फरवरी 2016 में, जेफरी एपस्टीन ने पेपाल के को-फाउंडर पीटर थिएल को एक ईमेल भेजा। उसमें एक ऐसी बात लिखी थी जिसे दुनिया के हर अखबार की हेडलाइन होना चाहिए था: “जैसा कि आप जानते ही होंगे, मैं रॉथ्सचाइल्ड परिवार का प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंट) करता हूँ।”

यह बात ‘एपस्टीन फाइल्स’ में दर्ज है, जो अमेरिकी न्याय विभाग का एक आधिकारिक दस्तावेज है। लेकिन बड़े मीडिया घरानों ने इसे ऐसे नजरअंदाज किया जैसे यह मौसम की कोई मामूली खबर हो।

जनवरी 2026 में जारी हुए 38 लाख पन्नों के दस्तावेजों में “रॉथ्सचाइल्ड” नाम करीब 12,000 बार आता है। बारह हजार बार! इसकी तुलना में “क्लिंटन” नाम बहुत कम बार आया है। लेकिन आज के मीडिया सिस्टम में रॉथ्सचाइल्ड का नाम लेना ही ‘पागलपन’ या ‘साजिश’ (कॉन्स्पिरेंसी) करार दे दिया जाता है। यह उन लोगों के लिए बहुत सुविधाजनक है जिनका नाम इतिहास के सबसे बड़े सेक्स ट्रैफिकिंग घोटाले में सबसे ज्यादा बार आया है।

‘विक्टोरिया सीक्रेट’ के मालिक और एपस्टीन के सबसे बड़े मददगार, अरबपति लेस वेक्सनर ने 18 फरवरी 2026 को अमेरिकी संसद के सामने गवाही दी। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने एपस्टीन जैसे आदमी को अपने पैसों और जायदाद के सारे अधिकार क्यों दिए, तो उन्होंने साफ कहा: “फ्रांस में रॉथ्सचाइल्ड परिवार के लिए उसके काम को देखते हुए।”

वेक्सनर ने यह भी कहा: “मैंने एली डी रॉथ्सचाइल्ड से बात की थी, वह पूरे परिवार के मुखिया थे।”

ध्यान रहे कि वेक्सनर ने यह बात शपथ लेकर अमेरिकी कांग्रेस के सामने कही। उसी दौरान वेक्सनर के वकील को माइक पर अपने क्लाइंट से धीरे से यह कहते सुना गया: “अगर तुमने अगले सवाल का जवाब पाँच शब्दों से ज्यादा में दिया, तो मैं तुम्हें जान से मार दूँगा।”

साफ है कि वे लोग बुरी तरह डरे हुए थे।

दस्तावेज वही बताते हैं जो वेक्सनर ने कबूल किया। अक्टूबर 2015 में, एपस्टीन की कंपनी ने रॉथ्सचाइल्ड की होल्डिंग कंपनी के साथ 2.5 करोड़ डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया। विषय था—”रिस्क एनालिसिस” और “एल्गोरिदम का इस्तेमाल”। एक सजायाफ्ता मुजरिम को यूरोप का सबसे अमीर परिवार 2.5 करोड़ डॉलर दे रहा था। अगर यह किसी फिल्म की कहानी होती, तो कोई इसे सच नहीं मानता।

एडमंड डी रॉथ्सचाइल्ड ग्रुप की सीईओ आरियान डी रॉथ्सचाइल्ड, एपस्टीन को महीने में दर्जनों ईमेल भेजती थीं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पुष्टि की कि सजा मिलने के बाद भी आरियान उनसे कई बार मिलीं। बैंक ने पहले तो किसी भी संपर्क से इनकार किया, लेकिन बाद में माना कि ये मुलाकातें उनके “काम का हिस्सा” थीं। क्या एक अपराधी से बार-बार मिलना “नॉर्मल ड्यूटी” है?

2014 में एपस्टीन ने आरियान को लिखा: “यूक्रेन के तख्तापलट से कई मौके पैदा होंगे।”

सोचिए, बच्चों के शोषण का दोषी एक शख्स, 236 अरब डॉलर के बैंकिंग साम्राज्य की वारिस से दुनिया की राजनीति और मुनाफे पर चर्चा कर रहा था। यह खबर फ्रंट पेज पर होनी चाहिए थी, लेकिन मीडिया ने चुप्पी साध ली।

हिलेरी क्लिंटन और लिन फॉरेस्टर डी रॉथ्सचाइल्ड के रिश्ते भी पहले ही उजागर हो चुके थे। 2010 में, तत्कालीन विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने लेडी रॉथ्सचाइल्ड से माफी मांगते हुए लिखा था कि उन्होंने उनके एक निजी कार्यक्रम से टोनी ब्लेयर को बुला लिया था।

हिलेरी के शब्द थे: “मुझे बताइए कि इस गलती के लिए मुझे क्या हर्जाना (penance) भरना होगा?”

