ताजुल मसाजिद वैक्सीनेशन कैम्प में बड़ी तादाद में पहुंचे हिन्दू धर्मावलंबी

भोपाल। धर्मस्थलों से ईश प्रार्थना का सिलसिला हमेशा से बना रहा है, लेकिन दुआओं के साथ अब दवा का दौर भी महामारी के बीच चल पड़ा है। राजधानी के धर्मस्थलों पर लगाए जाने वाले कोविड वैक्सीनेशन कैम्प के पीछे आयोजकों की मंशा दुआ के साथ दवा भी पहुंचाने की है।

सोमवार को एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में दूसरे चरण का कोविड वैक्सीनेशन कैम्प आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी तादाद में लोगों ने पहुंचकर कोरोना को हराने की जंग में अपनी आहुति देने का ऐलान किया। यहां पहुंचने वालों में जहां अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग थे, वहीं इनमें हिन्दू धर्म के अनुयायियों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वैक्सीनेशन कराने पहुंचे विजय दायमा ने कहा कि बीमारी किसी का मजहब पूछकर उसको प्रभावित नहीं कर रही है, वह सभी को एक चश्मे से देख रही है।

 

जब बीमारी का यह तरीका है तो दवाई लेने में भी किसी धर्म से जोड़कर देखा जाना मुनासिब नहीं है। वैक्सीनेशन कराने आईं रमा बाई और सावित्री देवी ने कहा कि जरूरी यह है कि बीमारी से बचने के उपाय किए जाएं, यह मायने नहीं रखता कि दवा कहां और किसके द्वारा दी जा रही है। गौरतलब है कि ताजुल मसाजिद प्रबंधन कमेटी ने इससे पहले भी एक वैक्सीनेशन कैम्प लगाया था, जिसमें दो सैकड़ा से ज्यादा लोगों ने टीका लगवाया था।

इसके बाद सोमवार को अगले चरण का वैक्सीनेशन कैम्प लगाया गया। सुबह 9 बजे शुरू हुआ यह कैम्प शाम 5 बजे तक जारी रहेगा। कैम्प की व्यवस्था संभाल रहे डॉ. जफर हसन ने कहा कि लोगों में वैक्सीनेशन को लेकर जागरुकता बढऩे लगी है। जिसका नतीजा यह है कि अब लोगों को समझाइश और दवाब बनाने के हालात खत्म होते जा रहे हैं, बल्कि वे खुद ही अपनी जिम्मेदारी और जरूरत मानकर टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। शहरभर में लगाए जाने वाले कैम्प से लोगों को अस्पताल तक जाने और लंबी कतारों में लगने के हालात से निजात मिली है।

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