारा दि गई प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए छपी थी. जिसमें मेरे अलावा और पचपन नाम थे. डॉ. बाबा आढाव, डॉ. भारत पाटणकर, डॉ. यशवंत मनोहर, नागेश चौधरी, मेधा पाटकर यह कुछ नाम याद आ रहे हैं. महाराष्ट्र के और भी हमारे देश के संविधान के अनुसार समतामूलक समाज, तथा जाति- धर्मनिरपेक्ष मुल्यो को लेकर कविता तथा लेखन और काम करने वाले एक्टिंव्हिस्ट साथियों के नाम थे. वह देखते हूऐ मैंने दैनिक सकाळ के प्रतिनिधी को तत्काल मेरी प्रतिक्रिया देते हूए कहां कि “आज मेरी जितनी उम्र है,उतनी ही उम्र डॉ. बाबा आढाव की समतामूलक जाति-धर्मनिरपेक्ष समाज बनाने के लिए लोकशिक्षण करने के लिए ‘एक गांव एक कुंआ’ आंदोलन से लेकर समता परिषदोके द्वारा महात्मा ज्योतिबा फुले तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के और महात्मा गाँधी के दर्शन के अनुसार कार्य करने की है .वैसे ही मेरी हमउम्र और राष्ट्र सेवा दल की बॅचमेट मेधा पाटकर तथा डॉ. भारत पाटणकर, मराठी के मशहूर साहित्यिक और मेरे मित्र डॉ. यशवंत मनोहर वैसे ही दुसरे मित्र तथा बहुजन संघर्ष पत्रिका के संपादक नागेश चौधरी का भी नाम इस लिस्ट में देखने के बाद मुझे लगता है, कि हम सभी लोगों के तरफ से डिफामेशन सूट का मुल्य महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की इज्जत का जितना होता होगा, उतना कोर्ट ने तय करते हूऐ फैसला देना चाहिए. ऐसा केस हम लोग करेंगे. यह मुलाकात सकाळ ने प्रथम पृष्ठ पर मेरे फोटो के साथ छापी है. इसके बाद तत्काल एनडीटीवी से श्रीनिवास जैन नाम के एंकर का फोन आया था. कि” हम दिल्ली से एक टिम आपका इंटरव्यू करने के लिए नागपुर भेज रहे हैं. इसी तरह और भी चैनल के तरफ से फोन आने लगे थे ? थे के सामने प्रश्न चिन्ह लगाने का मतलब यह सिर्फ 17 साल पुरानी यादे है इसलिए.
मुझे लगा कि जबकि नक्सलवाद विरोधी सेल का मुख्यालय नागपुर में है, तो क्यों नहीं उसके मुख्य पंकजकुमार गुप्ता के साथ मुलाकात की जाए. तो मैंने नागेश चौधरी, डॉ. यशवंत मनोहर तथा नागपुर के अन्य साथियों के साथ बात करने के बाद पंकजकुमार गुप्ताजी को फोन किया. तो उन्होंने कहा कि “मै खुद आपके पास आता हूँ”. तो मैने कहा कि “आप पूरी तरह से सिक्योरिटी के साथ आओगे तो हमारे अडोस- पडोस के लोग बहुत शॉक हो सकते हैं. इसलिए हम लोग ही आपके पास आते हैं. “तो पहले उन्होंने पुलिस क्लब में आने के लिए बोला. फिर बाद में उन्होंने कहा कि हमारे दफ्तर में नागपुर डिविजनल कमिश्नर के अहाते मे उद्योग भवन में आप आइए. और कहा की हम वाहन भेजते हैं.” तो मैंने कहा कि मेरे पास बीस साल पुरानी फिएट है. हम सभी उसी मे बैठ कर आ रहे हैं. इस तरह से हम पांच छह लोग उद्योग भवन में पहुंचने के बाद, अखबारो मे हमारे 56 लोगों के नाम छपी हुई कॉपियां लेकर गए. तो पंकजकुमार गुप्ता जी के सामने टेबल पर वही सब अखबारों को लेकर वह भी बैठे हुए थे. तो मैंने कहा कि “क्या आप सचमुच महाराष्ट्र से नक्सलवादविरोधी अभियान चलाने के लिए कृतसंकल्प होकर यह लिस्ट अखबारों में प्रकाशित करने के लिए दिऐ हो ?” तो उन्होंने कहा कि” यह लिस्ट मैंने नहीं बनाई यह चंद्रपुर के एस पी ने बनाई है. ” मैंने कहा कि “नक्सलवादविरोधी सेल के प्रमुख आप है. और अखबारों में प्रकाशित खबर मे भी आप ही का नाम है. इसलिए हम लोग डिफामेशन सूट महाराष्ट्र शासन के प्रमुख और आपके खिलाफ दायर करने जा रहे हैं. क्योकिं इस लिस्ट में दिए गए 56 नामके हम सभी लोगों की जिंदगी का सबसे बड़ा हिस्सा हमारे देश के संविधान के अनुसार अहिंसक मार्ग जो हमे महात्मा गाँधी. महात्मा ज्योतिबा फुले तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के दिखाए हूऐ मार्ग से समतामूलक – शोषण विरहिन समाज तथा जाति- धर्मनिरपेक्ष भारत बनाने के लिए पूरी जिंदगी दाव पर लगा कर काम रहे हैं. इसलिए आपने हमारे जीवन के संपूर्ण काम का अपमान किया है. इसलिए बहुत ही दुःखी मन से हम लोग न्यायालय में जा रहे हैं “. हालांकि पंकजकुमार गुप्ता जी संपूर्ण समय बहुत ही डिफेंसिव मोडपर बात कर रहे थे. दो तीन बार उन्होंने चाय बिस्किट तथा पेस्ट्री भी दी. यह सब नवंबर – दिसंबर का मामला है. और उसके ही आसपास महाराष्ट्र विधानसभा का शितकालिन सत्र नागपुर में हुआ. और किसी विरोधी दल के विधायक ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा में मामला उठाने के बाद, नक्सलवादविरोधी सेल द्वारा अखबारों में प्रकाशित खबर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री. विलासराव देशमुख ने तथा उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री श्री. आर. आर. पाटील ने कहा “कि हम सभी का नाम लेकर कहा कि” यह सभी के सभी हमारे राज्य के गौरवशाली लोग है. अगर इनके नाम नक्सलिवादी की लिस्ट में शामिल है. तो हम भी नक्सलिवादी है. और हम पूरे महाराष्ट्र राज्य की तरफ से इन सभी लोगों की माफी मांगते हैं.”
