रक्षा मंत्रालय और सेना की सबसे बड़ी चूक

राजनीति करना और शासन कला में माहिर होना दो अलग-अलग चीजें हैं. राजनीति जहां जन-समर्थन हासिल करने का कौशल है, वहीं शासन कला देश को सुरक्षित रखने का. जो राजनेता इस अंतर को समझते हैं, वे नादानी नहीं करते, उनसे ग़लतियां नहीं होतीं. हालांकि, अनुभवहीनता की वजह से बड़े-बड़े राजनेता कभी-कभी अति उत्साह वश कुछ […]

आधार कार्ड : देश को गिरवी रखने का षड्यंत्र

मैं यहां सांसदों को भी बताना चाहता हूं कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला किया है कि आधार कार्ड अनिवार्य नहीं किया जाएगा. सर्वोच्च न्यायालय इस बारे में दो-दो, तीन-तीन बार अपनी बात कह चुका है, लेकिन यह सरकार हर जगह आधार कार्ड को अनिवार्य बना रही है. इसका मतलब यह कि कहीं न कहीं […]

मीडिया आलोचना से परे नहीं है

पेड न्यूज चिंता का एक  विषय है. यह है क्या? पेड न्यूज का मतलब है संपादक, रिपोर्टर या प्रकाशक द्वारा पैसा लेकर खबर छापना. शायद इससे उन्हें कोई फर्क़ नहीं पड़ता. लेकिन, जैसे ही पेड न्यूज के रूप में कोई ग़लत खबर छपती है, नुक़सान हो चुका होता है. मीडिया की छवि ख़राब हुई है. […]

28 साल बाद हाशिमपुरा

दरभंगा के बाबूद्दीन और मुजीबुर्रहमान के हौसले को सलाम  साल 1982 की बात है. बिहार के दरभंगा से रोजी-रोटी की तलाश में 16 साल का बाबूद्दीन हजार किलोमीटर दूर मेरठ आ गया था. मेरठ के हाशिमपुरा मोहल्ले में हथकरघा का काम होता है. बाबूद्दीन को अपने साथी मुजीबुर्रहमान के साथ हथकरघा चलाने का काम मिल […]

दिल्ली का बाबू : एक और खेमका!

सरकार के बदलने का हरियाणा के उन बाबुओं के लिए कोई खास मतलब नहीं है, जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा शासन में बच गए थे, लेकिन उन्हें अशोक खेमका और संजीव चतुर्वेदी जैसे अधिकारियों से काफी संघर्ष करना पड़ा. इन दोनों ने अपने कार्यकाल में एक स्वतंत्र लाइन लेने की कोशिश की थी. लेकिन, अब ऐसा […]

प्लीज़, मेरे सवालों का जवाब दे दो

आज मैं आप लोगों के सामने सिर्फ चंद सवाल रखना चाहती हूं, और आप लोगों से उनके जवाब चाहती हूं. क्योंकि आप लोग इन सब चीज़ों के लिए ज़िम्मेदार हैं. आप में मैं भी शामिल हूं. आज मुझे बड़ी उम्मीद थी जब सुबह मैंने यह खबर देखी और हर बड़े एंकर को यह बोलते सुना […]

दिल्ली विधानसभा चुनाव: केजरीवाल के अस्तित्व का सवाल है

दिल्ली में आजकल हर जगह केजरीवाल की गूंज सुनाई दे रही है. रेडियो पर केजरीवाल, मेट्रो में केजरीवाल, ऑटो पर केजरीवाल, होर्डिंग्स में केजरीवाल. हर जगह केजरीवाल नज़र आ रहे हैं. इसकी वजह यह है कि दिल्ली में होने वाला विधानसभा चुनाव आम आदमी पार्टी के लिए अस्तित्व का सवाल है. समस्या यह है कि […]

यूआईडी कार्ड खतरनाक है : देश में क़ानून का राज ख़त्म हो गया है

नरेंद्र मोदी सरकार को देश की सुरक्षा और भविष्य की चिंता नहीं हैं. अगर है, तो फिर वह देश की सुरक्षा से समझौता करने पर क्यों तुली है. मनमोहन सरकार से तो हमें कोई उम्मीद भी नहीं थी, लेकिन अगर मोदी सरकार भी वही गलतियां दोहराए, तो देश के भविष्य और सुरक्षा को लेकर सबको […]

यूआईडी से देश की सुरक्षा को ख़तरा

जितनी भी बायोमैट्रिक जानकारियां हैं, उनकी देखरेख और ऑपरेशन उन कंपनियों के हाथों में है, जिनका रिश्ता ऐसे देशों से है, जो जासूसी कराने के लिए कुख्यात हैं और उन कंपनियों के हाथों में है, जिन्हें विदेशी खुफिया एजेंसियों के रिटायर्ड अधिकारी चलाते हैं. इसका क्या मतलब है? क्या हम जानबूझ कर अमेरिका और विदेशी […]

