कटरा के श्रीवैष्णोदेवी मंदिर न्यास के तरफ से चलाऐ जा रहे मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द करने का फैसला देख कर मै बहुत ही आहत हो कर यह खुली चिठ्ठी लिखने के लिए मजबूर हुआ हूँ. क्योंकि मै पिछले पचास सालों से लगातार कश्मीर को लेकर काम कर रहां हूँ. और इस तरह के गलत फैसलों की वजह से कश्मीर के नागरिकों को भारत के खिलाफ करने का काम किया जा रहा है. अगर आप को भारत के मेडिकल शिक्षा की सचमुच ही चिंता है तो भारत में चल रहे सभी मेडिकल शिक्षा संस्थानों का इस कसौटी के उपर जांच करेंगे तो हमारे देश के आधेसेभी ज्यादा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता रद्द हो सकती है. यह मै अपने अनुभव के आधार पर ही लिख रहां हूँ. इसलिए मेडिकल शिक्षा की कसौटी एक बहाना है. मुख्य बात उस मेडिकल कॉलेज में कश्मीरी मुस्लिम विद्यार्थियों ने मेरीट से प्रवेश करने के विरोध में 2022 से भाजपा का जम्मू रिजन मे आंदोलन चल रहा है. और इस फैसले के बाद जम्मू में जिस तरह से जश्न मनाया जा रहा है. वह किस बात का परिचायक है ? उसे देख कर ही (नॅशनल मेडिकल कमिशन) मेडिकल शिक्षा का संचालन करने वाली एजेंसी के द्वारा लिया गया फैसले पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भाजपा के नेता सुनिल कुमार शर्मा ने इस फैसले का स्वागत किया है.और आगे जाकर उल्टा कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला पर ही आरोप गढ रहे हैं कि वह इस फैसले को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं यह बोलते हूऐ खुद शर्माजी जोड़ रहे हैं कि इस संस्थान को धन देने वाले धनपतियो कि इच्छा है कि यहां सनातन धर्म का प्रसार करने के लिए वैदिक संशोधन केंद्र की स्थापना होनी चाहिए मतलब विकसित भारत संकल्पना मे लोगो के स्वास्थ्य के लिए पहले से ही हमारे देश में प्रशिक्षित डाक्टरों का अनुपात चिंताजनक रुप से कम है यह पांच साल पहले करोना काल में उजागर हो गया है और इसलिए लाखों लोगों की मौत हो गई लेकिन सरकार आंकड़े नहीं बता रही है. और मरने वालों की संख्या मुसलमानों से अधिक थी किसके लिए वैद्यकीय शिक्षा बंद करते हूए वैदिक शिक्षा देने से क्या हमारे देश की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान हो सकता है क्या?

क्योंकि पिछले 11 सालों से आप लोगों ने भारत की सभी संविधानिक जांच संस्थाओ को अपनी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए मनमर्जी से चलाने के लिए मजबूर कर दिया है. जिसके परिप्रेक्ष मे यह फैसला अकादमीक की जगह राजनीतिक ज्यादा दिखाई दे रहा है. और उस जगह पर वैद्यकीय शिक्षा की जगह पर वैदिक शिक्षा करना चाहिए यह क्या यही विश्वगुरु बनने की प्रक्रिया है ?

और इस तरह का खुलेआम कश्मिर के लोगों को 370 हटाकर उनके शिक्षा स्वास्थ्य व्यापार व्यवसाय कृषी-बागबानी से निकाला हुआ माल को उचित मूल्य न देते हुए जिंदा मारना चाहते हो और उसके बाद भी कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बोलेंगे, कौन सा कश्मीर हमारा है ? सिर्फ पहाड़ और जमीन वाला जिसे आप अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को सौपना चाहते हो ? या वहाँ पर रहने वाले एक करोड़ मुसलमानों को कदम – कदम पर अपमानित करते हूऐ कश्मीर की 90% प्रतिशत आबादी को नाराज करते हूऐ उन्हें मिलिटरी की बंदूक दिखाकर दिन-प्रतिदिन सताने से हमारे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने के लिए आपको हमारे देश के लोगों ने प्रधानमंत्री के पद पर नही बैठाया. जब आपने आपके चुनाव प्रचार में बार- बार लोगों को बोला था कि मुझे एक बार मौका दो मै भारत का विकास करना चाहता हूँ . इसलिए लोगों ने आपकों बहुमत से विजयी करते हूऐ आपको देश का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. इस तरह से हमारे देश की सुरक्षा से लेकर अखण्डता और एकता को कमजोर करने के लिए नहीं.
नरेंद्र मोदी जी आपने ने 2014 मे पहली बार प्रधानमंत्री के पद पर आने के बाद 15 अगस्त के लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा था कि “मैं हमारे देश की 140 करोड जनसंख्या के सभी लोगों को मै हमारी टिम इंडिया मानता हूँ . 140 करोड जनसंख्या मे हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध पारशी तथा हमारे जैसे सेक्युलर लोगो का भी समावेश है और हमे भारत को विश्व गुरु बनने के लिए आगे बढाने के लिए मुझे सभी को एकसाथ लेकर चलना है. तो भारत में दूसरे नंबर की जनसंख्या मुसलमानों के और तिसरे नंबर के सिख – ख्रिश्चन के रहते हूऐ . उसके साथ आए दिन इसतरह का भेदभाव करने से टिम इंडिया कैसे हो सकती है ?

आपने लोकसभा के 2014 के चुनाव जीतने के बाद संसदभवन के भितर प्रवेश करने के पहलेही सिढी पर माथा लगाकर दंडवत करने के बाद लोकसभा में प्रवेश करने के बाद हमारे देश के संविधान के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह किया है. क्या वह सिर्फ एक कर्मकांड था ? अगर था तो आप हमारे देश के संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं.तो मुझे यही उदाहरण आपने अक्तुबर 2001 मे गुजरात के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद भी 2002 के फरवरी-मार्च मे गोधरा कांड के बाद हूऐ दंगो मे की आपकी भूमिका की वजह से तत्कालिन प्रधानमंत्री श्री. अटलबिहारी वाजपेयीजीने आपको अहमदाबाद में भरी सभा में सार्वजनिक रूप से कहा था कि “आपने राजधर्म का पालन नहीं किया “. और अब आपको यह बताने के लिए अटलबिहारी वाजपेयी जी नही है. और ऐसा बताने वाला मुझे कोई दिख नहीं दे रहा है. इसलिए मै भारतीय संविधान के अनुसार अपना पूरा जीवन जीने वाला 72 साल का नागरिक आपातकाल के दौरान जेल जाने का अनुभव लिया हुआ, वर्तमान समय में चल रहा अघोषित आपातकाल और देश मे चल रही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को रोकने के लिए देश की एकता और अखंडता को बनाऐ रखने के लिए पिछले अर्धशतक से कोशिश करने वाले कार्यकर्ता को यह खुली चिठ्ठी लिखने का कष्ट करना पड रहा है. इसलिए मेरा विनम्र निवेदन है कि आप यह सब जो भी कुछ किया जा रहा है इसे रोकिऐ अन्यथा हमे और एक बटवारे का सामना करना पड़ सकता है. भारत माता की जय हो