उसके बाद 26 /11 हुआ और मुख्यमंत्री श्री. विलासराव देशमुख को इस्तीफा देना पडा. उसके बाद वह केंद्रीय मंत्री के रूप में दिल्ली चले गए थे. और मै उसी दौरान आतंकवाद विरोधी कार्यक्रम मे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे अभियान के अंतर्गत दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में वक्ता के रूप में बोल रहा था. तो साथ में मंचपर रामविलास पासवान, दिग्विजय सिंह, सिताराम येचुरी, ए. बी. बर्धन अतुल अंजान, शबनम हाश्मी आयोजक थी. और श्रोताओं मे कुछ संसद सदस्य, पत्रकार तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे. उसमे हमारे पचास वर्ष से अधिक समय के मित्र तथा राज्यसभा के सदस्य हुसैन दलवाई भी मौजूद थे. कार्यक्रम के बाद उन्होंने मेरे भाषण की तारीफ करते हूऐ कहा की “सामने वाली बिल्डिंग में हमारे देश के विज्ञान मंत्रालय का दफ्तर है. और विलासराव देशमुख ने मुझे विशेष रूप से तुम्हें ले आने के लिए भेजा है. इसलिए तुम अभी चलोगे तो अच्छा होगा.” हालांकि मुझसे और भी लोग बातचीत करने के लिए उत्सुक थे. लेकिन हुसैन दलवाई ने मेरा हाथ मजबुती से पकड़कर एक तरह से खिंचकर रोड क्रॉस करते हूऐ, सी एस आई आर के मुख्यालय में लेकर गए थे. और हम दोनों जैसे ही विलासराव देशमुख के सामने पहुंचे तो वह अपनी कुर्सी से उठकर हमारे तरफ आकर मेरा हाथ पकड़ कर सामने वाले सोफे पर लेकर बैठे. और पहले ही उन्होंने कहा कि मुझे हुसैनभाई ने कहा कि आप दिल्ली में ही है. और सामने वाले हॉल में आपका आतंवाद जैसे संवेदनशील विषय पर भाषण है. तो मेरी भी इच्छा थी. लेकिन मेरे मंत्रालय के कुछ महत्वपूर्ण काम की वजह से मैं नहीं आ सका, लेकिन आपको लेकर आने के लिए आग्रह किया था. और उसकी एकमात्र वजह मुझे आपसे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने की थी. मैंने पुछा कि “किस बात की माफी ?” तो उन्होंने कहा कि मेरे मुख्यमंत्री के कार्यकाल में आप मेधाताई डॉ. बाबा आढाव डॉ. भारत पाटणकर, डॉ. यशवंत मनोहर नागेश चौधरी जैसे लोगों के नाम नक्सलवादविरोधी दस्ते के मुखिया ने डालकर मिडिया में प्रकाशित करने के लिए, मै व्यक्तिगत रूप से माफी मांग रहा हूँ. मैंने कहा कि आप और आर. आर. पाटील तो विधानसभा में ही माफी मांग चुके हों. तो उन्होंने कहा कि मेरे मन में जिंदगी भर के लिए यह कसक रह गई होती, की आप सभी लोगों की असली जगह हमारे कुर्सियों पर बैठने की है. लेकिन मुझे मालूम है कि आप सभी लोग कभी भी इस तरफ झांक कर भी नहीं देखने वाले हो. और इतने अभावों मे अपने काम कर रहे हैं. इसलिए हमें आदर है. मुझे नहीं पता था कि विलासराव देशमुख कैंसर से पिडीत थे. क्योकिं उस मुलाकात के बाद उनका निधन हो गया.
