दिल्ली में संसद भवन के पास कांस्टीट्यूशन क्लब है, यह क्लब काफी पहले बना था जिसका उद्देश्य था की संसद के सदस्य संसद के भूतपूर्व सदस्य और समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के लोग यहां मिलेंगे और आपस में विचार विमर्श करेंगे। यहां बहुत बुनियादी सी सुविधा थी, एक भवन भी था, एक महालनकर हाल भी था जिसमें बड़े-बड़े समारोह होते थे। धीरे-धीरे संसद के वर्तमान और भूतपूर्व सदस्यों ने यह निर्णय लिया कि इससे एक आधुनिक विचार केंद्र के रूप में बदला जाए.. पिछले 20 सालों में धीरे-धीरे यहां नया भवन बना नई सुविधा आई, आधुनिक यंत्र लगे और यहां के सभा भवन पूरी दिल्ली में ही नहीं सारे देश में विख्यात हो गए। सारे देश के वह संस्थान जो महत्वपूर्ण गोश्तियां या सभाएं करना चाहते थे उन्होंने कांस्टीट्यूशन क्लब का प्रयोग करना शुरू किया। आज यह क्लब सारे देश में गौरव का स्थान बन गया है और अब कई राज्यों में कांस्टीट्यूशन क्लब की तर्ज पर राज्यों के भी अपने कांस्टीट्यूशन क्लब बनाने की योजनाएं चल रही है।
इस क्लब को संचालित करने वाली एक समिति है जिसमें सेक्रेटरी एडमिनिस्ट्रेशन होता है और लगभग 11 की कार्यकारिणी होती है। अब तक इसका चुनाव बहुत सौहार्दपूर्ण वातावरण में लगभग सर्व समिति से होता आया था। इस बार यानी 2025 में मंगलवार को अर्थात 12 अगस्त को इसका जो चुनाव हुआ वह बहुत ही निम्न स्तर पर पहुंच गया और इसने आने वाले समय में क्या होगा इसकी आधारशिला रख दी।
12 अगस्त को संपन्न हुए चुनाव में वर्तमान सेक्रेटरी एडमिनिस्ट्रेशन ,भारतीय जनता पार्टी के भूतपूर्व मंत्री और वर्तमान सांसद श्री राजीव प्रताप रूडी एक उम्मीदवार थे और उनके मुकाबले में एक बड़े वर्ग ने भूतपूर्व मंत्री और भूतपूर्व सांसद श्री संजीव बालियान को खड़ा कर दिया। यद्यपि दोनों ही उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी के ही सदस्य हैं लेकिन पता नहीं क्यों भारतीय जनता पार्टी के भीतर इस चुनाव को लेकर बहुत ही ज्यादा कर गर्मी पैदा हो गई। भारतीय जनता पार्टी के बहुत ही प्रख्यात सांसद श्री निशिकांत दुबे ने खुलेआम श्री राजीव प्रताप रूडी का विरोध करना शुरू किया और डाल से जुड़े बाकी लोगों ने यह माहौल बनाया कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व श्री राजीव प्रताप रूडी को नहीं बल्कि श्री संजीव बालियान को क्लब का अध्यक्ष बनना चाहता है।
इस माहौल ने इस चुनाव को धीरे-धीरे मर्यादा की सीमा से नीचे की ओर गिरा दिया। जाट गैर जाट हो गया. दलित बनाम उच्च जाति हो गया, बाहुबली बनाम गैर बाहुबली हो गया और आखिर में लगा यह कांस्टीट्यूशन क्लब के सेक्रेटरी एडमिनिस्ट्रेशन का चुनाव नहीं है, यह भारत के राष्ट्रपति का चुनाव है, यह चुनाव फिर भी अपनी गरिमा नहीं खोता यदि मंगलवार को एक घटना नहीं घटती । भारतीय जनता पार्टी की तरफ से यह तेजी  प्रचार किया गया कि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व श्री राजीव प्रताप रूडी को नहीं बल्कि श्री संजीव बालियान को क्लब का अध्यक्ष बनना चाहता है और इसके लिए श्री अमित शाह ने संजीव बालियान के सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दे दिया है।