आधार कार्ड पर पुनर्विचार करने वक़्त आ गया है

संसद में यूआईडी को लेकर बिल लंबित रहा और इधर कार्ड बनने लगे. अब तक छह करोड़ से ज्यादा यूआईडी कार्ड बन चुके हैं. चुनाव के बाद मोदी सरकार आई. मोदी सरकार भी यूपीए सरकार के बनाए रास्ते पर चल पड़ी. ये भी नहीं सोचा कि अगर यूआईडी की पूरी प्रक्रिया बिल्कुल सटीक है तो […]

मोदी का आदर्श ग्राम

दिल्ली हो या गुजरात हो या फिर बनारस का एक गांव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां भी बोलते हैं, उन्हें पूरा देश सुनता है. बनारस के जयापुर गांव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो बातें आदर्श ग्राम को लेकर कहीं, उनसे आदर्श ग्राम की योजना को लेकर जनता में कन्फ्यूजन फैल गया. मोदी के भाषण की […]

मेरठ दंगा : सरकारी जांच का सबसे शर्मनाक अध्याय है

मेरठ दंगा आज़ाद भारत में पुलिस की बर्बरता का सबसे घिनौना अध्याय है. लेकिन, इससे भी शर्मनाक बात यह है कि इसके 26 साल बीत जाने के बाद भी किसी एक गुनहगार को सजा नहीं मिली. इससे भी ज़्यादा शर्मनाक यह है कि इस बात का भी पता नहीं चला कि पीएसी के जवानों ने […]

मीडिया की साख से मत खेलिए

अब सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा का कोई मतलब ही नहीं रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार अभियान में जिस भाषा-शैली का इस्तेमाल किया, वैसी भाषा-शैली का इस्तेमाल इससे पहले किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया. खासकर, राजनीति में अपने साथियों के चुनाव क्षेत्र में भले ही वे किसी […]

उत्तर-प्रदेश : कांग्रेस की चिंतन बैठक से वरिष्ठ नेता नदारद

कांग्रेस पार्टी के खाते में अब केवल तिकड़म और परस्पर खींचतान ही शेष है. सियासी संभावनाओं और भविष्य की स्थापना के प्रयास पर कांग्रेस के नेताओं ने काम करना छोड़ दिया है. पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस की लखनऊ में हुई चिंतन बैठक ने चिंता का संदेश चारों तरफ़ प्रसारित करने का काम किया. सारे वरिष्ठ नेता […]

मोहनलालगंज कांड पर राजनाथ मुलायम क्यों…!

राजनीतिक विश्‍लेषकों का तो यह कहना है कि लोस चुनाव में राजनाथ की राह को पहले मुलायम सिंह ने अहम भूमिका निभाई और केंद्र में सत्तासीन होने के बाद अब राजनाथ की बारी आ गई थी कि वे सपा प्रमुख का अहसान कैसे उतारें. प्रेक्षकों की मानें तो लोकसभा चुनाव में मात खाए मुलायम अब […]

भिलाई स्टील प्लांट हादसा सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

बीते 12 जून को भिलाई स्टील प्लांट में गैस रिसाव के चलते छह लोगों की जान चली गई और क़रीब तीन दर्जन से ज़्यादा लोग हादसे की चपेट में आए. भिलाई गैस हादसे ने लोगों के जेहन में भोपाल गैस त्रासदी की याद ताज़ा कर दी. हादसे के क़रीब एक सप्ताह के बाद बीएसपी के […]

सच्चाई पर पर्दा डालने की समाजवादी साजिश

उत्तर प्रदेश की बिगड़ी क़ानून व्यवस्था कहीं समाजवादी सरकार के लिए अस्थिरता का कारण न बन जाए, यह चिंता समाजवादी थिंक टैंक को अंदर ही अंदर खोखला किए जा रही है. मात्र दो-सवा दो वर्षों में अखिलेश सरकार के ऊपर नाकामी का ऐसा ठप्पा लग गया है, जिसे मिटाना असंभव नहीं, तो मुश्किल ज़रूर है. […]

सोशल मीडिया का राजनीतिक दखल

16 वीं लोकसभा के चुनाव को यदि तकनीक का चुनाव कहा जाए तो यह कतईं गलत नहीं होगा. चुनाव प्रचार से लेकर मतदान और मतगणना तक सब कुछ नई तकनीक पर आधारित था. तकनीक के सफल उपयोग के लिए इन चुनावों को हमेशा याद किया जाएगा. ये चुनाव कई मायनों में पिछले चुनावों से अलग […]

चुनावों पर पैनी रही विदेशी मीडिया की निगाह

देश की 16वीं लोकसभा के लिए चुनाव समाप्त हो चुके हैं. कई मायनों में ऐतिहासिक रहे इस चुनाव पर न सिर्फ देश के मीडिया की नजर रही बल्कि विदेशी मीडिया ने भी इस पर पूरी निगाह रखी. विदेशी मीडिया में पार्टियों के चुनावी प्रचार अभियान सुर्खियां बनते रहा. इन चुनावों को कई उपमाओं से नवाजा […]