हालांकि उनके मुख्यमंत्री के कार्यकाल में नांदेड़ तथा मालेगाँव के दोनों बमविस्फोट तथा 26 /11, और खैरलांजी जैसे जधन्य कांड हूऐ थे. और इन सभी घटनाओं की जांच करने के लिए मेरा प्रयास अन्य साथियों को लेकर रहा है. और मैंने इन सभी घटनाओं में महाराष्ट्र शासन की मुख्य रूप से पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर कुछ सवाल पुछे है, और इन सभी रिपोर्ट महाराष्ट्र शासन तथा केंद्रीय गृहमंत्री को तथा सीबीआय, आई बी को भी दिए हैं.
अब वर्तमान महाराष्ट्र की सरकारने जनसुरक्षा अधिनियम के शिर्षक से विधानसभा तथा विधानपरिषद दोनों सदनों मे पास करा लिया है. विधानसभा के एकमात्र कम्युनिस्ट सदस्य का अपवाद छोडकर सभी दलों के विधायकों ने दोनों सदनों मे यह बील पास कर लिया है. और अब राज्यपाल ने उसपर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए इसलिए उध्दव ठाकरे उन्हे आग्रह करने वाले है. क्यों उध्दव ठाकरे ने तथा शरद पवार ने और संविधान की कॉपी लेकर सतत मंचपर लहराने वाले कांग्रेस के विधायकों ने इस बील को पास कराने के लिए दोनों सदनों मे वोट दिया ? और अब राज्यपाल को हस्ताक्षर नहीं करने के लिए कहना कौन सी राजनीति है ? क्योंकि आप सभी की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हूऐ नरेंद्र मोदी जी भरी लोकसभा में आप सभी को ललकार ते हूऐ बोल चुके हैं कि किसकी हिम्मत है तो कश्मीर के 370, राम मंदिर का विरोध करके दिखाओ. क्योंकि पिछले ग्यारह वर्षो में संघ भाजपा और सबसे अधिक नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह और अब आदित्यनाथ जैसे लोगों ने लोगों के मानस में जिस तरह का ध्रुवीकरण करके रख दिया है किसी भी संसदीय क्षेत्र में सक्रिय रूप भाग लेनेवाले दल या उसके नेताओं की हिम्मत बची नहीं है. इसलिए महाराष्ट्र का वर्तमान जनसुरक्षा अधिनियम एक कम्युनिस्ट विधायक छोडकर सभी दलों के विधायकों के सपोर्ट से पारित किया गया है. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों से लगातार किए जा रहे मनुस्मृति के अनुसार ही राजकाज चलाने के लिए ही तो है. सवाल संविधान की रक्षा का मंत्र जपने वाले लोगों का है.
भाजपा का मातृसंगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के समय से ही कम्युनिस्ट, सेक्युलर और अल्पसंख्याक समुदाय शत्रू करार दिऐ गऐ है. और संविधान सभा में डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान नवंबर 1949 को भारत की जनता को अर्पण करने की घोषणा करने के दुसरे ही दिन “हमारे देश में हजारों साल पहले ही दुनिया का सबसे नायाब संविधान ‘मनुस्मृति’ रहते हूऐ इस देश विदेश के संविधानों से टुकडे लेकर किऐ हूए गुदड़ी की क्या आवश्यकता थी ? इसमे कोई भारतीय राष्ट्रीयता का अंश नहीं है. और नहीं कोई मीशन है.” यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अंग्रेजी मुखपत्र आर्गनायझर मे 30 नवंबर 1949 को छपा है. यह भारतीय जनता पार्टी के सभी सदस्य आर एस एस की शाखा से बचपन से सुनकर किसी भी सदस्य का लाइफ मिशन के अंतर्गत आता है. और नरेंद्र मोदी जी हो या देवेंद्र फडणवीसजी हो, इन सभी लोगों को जब भी मौका मिलेगा तब वह क्यों छोड़ेंगे ?
सवाल हाथ में लाल किताब लेकर संविधान को बचाने के की बात करने वाले अन्य दलों को सोचना चाहिए कि नरेंद्र मोदी जी, देवेंद्र फडणवीस यह संघ के सपनों को पूरा करने के लिए कटिबद्ध है. इस वर्ष के दशहरे के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह बील भेट के रूप में दिया जा रहा है. जैसे सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाळे तथा उन्हिसे प्रेरणा लेकर उपराष्ट्रपती जगदीप धनकड ने भी उसे दोहराया. और लोकसभा चुनाव में हमे 400 से अधिक संख्या में सदस्यों को चुनकर लाना है. तो 2019 के चुनाव में शायद चुनाव आयोग ने कुछ ज्यादा मदद नहीं करने की वजह से 400 सौ तो दूर की बात है. तीन सौ का आकड़ा नहीं पार कर सके. इस लिये भविष्य में आनेवाले सभी चुनाव एकतरफ़ा करने के लिए शायद मतदाताओंको छाटने का काम बिहार से शुरू करते हूए, संपूर्ण देश मे करने का ऐलान चुनाव आयोग को करना पडा है. जो देश के इतिहास का पहला बनाना रिपब्लिक का रुप लेने की संभावना है.
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