Tag: क्रांतिकारी

हमें तीसरे विकल्प की ज़रूरत है

हमें तीसरे विकल्प की ज़रूरत है

बहुत समय के बाद प्रधानमंत्री ने एक राजनीतिक बयान दिया है. हालांकि, इस तरह के बयान के लिए संसद एक सही फोरम नहीं था. उन्होंने कहा कि भाजपा 2004 और 2009 की तरह इस बार भी सत्ता में नहीं आ...

जहां डाल-डाल पर सोने की चिडि़या करती है बसेरा

जहां डाल-डाल पर सोने की चिडि़या करती है बसेरा

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी... यानी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है. जन्म स्थान या अपने देश को मातृभूमि कहा जाता है. भारत और नेपाल में भूमि को मां के रूप में माना जाता है. यूरोपीय देशों में मातृभूमि को पितृ...

मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरी महबूब न मांग

मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरी महबूब न मांग

फैज़ अहमद फैज़ अपनी क्रांतिकारी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं. नोबेल पुरस्कार के लिए नामित फैज़ अहमद फैज़ पर साम्यवादी होने और इस्लाम के उसूलों के खिला़फ लिखने के भी आरोप लगते रहे. उनका जन्म 11 फरवरी, 1911 को...

डुमरांवः शहीदों के परिजन चाय बेच रहे हैं

डुमरांवः शहीदों के परिजन चाय बेच रहे हैं

आज़ाद हिंदुस्तान का ख्वाब लिए हज़ारों क्रांतिकारी सपूत आज़ादी की जंग में खुशी-खुशी शहीद हो गए. इन्हीं में शामिल हैं डुमरांव के चार ऐसे शहीद, जिन्होंने गोरों की गोलियां खाकर अपने खून से आजादी की नई इबारत लिखी. इनकी शहादत...

स्वतंत्रता सेनानी : आजादी के बाद हक की लड़ाई

स्वतंत्रता सेनानी : आजादी के बाद हक की लड़ाई

ॠषिकेश की घटना है. एक दिन सड़क के किनारे एक महिला की लाश मिली. लाश आधी सड़ चुकी थी. लोग लाश को देखकर नाक बंद कर बगल से गुज़र जा रहे थे. किसी ने पुलिस को ख़बर दी. पुलिस आई...

आज़ादी का संघर्ष और समाजवादी

समाजवादी आंदोलन की शुरुआत भारत और दुनिया में एक अर्थ में बहुत पहले हो जाती है. वह अर्थ है अनासक्ति का, मिलकियत और ऐसी चीज़ों के प्रति लगाव ख़त्म करने या कम करने का, मोह घटाने का. जबसे समाजवाद के...

क्रांतिकारियों का पहला धमाका

क्रांतिकारियों का पहला धमाका

22 जून, 1897 को रैंड को मौत के घाट उतार कर भारत की आज़ादी की लड़ाई में प्रथम क्रांतिकारी धमाका करने वाले वीर दामोदर पंत चाफेकर का जन्म 24 जून, 1869 को पुणे के ग्राम चिंचवड़ में प्रसिद्ध कीर्तनकार हरिपंत...

लीडर भी बनेंगी लीडर पैदा भी करेंगी

लीडर भी बनेंगी लीडर पैदा भी करेंगी

भारतीय मुस्लिम महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी हो या नहीं, इस प्रश्न पर मौलाना हज़रात ने फिर राजनीति शुरू कर दी है. प्रश्न यह नहीं कि धर्मगुरुओं ने पहली बार महिलाओं के मौलिक अधिकारों एवं भारतीय संविधान के अधिकारों की...

शहीद स्थल बाज़ारू संस्कृति की भेंट चढ़ा

शहीद स्थल बाज़ारू संस्कृति की भेंट चढ़ा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सीवान के अनेक युवा क्रांतिकारी शहीद हुए थे. उन्होंने आने वाली पी़ढी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. लेकिन, विडंबना देखिए कि उन वीर सपूतों के बलिदान को भुला कर उनके स्मारकों को...

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