Tag: इस्लाम

यौम-ए-आशूरा यानी हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में

यौम-ए-आशूरा यानी हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में

मुहर्रम के महीने की दसवीं तारीख को यौम-ए-आशूरा मनाया जाता है. यौम-ए-आशूरा का अर्थ है (यौम यानी दिन और आशूरा यानी दसवां जो अशर या अशरा से बना है, जिसका अर्थ होता है दस) दसवां दिन. दरअसल इसी दिन कर्बला...

जाकिर नाइक ने लिया कानूनी दांव-पेच का सहारा, कई नेताओं को भेजा नोटिस

जाकिर नाइक ने लिया कानूनी दांव-पेच का सहारा, कई नेताओं को भेजा नोटिस

जाकिर नाइक पर हिन्दू विरोधी बयान देने के आरोप में मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद तीन दिन पहले ये बयान दे चुके हैं कि अगर यह साबित हो गया कि नाइक की गतिविधियां मलेशिया के लिए नुकसानदेह हैं तो उसका...

आज से तीन तलाक पर खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

आज से तीन तलाक पर खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

नई दिल्ली। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन तलाक को खत्म कर दिया। अपने फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 महीने के भीतर संसद इसको लेकर कानून बनाए। तब तक के लिए...

अपने रहमतल्लिल आलमीन को जानिए : मुहम्मद साहब की  जीवनी पर एक नई किताब

अपने रहमतल्लिल आलमीन को जानिए : मुहम्मद साहब की जीवनी पर एक नई किताब

पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद साहब के जीवनी पर अनगिनत किताबें लिखी जा चुकी हैं. लेकिन इस विषय पर एक ऐसी किताब की जरूरत महसूस की जा रही थी जो मौजूदा दौर की समस्याओं की पृष्ठभूमि में सीरत-ए-नबवी (मुहम्मद साहब की जीवनी)...

भारत के लिए अहम क्यों

भारत के लिए अहम क्यों

भारत और कुवैत के संविधान में राजनीतिक दलों द्वारा जनता का प्रतिनिधित्व का न होना कॉमन फैक्टर है. अन्ना हज़ारे भी यही बात समझाने के लिए गांव-गांव घूम रहे हैं. अन्ना हज़ारे का कुवैत का एक दौरा आपसी संबंधों को...

अलविदा! इंजीनियर

अलविदा! इंजीनियर

असगर अली इंजीनियर साहब एक तरक्की पसंद और प्रगतिशील विचारधारा के स्कॉलर थे. अस्सी के दशक में इस चिंतक और विचारक ने इस्लाम और उसकी व्याख्या को तर्कों की कसौटी पर कसना शुरू किया, तो कट्टरपंथी बेचैन हो गए. आज...

शक का लाभ

शक का लाभ

ओसामा बिन लादेन का कहना था कि अमेरिका के खिला़फ उसके जिहाद को रोकने का एकमात्र रास्ता है कि अमेरिका के लोग इस्लाम कबूल कर लें. इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है. लादेन को यह विश्वास उसके क़ुरान पढ़ने...

सीरिया : बशर वास्तविकता को स्वीकार करें

सीरिया : बशर वास्तविकता को स्वीकार करें

सीरिया में मार्च 2011 से राष्ट्रपति बशर अल असद के विरुद्ध आंदोलन चल रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, सरकार विरोधी विद्रोह को दबाने के लिए की गई कार्रवाई में अब तक पांच हज़ार लोग मारे जा चुके हैं....

इस्‍लामी दुनिया के महानायक

इस्‍लामी दुनिया के महानायक

बात लीबिया में हो रही जनतांत्रिक क्रांति की. यहां प्रति व्यक्ति आय 13400 अमरीकी डॉलर है. ज़ाहिर है, यह देश ग़रीब नहीं है. लीबिया यूरोप का सबसे बड़ा तेल और गैस का सप्लायर है. गद्दा़फी ने लोगों को भरोसा दिलाया...

अब भारत में तालिबानी फरमान

अब भारत में तालिबानी फरमान

ऐसा लगता है कि आजकल इस्लाम को बदनाम करने का ठेका स़िर्फ मुसलमानों ने ले रखा है. न स़िर्फ दुनिया के तमाम देशों, बल्कि भारत से भी अक्सर ऐसे समाचार मिलते रहते हैं, जिनसे इस्लाम बदनाम होता है और मुसलमानों...

