आपदा है ये, या तबाही का खेल
या ये है हम सबकी किसी भूल का संकेत
हर तरफ महामारी फैली हुई है
ज़िंदगियाँ बिखरी हुई है
दर्द, आँसू आम हुए हैं
मानवता भी शर्मशार हुई है
आज सब बंद पड़ा है
सड़कें भी सूनसान पड़ी हैं
इंसान घरों में बंद पड़ा है
और मौत का खौफ़ सामने खड़ा है
कल जिसे देखा था आज वो
मौत की आगोश में सोया पड़ा है
सहमें सब इंसान पड़े हैं
छोटे सब शमशान हुए हैं
फिर भी ज़िंदगियाँ चल रही हैं
उसकी रहमतों से संभल रही हैं
सब्र के गीत गा रही हैं
और नई उम्मीद लिए आगे बढ़ रही हैं!
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