दुनिया की सबसे बड़ी ताकत की विदेश मंत्री एक प्राइवेट नागरिक से ‘हर्जाना’ पूछ रही थी। 2015 में हिलेरी के चुनाव लड़ने के ऐलान से पहले ही, लेडी रॉथ्सचाइल्ड उनकी आर्थिक नीतियां तैयार कर रही थीं। इससे साफ है कि जो लोग राजनीति चलाते हैं, उनका नाम हमेशा बैलेट पेपर पर नहीं होता।

एपस्टीन के वकील एलन डर्शोविट्ज़ ने 2019 में सरेआम कहा था: “मुझे एपस्टीन से लेडी लिन रॉथ्सचाइल्ड ने मिलवाया था। उन्होंने ही एपस्टीन की मुलाकात बिल क्लिंटन और प्रिंस एंड्रयू से कराई थी।”

उस अपराधी और दुनिया के सबसे ताकतवर मर्दों के बीच का पुल यही ‘रॉथ्सचाइल्ड’ नाम था।

सीनेटर जॉन मैक्केन की पत्नी सिंडी मैक्केन ने इस पूरी स्थिति को बड़ी बेबाकी से समेटा: “हम सबको पता था।” जी हाँ, वे सब जानते थे, लेकिन सबने चुप रहना चुना।

इन दस्तावेजों से एक पैटर्न साफ नजर आता है। एपस्टीन रॉथ्सचाइल्ड परिवार के फाइनेंशियल एजेंट के तौर पर काम करता था। उसने इस रसूख का इस्तेमाल अरबपतियों, नेताओं और बड़े प्रोफेसरों का एक नेटवर्क बनाने के लिए किया। यही नेटवर्क इतिहास के सबसे बड़े सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट की बुनियाद बना। और जब पीड़ितों ने बोलना शुरू किया, तो बैंकिंग सिस्टम की ताकत से उनकी आवाज दबा दी गई।

रॉथ्सचाइल्ड, रॉकफेलर, वारबर्ग—ये वो सदियों पुराने अरबपति घराने हैं जिन्हें कई विचारकों ने ‘दुनिया का असली मालिक’ बताया है। ये वो घराने हैं जो साम्राज्यों और विश्व युद्धों के बाद भी टिके रहते हैं क्योंकि इनकी ताकत राजनीति से ऊपर है। ये केंद्रीय बैंक (central banks) बनाते हैं, युद्धों में दोनों पक्षों को पैसा देते हैं और सरकारों को ऐसे बदलते हैं जैसे कोई टाई बदलता हो।

प्रेस, जो इन्हीं की दौलत पर टिकी है, उसने पिछले 200 सालों में हमें यह सिखा दिया है कि इन नामों का जिक्र करना एक ‘बीमारी’ या ‘वहम’ है। लेकिन एपस्टीन फाइल्स के 38 लाख पन्नों ने उस बात पर मुहर लगा दी है जो सालों से कही जा रही थी: सत्ता की एक ऐसी परत है जो सरकारों और कानून से ऊपर काम करती है, और जो अपनों को बचाने के लिए पूंजी और खबरों, दोनों पर कब्जा रखती है।

फरवरी 2026 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एपस्टीन के इस पूरे काम को “ग्लोबल क्रिमिनल एंटरप्राइज” करार दिया है।

दस्तावेजों में 12,000 बार रॉथ्सचाइल्ड का नाम है, लेकिन मीडिया की चुप्पी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि सिस्टम बिल्कुल वैसे ही काम कर रहा है जैसा बताया गया है। जिसके पास पैसा है, script वही लिखता है। और जो स्क्रिप्ट लिखता है, वही तय करता है कि किसे किस बात पर चुप रहना है। और इस मामले में, उस खामोशी के पीछे कौन है, यह साफ़ है।

(मार्कोस पाउलो कैंडलरों के लेख का हिंदी अनुवाद)

पुनश्च: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने कुछ ही दिन पहले उस वक्त अपने बहुप्रतीक्षित $2.5 बिलियन के IPO के लिए रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी को एक स्वतंत्र सलाहकार (Independent Advisor) के रूप में नियुक्त किया, जब एप्स्टीन फाइल्स को लेकर रॉथ्सचाइल्ड परिवार चर्चे में था।

क्या यह महज़ संयोग है?

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