आतंकवादी मानवता के दुश्मन हैं

हिंदू आतंकवाद, मुस्लिम आतंकवाद, संघ परिवार का आतंकवाद यह तीनों ही शब्द स्वामी असीमानंद के अपराध स्वीकारने के बाद से लगातार सुनने में आ रहे हैं. एक अख़बार ने शीर्षक लगाया, असीमानंद के अपराध स्वीकारने से इस्लाम और मुसलमानों को...

मुस्लिम पर्सनल लॉ को संहिताबध्‍द करने का मुद्दा

मुस्लिम पर्सनल लॉ को संहिताबध्‍द करने का मुद्दा

समान नागरिक संहिता भारतीय राजनीति में लंबे समय से एक ज्वलंत और विवादास्पद मुद्दा रहा है. वर्ष 1980 के दशक के मध्य में भाजपा ने इसे अपने हिंदुत्ववादी एजेंडे में शामिल करके इसका इस्तेमाल हिंदू मध्यम वर्ग के वोट बटोरने...

सबका मालिक एक

सबका मालिक एक

हेमाड पंत जी साई सच्चरित्र में लिखते हैं, बाबा अक्सर कहा करते थे कि सबका मालिक एक. आख़िर इस संदेश का मतलब क्या था? आइए बाबा के इसी संदेश पर कुछ बातें करें. बाबा के विषय में हम जितना मनन...

नदवातुल उलेमाःशिक्षा के साथ संस्कार भी

नदवातुल उलेमाःशिक्षा के साथ संस्कार भी

दारुल उलूम नदवातुल उलेमा का जिक्र आते ही जेहन में एक तस्वीर उभर कर आती है. वह यह कि दीनी तालीम की दुनिया में अहम दर्ज़ा रखने वाला एक मदरसा, जहां पाक कुरान और हदीस की रोशनी में इल्म हासिल...

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट और मुसलमान

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट और मुसलमान

इस्लाम हमेशा हमारे दिलों के क़रीब रहा है और भारत में इसका विकास और विस्तार लगातार जारी रहेगा. हमारी धार्मिक सोच इतनी विस्तृत है कि इसमें हर विचारधारा के लिए जगह है. सभी धार्मिक विचारधाराएं अपनी पहचान बनाए रखते हुए...

इस्लाम की हक़ीक़त की चिंता किसे है?

इस्लाम की हक़ीक़त की चिंता किसे है?

यदि इस्लाम के वजूद की कोई एक वजह है तो इसका सीधा संबंध एक ऐसे समाज से है, जिसमें समानता हो और जो हर तरह की इच्छाओं और दमन से स्वतंत्र हो. इस नज़रिए से देखें तो इस्लाम के लिए...

मियो किसानों का विद्रोह और तबलीगी जमात

मियो किसानों का विद्रोह और तबलीगी जमात

वर्ष 1910 के अंत तक मेवात के मियो बहुल ग्रामीण इलाक़ों में कृषकों की समस्याएं अपने चरम पर पहुंच चुकी थीं. इसके साथ-साथ मियो समुदाय के अंदर शिक्षित लोगों का एक नया तबका भी तैयार हो चुका था, जो खेतिहर...

जिहाद से इत्तिहाद तक

जिहाद से इत्तिहाद तक

जिहाद, एक ऐसा शब्द, जिसे हर अर्थ में ग़लत ही माना जाता है. और, यह 9/11 के हमले के बाद पश्चिमी देशों के लिए एक ख़ौ़फनाक शब्द बनकर रह गया है. पाकिस्तान, अ़फग़ानिस्तान एवं इराक जैसे मुस्लिम देश आज हर...

मेवात का सामाजिक-आर्थिक परिवेश और तबलीगी जमात

मेवात का सामाजिक-आर्थिक परिवेश और तबलीगी जमात

मेवात इलाक़े में अधिकतर ज़मीनों पर खेती मियो किसान ही करते थे, लेकिन कुछ चौधरियों (स्थानीय समुदायों के नेताओं) को छोड़कर बड़े जमींदारों में उनकी गिनती नहीं थी. अधिकांश मियो छोटे किसान ही थे और ग़रीबी की हालत में जीते...

मियो समुदाय और तबलीगी जमात

मियो समुदाय और तबलीगी जमात

भौगोलिक विस्तार और कार्यकर्ताओं की संख्या के नज़रिए से तबलीगी जमात (टीजे) आज की तारीख़ में दुनिया का सबसे बड़ा इस्लामिक आंदोलन है. तबलीगी जमात के ऐतिहासिक अध्ययन के लिए ज़रूरी है कि हम पहले उन लोगों के बारे में...