क्यों हारे नीतीश और लालू

यह आशंका जताई जा रही थी कि बिहार में भाजपा का विजय रथ थम जाएगा. चुनाव के अंतिम चरण के आते-आते मीडिया में भी यह हवा बन चुकी थी कि लालू यादव बहुत तेजी से आगे बढ रहे है. इसमें किसी को कोई शक नहीं था कि नीतीश कुमार की पार्टी का हश्र ऐसा होगा. […]

सियासत में धर्मगुरुओं की शिरकत

उत्तर प्रदेश का सियासी कारवां तमाम किंतु-परंतु के साथ आगे बढ़ता जा रहा है. नेता बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, जनता सुन रही है. कुछ जगहों पर जनता और नेताओं के बीच विरोधाभास भी देखने को मिल रहा है. राज्य की क़रीब आधी लोकसभा सीटों के मतदाता अपना फैसला ईवीएम मेंे बंद कर चुके हैं. […]

पैसा चुनाव जीत रहा है, मुद्दा नहीं

आजकल समाचारपत्रों में, टेलीविज़न चैनलों पर, एफ एम रेडियो पर, सड़कों के किनारे लगे होर्डिंग्स पर, सोशल मीडिया में मोदी और उनका विकास मॉडल ही नज़र आता है. कांग्रेस और दूसरे राजनीतिक दल इस मामले में काफी पीछे छूट गए हैं. लेकिन, भाजपा द्वारा चलाए जा रहे विज्ञापन के इस तूफानी हमले में जो रक़म […]

यह मीडिया की परीक्षा की घड़ी है

वर्ष 2009 से लेकर 2014 तक का वक्त अगर सबसे ज़्यादा किसी के लिए परीक्षा का साबित होने वाला है, तो वह हिंदुस्तान का मीडिया है. अफवाहें भी हैं, घटनाएं भी हैं और सच्चाइयां भी. इसलिए सही वक्त है कि एक बार इन सारी चीजों का हम लोग जायजा लें. 2009 में लोकसभा के चुनाव […]

नाउम्मीदी के शिकार शरणार्थी

सोलहवीं लोकसभा का चुनाव जोरों पर है. मीडिया लोगों को अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग यानी मतदान करने के लिए प्रेरित कर रहा है. राजनीतिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते हुए जनता को अपने पक्ष में मत देने के लिए मनाते नज़र आ रहे हैं, लेकिन इसी हो-हल्ले के बीच एक वर्ग ऐसा […]

जो इस चुनाव में हमने खोया

मीडिया एक पक्षीय तस्वीर पेश कर रहा है. वह अपने सर्वेक्षणों में बता रहा है कि भाजपा या राजग दिन-प्रतिदिन बढ़त हासिल कर रहे हैं. अभी मीडिया यह भविष्यवाणी कर रहा है कि राजग को 275 सीटें मिल जाएंगी. भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने खुद भाजपा को 272 सीटें मिलने की बात कही है. इन […]

दिल्ली का बाबू : बदलाव के लिए तैयार

अब जबकि दिल्ली में नई सरकार बनने में लगभग एक महीने का समय शेष रह गया है, नौकरशाह नए बदलाव की तैयारी में लग गए हैं. यह आशा की जा सकती है कि आर्थिक गति ठीक करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और दूसरे मंत्रालयों में कई नई नियुक्तियां की जाएंगी. मामले पर निगाह रखने वालों […]

आम चुनाव, मोदी और पाकिस्तान

वर्ष 1947 भारतीय इतिहास के पन्नों में अगर स्वर्णाक्षरों से अंकित है, तो इसी इतिहास का एक स्याह पन्ना भी इस पर दर्ज है. भारत की आज़ादी के साथ-साथ यह वर्ष बंटवारे का दर्द भी लेकर आया था. भारत और पाकिस्तान दो पड़ोसी देश अस्तित्व में आए थे. लेकिन, अपने जन्म के साथ ही इन […]

आप इस देश को कैसे चलाएंगे?

चुनाव अभियान जोरों पर है. अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हो चुके हैं और हम अपना वोट डाल चुके हैं. अगर लोगों की बात और विभिन्न मीडिया द्वारा की जा रही भविष्यवाणी को सच मान लिया जाए, तो भारतीय जनता पार्टी या उसके नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन दो, तीन या चार सहयोगियों के साथ […]

नीति और नीयत साफ़ नहीं है

वैचारिक विरोधाभास किसी भी राजनीतिक दल की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है. ऐसी पार्टियां समाज को नेतृत्व नहीं दे सकतीं, समस्याओं का निदान नहीं कर सकतीं. आम आदमी पार्टी की समस्या यह है कि इसका आधार ही विरोधाभास से ग्रसित है. यही वजह है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बने […]

सूचना का अधिकार ज़रूरी है

सूचना क़ानून को लागू हुए क़रीब पांच साल हो गए. इस दौरान सूचना क़ानून ने आम आदमी को कितना शक्तिशाली बनाया, आम आदमी कैसे सवाल पूछकर व्यवस्था में लगी दशकों पुरानी जंग छुड़ाने में सफल रहा, अपने अधिकार को पाने में सफल रहा आदि बिंदुओं से जुड़े चंद उदाहरण इस अंक में दिए जा रहे […]