1.वह सबकुछ भूल गया
वह सबकुछ भूल गया
उसे याद नहीं रही
विरह की सर्दियां
चुंबनों का घर
स्पर्श की भाषा
मिलन की हँसी
विदाई का कुंआ
दुःख का चापाकल
और सुख की गौरैया

2.तुम स्वयं संभावना हो
तुम स्वयं संभावना हो
सुख भौंकते हुए आता है
दुख बिल्ली की तरह आहिस्ता
और बिना किसी पदचाप के
हर जख़्म एक दरवाजा है
हर खरोंच एक खिड़की है
प्रेम एक पूरी दुनिया है
मुस्कान एक खुलती हुई खिड़की है
चमकती हुई आंखें दिल को जाती सड़कें हैं
बुझी हुई आंखें आत्मा की ओर जाती सुरंगें हैं
तुम्हारा चेहरा, एक संपन्न दुनिया है
जिसमें आजादी का दरवाजा है
रोशन खिड़िकियां हैं
तुम स्वयं संभावना हो
एक उम्मीद
जो कितनों को जीवित और खुश रखती है।

3.मैं हर बार तुम्हें बचा लूंगी लज्जा से
मैं एक पत्र लिखना चाहती हूँ तुम्हें
बिल्कुल तुम्हारी तरह डरा और सशंकित होगा वह पत्र भी
मैं उस पत्र में कामना को उद्देश्य लिखूंगी
या बादल या कोई इंक़लाबी नारा
मैं उस पत्र में मीठे और गीले संवाद को पानी ,नहर ,विमर्श या धार्मिक अनुष्ठान लिखूंगी
मैं उस पत्र में चुंबन को भंवरा लिखूंगी
स्पर्श को आकाश
संवाद को पतंग
रूदन को धुंआ
अपने ओंठों को खिड़की
और तुम्हारे ओंठों को पर्दा
मैं हर बार तुम्हें बचा लूंगी
उस लज्जा से
जो तुम्हें प्रेम करते वक़्त आई

4.प्रेम स्वयंभू होता है
प्रेम स्वयंभू होता है
जैसे राग मालकौंस
विरह प्रेम के गर्भ से निकलता है
जैसे चन्द्रकौंस निकलता है मालकौंस से
मालकौंस पंचम में गाते हुए लड़के
की पांचों इंद्रियाँ उस सांवली लड़की
के मुख का रिदम पकड़ रही हैं
जो केवड़े के फूलों को  हथेलियों से सहला रही है
प्रेम के दिव्य तार पर आंनद टंगा है

लेखक का परिचय:
1 जनवरी 1982 को मुज़फ़्फ़रपुर में जन्मी और केरल में रह रही  डाॅ.अनामिका अनु को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (2020), राजस्थान पत्रिका वार्षिक सृजनात्मक पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ कवि, प्रथम पुरस्कार, 2021) रज़ा फेलोशिप (2022) ,2023 का ‘महेश अंजुम युवा कविता सम्मान’ (केदार न्यास) और 2025 का प्रतिभा सम्मान (केरल हिंदी प्रचार सभा) मिल चुका है।उनके प्रकाशित काव्यसंग्रह का नाम है ‘इंजीकरी’ (वाणी प्रकाशन)है।उनके प्रकाशित कथा संग्रह का नाम है : ‘येनपक कथा और अन्य कहानियाँ’।यह किताब मंजुल प्रकाशन से आयी है।उन्होंने ‘यारेख : प्रेमपत्रों का संकलन’ (पेंगुइन रैंडम हाउस)का सम्पादन करने के अलावा ‘केरल से अनामिका अनु : केरल के कवि और उनकी कविताएँ ‘का भी सम्पादन किया है। इनकी किताब ‘सिद्धार्थ और गिलहरी’ को राजकमल प्रकाशन ने प्रकाशित किया है जिसमें के. सच्चिदानंदन की इक्यावन कविताओं का अनुवाद है। उन्होंने मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जीवनी भी लिखी है।उनकी रचनाओं का अनुवाद पंजाबी,मलयालम, तेलुगू,मराठी,नेपाली,उड़िया,गुजराती, असमिया,अंग्रेज़ी,कन्नड़ और बांग्ला में हो चुका है।
वह एमएससी (विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक) और पीएच डी (इंस्पायर अवॉर्ड, डीएसटी) भी हैं। अनामिका अनु की रचनाएँ देशभर के सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और मीडिया में देखने, पढ़ने और सुनने को मिलती हैं।
उनसे सम्पर्क करने के लिए ई-मेल आईडी है :
Adv from Sponsors