पुण्यतिथि पर विशेष : ऐसे थे इ़कबाल

पुण्यतिथि पर विशेष : ऐसे थे इ़कबाल

जब मैं नहीं रहूंगा तो लोग मेरी कविताएं प़ढेंगे, उसे समझेंगे और फिर कहेंगे, खुद को पहचान कर उसने दुनिया को बदल दिया. यह कहना था मोहम्मद इ़कबाल का. 9 दिसंबर, 1877 को अविभाजित भारत में सियालकोट के एक कश्मीरी...

कोई नहीं रोक सकता हमें राजनीति करने से

कोई नहीं रोक सकता हमें राजनीति करने से

मुसलमान औरतों का भला राजनीति में क्या काम? वे कैसे आ सकती हैं राजनीति में.अल्लाह ने औरतों को महज़ बच्चा पैदा करने के लिए ही ज़मीन पर भेजा है. उनका काम है कि वे घर बैठें और अच्छी नस्ल के...

ये फतवे बेमानी हैं

ये फतवे बेमानी हैं

महिला आरक्षण में पिछड़े वर्ग को शामिल करने का मुद्दा तो पहले से ही गर्म था, उस पर मदरसे से लेकर शिया धर्म गुरुओं ने अपनी डफली अपना राग की तर्ज पर राजनीति में मुस्लिम महिलाओं के आने के मुद्दे...

लीडर भी बनेंगी लीडर पैदा भी करेंगी

लीडर भी बनेंगी लीडर पैदा भी करेंगी

भारतीय मुस्लिम महिलाओं की राजनीति में हिस्सेदारी हो या नहीं, इस प्रश्न पर मौलाना हज़रात ने फिर राजनीति शुरू कर दी है. प्रश्न यह नहीं कि धर्मगुरुओं ने पहली बार महिलाओं के मौलिक अधिकारों एवं भारतीय संविधान के अधिकारों की...

आतंकियों के खिला़फ जारी हुआ फतवा

आतंकियों के खिला़फ जारी हुआ फतवा

पिछले एक साल से पाकिस्तान में जो कुछ भी हो रहा है-आतंकी जुमे के दौरान मस्जिदों में हमले कर रहे हैं, स्कूलों को जलाया जा रहा है, महिलाओं का क़त्ल हो रहा है, क़ब्र में पड़े मुर्दों को निकाला जा...

औरत के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने का मतलब है मुसीबत को हवा देना

औरत के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने का मतलब है मुसीबत को हवा देना

औरतों के फर्ज़ की जब बात आती है तो सारा मंच एक तऱफ दिखाई देता है, चाहे वह राजनीतिक हो, धार्मिक हो या फिर स्कॉलर हों या धर्मगुरु. लेकिन जब औरत के हक़ की बात आती है, चाहे उस हक...

अंधे सिर्फ आलोचना करते हैं समाधान नहीं देते

अंधे सिर्फ आलोचना करते हैं समाधान नहीं देते

औरतों के इतिहास में एक सम्मानजनक नाम आया है, जिन्हें बीबी मरियम कहा जाता है. मरियम का मतलब पाकीज़ा होता है यानी पवित्रता. मरियम को हमारे देश के ईसाई और तक़रीबन सभी समुदाय के लोग बड़े सम्मान और श्रद्धा से...

औरतों का मुक़ाम समाजी और सियासी दोनों है

औरतों का मुक़ाम समाजी और सियासी दोनों है

सामाजिक जीवन में पुरुष-महिला का रिश्ता सबसे अहम है. उसका कारण यह है कि यह रिश्ता मानवीय संवेदना की बुनियाद है और इसमें मामूली सी ग़लती भी सामाजिक ढांचे को बदनुमा और दाग़दार बना सकती है. हमारा इतिहास औरतों पर...

इस्लाम और महिलाओं में खाई पैदा मत कीजिए

इस्लाम और महिलाओं में खाई पैदा मत कीजिए

संसद के उच्च सदन में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद कुछ अजीब तरह की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं. कुछ ऐसे सम्माननीय लोगों ने भी अपनी झुंझलाहट प्रकट की है, जिनसे इसकी अपेक्षा नहीं की जा सकती थी.

इस्‍लाम में आत्‍मघाती हमला हराम है

इस्‍लाम में आत्‍मघाती हमला हराम है

सुसाइड अटैक यानी आत्मघाती हमलों का इस्तेमाल इतिहास के अलग-अलग पड़ावों पर अलग-अलग सभ्यताओं ने किया है और हर बार इसका उद्‌देश्य धार्मिक ही नहीं रहा है. जर्मनी, जापान, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों ने इसे युद्ध के एक हथियार...

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