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आप भी भ्रष्टाचार से लड़ सकते हैं
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आप भी भ्रष्टाचार से लड़ सकते हैं

भ्रष्टाचार देश को घुन की तरह खा रहा है. अ़फसर से लेकर नेता तक हर कोई लूट के खेल में लगा हुआ है. विधायकों एवं सांसदों का वेतन-भत्ता सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है. रातोंरात बनते इनके महल और करोड़ों-अरबों की संपत्ति देखकर तो यही लगता है. जिस जनता के वोटों से ये चुने जाते हैं, वही इनसे यह नहीं पूछ पाती कि  आखिर कुछ ही समय में इनके पास इतना पैसा कहां से आ गया. ज़ाहिर है, यह पैसा उसी जनता का होता है, लेकिन वह अपने ही पैसों की लूट के खिला़फ आवाज़ नहीं उठाती. यही नहीं, जिस जनता के टैक्स से सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन मिलता है, उसी जनता का काम अधिकारी-कर्मचारी बिना रिश्वत लिए नहीं करते. चाहे एक ग़रीब आदमी का राशनकार्ड बनना हो, इंदिरा आवास, पेंशन का मामला हो. हर काम के लिए रिश्वत की दर तय है और उसके बिना काम नहीं होता. रिश्वत देकर काम कराना ग़रीब आदमी की मजबूरी है, क्योंकि यह उसके जीने-मरने का सवाल होता है. लेकिन हद तो तब होती है, जब एक सुखी-संपन्न आदमी अपना काम कराने के लिए खुशी-खुशी रिश्वत देने को तैयार हो जाता है. उसे यह नहीं पता होता है कि इस घूसखोरी के ज़रिए वह भ्रष्टाचार को ही बढ़ावा दे रहा है.

चौथी दुनिया इस कॉलम के माध्यम से अपने पाठकों को यह बताता रहा है कि भ्रष्टाचार के खिला़फ लड़ाई कैसे लड़ी जा सकती है. इस अंक में भी हमने भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए जनता को और अधिक जागरूक बनाने की कोशिश की है. भ्रष्टाचार के खिला़फ लड़ाई की शुरुआत आप सभी को करनी होगी, व्यवस्था को दोष देने भर से काम नहीं चलने वाला. सूचना अधिकार क़ानून के रूप में आपके पास एक ताक़तवर हथियार है. आप इसका इस्तेमाल करें और भ्रष्टाचारियों के खिला़फ हल्ला बोलें. आप सभी का एक-एक आवेदन भ्रष्ट व्यवस्था को सा़फ करने का काम करेगा. इस अंक में हम एक ऐसे आवेदन का प्रारूप प्रकाशित कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल आप भ्रष्टाचार के खिला़फ अपनी लड़ाई के लिए कर सकते हैं.

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