अब गोली के साथ बोली से भी कसेंगे नक्सलवाद पर नकेल,दंतेवाड़ा के जवान सीख रहे हैं गोंडी बोली

दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बल के जवान आदिवासियों के करीब जाने के लिए उनकी बोली सीख रहे हैं। राज्य के दक्षिण क्षेत्र के इस जिले में सुरक्षा बलों की गोंडी बोली की कक्षा शुरू हो गई है। राज्य के धुर नक्सल प्रभावित जिलों में से एक दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ […]

कश्मीर की बर्बादी के लिए फ़ारूक़ अब्दुल्ला ज़िम्मेदार, महबूबा पाकिस्तान को मदद पहुंचाना चाहती हैं – राम माधव

घाटी में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे बीजेपी नेता राम माधव ने एक बार नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के लोगों के भावनाओं के साथ खेल रहे हैं। माधव ने कहा कि कश्मीरी नेता नहीं चाहते कि उनके राज्य के लोग लोकतांत्रिक […]

झारखंड में नक्सलियों ने भाजपा कार्यालय को बम लगाकर उड़ाया, अगले हमले की भी दी चेतावनी

लोकसभा चुनाव के तीन चरण मतदान हो चुके हैं। इस बीच 29 अप्रैल को झारखंड के पलामू लोकसभा क्षेत्र में चुनाव से ठीक पहले नक्सलियों ने अपनी दस्तक दी है। नक्सलियों ने पूर्व औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड से सटे हरिहरगंज बाजार में चल रहे भाजपा कार्यालय को नक्सलियों ने बम से उड़ा दिया। घटना गुरुवार […]

नक्सलियों से मुठभेड़ : अर्द्धसैनिक बल के जवान ही क्यों मरते हैं?

बिहार के गया-औरंगाबाद जिले की सीमा से लगे नक्सल प्रभावित डुमरी नाला में 18 जुलाई 2016 को पुलिस-नक्सलियों की मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के 10 जवानों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिये हैं. पिछले एक दशक में नक्सली हमले और नक्सली-पुलिस मुठभेड़ में मगध में 50 से अधिक सुरक्षाबलों के जवानों की मौत […]

झारखंड पुलिस की विशेष शाखा ने किया खुलासा : धन कमाने में लगे हैं नक्सली

बन्दूक की नली से सत्ता की राह निकालने की बात करने वाले नक्सली अब अपने तमाम सिद्धांतों को दरकिनार कर उच्चवर्गीय लोगों की तरह जीवन यापन करने में लगे हैं. पुलिस की नजर में भले ही शीर्ष नक्सली नेता फरार हैं, लेकिन इन नक्सलियों का परिवार ऐश्वर्य पूर्ण जीवन जी रहे हैं. नक्सली अपने बेटे-बेटियों […]

नेपाल के पूर्व नरेश की जान खतरे में

माओवादी नेपाल राजवंश के अकेले वारिस पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह की यत्र-तत्र-सर्वत्र बिखरी पड़ी अथाह संपत्ति बटोरने की फिराक में हैं. पहाड़ बनाम तराई का संघर्ष अराजकता फैलाकर हित साधने वाले तत्वों की भड़काऊ साजिश का परिणाम है. इसमें माओवादी भी खुश हैं और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी यही चाहती है. भूकंप […]

सांसत में विकास

माओवादी नहीं चाहते कि आदिवासियों का भला हो और वे मुख्यधारा में आएं. यह तो बेचारे आदिवासियों को पिछड़ेपन की गिरफ्त में बनाए रखने की साजिश है. उनका इरादा नेक नहीं है. उनके लिए आदिवासी केवल ढाल हैं, मोहरा हैं. उनका इकलौता मक़सद हिंसा के रास्ते सत्ता हासिल करना है.

गृहमंत्री जी, आप अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकते

अधिकतर ग़लतियां अक्सर दिमाग़ से शुरू होती हैं. यह सभी जानते हैं कि सुरक्षा मामलों में गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिकी नीति के बड़े हिमायती हैं. इस नीति में अपनी कमियों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन सुरक्षा का यह फार्मूला अमेरिका में मुख्य रूप से विदेशी चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार किया गया था, न कि अंदरूनी समस्याओं से मुक़ाबला करने के लिए.

संभलिए, अभी संभलने का मौक़ा है

किसी भी सरकार को सरकार की तरह व्यवहार करना चाहिए. सरकार का मतलब होता है कि वह देश में रहने वालों के जीवन की, भोजन की, काम की, स्वास्थ्य की और उनके सुख-शांति से रहने की आज़ादी की गारंटी दे. जो सरकार इसे जितना ज़्यादा पूरा करती है, वह उतनी ही अच्छी सरकार मानी जाती है.

जनसंघर्ष मोर्चा देगा राजनीतिक विकल्प

जनसंघर्ष मोर्चा देश की लोकतांत्रिक और बदलाव चाहने वाली ताक़तों का राष्ट्रीय मंच है. इसमें समाजवादी, दलित, आदिवासी-वनवासी और वामपंथी आंदोलन से जुड़ी ताक़तें शामिल हैं. इसका सबसे प्रमुख आंदोलन है, दाम बांधो-काम दो अभियान.

जन सुनवाई का सामना क्यों जरूरी?

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल नरसिंहन ने कभी नहीं चाहा कि केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम सात जनवरी की दंतेवाड़ा जन सुनवाई में हिस्सा लें. इस बात का गवाह है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा गया उनका वह पत्र, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से यह कहा कि गृहमंत्री जैसे अति विशिष्ट शख्स के दौरे से माओवादियों के ख़िला़फ जारी अभियान में रुकावट पैदा होगी.

‘माओवाद’ या ‘मै—मै वाद’?

आपकी तारीफ?
मैं माओवादी हूं
पिछले दिनों पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ झारखंड व उडीसा में जो हत्याएं लूटपाट तोडफोड हुई. वह मैंने ही की थीं.
तारीफ कर रहे हो अपनी या गन हल्का करने के लिए अपना गुनाह कुबूल कर रहे हो?
गुनाह नहीं मैं ‘माओवाद’ फैलाता हूं समाज के गरीब उपेक्षित वर्ग का हितैषी बनने का ढोग करके उन पर राज करता हूं, विदेशी हथियारों और धन से अपना बल आतक तथा साम्राज्य बढाता हू, एक दिन हर जगह सिर्फ में ही मै रहूगा.
यार. तुम्हारा ‘माआवाद’ मुझे ‘मैं—मैं वाद’ ज्यादा लग रहा है निजी स्वार्थ के लिए निर्गम नरसंहार करने वाले तुम मानव कहलाने योग्य नहीं हो. अरे, तुम मानव ही नहीं हो. सरकार तुमको जल्द ही समाप्त कर देगी.
मैं मानव नहीं हूं तो क्या हुआ, सरकार से बचाने के लिए मेरा एक मददगार है.
तुम जैसे ‘अमानव’ की मदद करने कौन आएगा?
मानव अधिकार आयोग।।