इस अंक में हम एक ऐसी समस्या पर बात कर रहे हैं, जो सीधे-सीधे ग़रीबों के अधिकारों और विकास से जुड़ी हुई है, यानी बीपीएल सूची, जिसके आधार पर ग़रीबों को बहुत-सी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकता है, मसलन सस्ता राशन, इंदिरा आवास या फिर पेंशन. जिस देश की अधिकांश आबादी ग़रीब हो, वहां यह ज़रूरी हो जाता है कि ग़रीबों से जुड़ी योजनाएं ईमानदारी से लागू की जाएं. लेकिन व्यवहार में अब तक यही देखने को मिला है कि ग़रीबों के विकास के लिए बनाई गईं लगभग सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है, चाहे वह मनरेगा हो या इंदिरा आवास योजना. इसीलिए इन योजनाओं का फ़ायदा उन लोगों तक नहीं पहुंच पाता है, जो इसके हक़दार होते हैं या जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है. ग़रीबों के लिए बनी योजनाओं में घोटाले की ख़बरें आएदिन आती रहती हैं.
ज़ाहिर है, सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए बहुत सारे लोग किसी भी प्रकार से अपना नाम बीपीएल सूची में शामिल करा लेते हैं, नतीजतन, जो ज़रूरतमंद लोग हैं और जिन्हें वाक़ई सरकारी मदद की ज़रूरत होती है, वे इससे वंचित रह जाते हैं. कई राज्यों में तो बीपीएल सूची में एपीएल श्रेणी के लोग भी अपना नाम दर्ज करा लेते हैं. ज़ाहिर है, ऐसा सरकारी अधिकारियों एवं स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों (पंचायत प्रतिनिधियों) की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है. इस अंक में ऐसा ही एक आवेदन प्रकाशित किया जा रहा है, जिसके इस्तेमाल से आप बीपीएल सूची में पारदर्शिता लाने का दबाव डाल सकते हैं और साथ ही सूची तैयार करते समय उसमें होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ या उनका ख़ुलासा कर सकते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आप इस आवेदन का इस्तेमाल ज़रूर करेंगे और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे.
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