मंगलवार की शाम अचानक सुरक्षाकर्मी अलर्ट हो गए और एक कर आई, उसे कर में से देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा, और और देश के शक्तिशाली मंत्री पीयूष गोयल उतरे। इन्होंने एक साथ जाकर वोट डाला, जबकि दोनों उम्मीदवार राजनीतिक रूप से भारतीय जनता पार्टी से ही जुड़े हैं। इन्होंने वोट डालकर के यह बता दिया कि यह संजीव बालियान के पक्ष में है। किसी को समझ में नहीं आया कि आखिर श्री राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी की क्या नाराजगी है। अगर अमित शाह पहले ही बुलाकर श्री राजीव प्रताप रूडी को कह देते कि उन्हें चुनाव नहीं लड़ना है तो चुनाव नहीं लड़ते। इतना ही नहीं इन सारी घटनाओं ने देश की मीडिया का इतना ध्यान कांस्टीट्यूशन क्लब के चुनाव के ऊपर केंद्रित कर दिया की सुबह से लेकर शाम तक यह खबर न्यूज़ चैनलों की बड़ी खबर बनती रही। 13 तारीख की सुबह 4: 00 जब परिणाम की घोषणा हुई तब भी देश के सारे न्यूज़ चैनल वहां पर थे और कांस्टीट्यूशन क्लब दोनों नेताओं के समर्थकों से खचाखच भरा था। सभी का यह मानना था और पत्रकार भी वहां पर यह बताते हुए दिख रहे थे कि उन्होंने कैसे श्री संजीव बालियान के पक्ष में और श्री अमित शाह के पक्ष में माहौल बना दिया। पहली बार देश के कोने-कोने से भूतपूर्व सांसद और सांसद जो क्लब के सदस्य थे अपना पैसा लगाकर दिल्ली आए और उन्होंने वोट डाला।
लेकिन परिणाम सारे अनुमानों के विपरीत निकला.। सेक्रेटरी एडमिनिस्ट्रेशन के पद पर श्री राजीव प्रताप रूडी 100 मतों से विजय घोषित हुए, साथ ही कार्यकारिणी के चुनाव में सबसे ज्यादा मत भूतपूर्व सांसद प्रदीप गांधी को मिले , उन्हें 500 मत मिले जिसने यह साबित किया कि जहां लोगों ने या क्लब के सदस्यों ने श्री राजीव प्रताप रूडी पर भरोसा किया वहीं प्रदीप गांधी के ऊपर सबसे ज्यादा विश्वास किया।
श्री अमित शाह , श्री जेपी नद्धा आरसी पीयूष गोयल ने बैठे बिठाये सारे देश में यह संदेश दे दिया कि सांसदों और भूतपूर्व सांसदों का बहुमत भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व के साथ नहीं है  । बल्कि क्लब के सदस्य  भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार जिसका संकेत श्री अमित शाह ने वोट देकर दे दिया , के विरोध में है और राहुल गांधी और अखिलेश यादव के समर्थन में है। सारे देश में अपने आप यही यही प्रचार हो रहा है श्री राहुल गांधी,  श्रीमती सोनिया गांधी, और श्रीमती जया बच्चन ने अपना खुला समर्थन श्री राजीव प्रताप रूडी को दे दिया जिसकी वजह से वह कांस्टीट्यूशन क्लब के सेक्रेटरी एडमिनिस्ट्रेशन बन गए। यद्यपि यह प्रचार बिल्कुल ही गलत है, सत्य है कि सांसदों ने और भूतपूर्व सांसदों ने क्लब के हित में, श्री राजीव प्रताप रूडी की मेहनत को देखते हुए अपना फैसला दिया।
अब अगले चुनाव में राजनीतिक दल अपना अपना उम्मीदवार खड़े करेंगे, उनके लिए प्रचार करेंगे, उनके लिए पैसा खर्च करेंगे और यह चुनाव राजनीति की शतरंज पर पैसे के बल पर खेला जाएगा । जिस तरह विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में हथकंडे अपनाये  जाते हैं वैसे ही आने वाले चुनाव में यहां भी अपनायेंगे।
इतिहास किसे इस सारी घटना का दोषी मानेगा इसे इतिहास पर ही छोड़ देते हैं।
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