Tag: इतिहास

राम मंदिर विवाद कांग्रेस ने पैदा किया-II:- मूर्ति किसने रखी, किसने रखवाई

राम मंदिर विवाद कांग्रेस ने पैदा किया-II:- मूर्ति किसने रखी, किसने रखवाई

22 दिसंबर, 1949 को बाबरी मस्जिद परिसर में रामलला प्रकट हुए और 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वस्त की गई. 40 से अधिक वर्षों के इस अंतराल के दौरान सार्वजनिक रूप से जो कुछ घटा, उसे तो हम सब...

इतिहास फिर से क्यों लिखा जाना चाहिए

इतिहास फिर से क्यों लिखा जाना चाहिए

आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी-भरकम जीत के साथ ही यह तय हो गया था कि अब देश में इतिहास को लेकर विवाद उठेगा. भारतीय जनता पार्टी की सरकार इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश करेगी, जिसका...

नया स्वघोषित ख़लीफ़ा

नया स्वघोषित ख़लीफ़ा

खिलाफ़त आंदोलन को भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है. इस आंदोलन के 94 सालों के बाद अब हमें एक नया ख़लीफ़ा मिल गया है, जो यह दावा करता है कि उसे सुन्नी मुसलमानों का समर्थन हासिल है. महात्मा गांधी...

नतीजे हैं या पुनर्जागरण?

ग्रेट ब्रिटेन के आख़िरी प्रधानमंत्री मार्केस ऑफ सेलिसबरी ने हाउस ऑफ लार्ड्स की बैठक के दौरान एक बार महारानी विक्टोरिया से कहा था कि आख़िर सभी लोग बदलाव की बात क्यों करते हैं? वास्तविकता में स्थितियां इतनी बुरी हैं नहीं,...

नेतृत्व की विचारशून्यता

नेतृत्व की विचारशून्यता

आज़ादी आंदोलन के दौरान और उसके बाद नेहरू युग में राजनीतिक बिरादरी में प़ढने-लिखने का ज़बरदस्त शौक़ था. नेता न स़िर्फ प़ढते थे, बल्कि समय-समय पर उन अमूल्य विचारों को व्यक्त भी करते थे. उनकी तुलना में अगर आज हम...

ख़ुरासान की रोचक लोक कथाएं

ख़ुरासान की रोचक लोक कथाएं

दुनिया भर के देशों की अपनी संस्कृति और सभ्यता है. लोक कथाएं भी इसी संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक हैं. लोक कथाओं से किसी देश, किसी समाज की संस्कृति और उनकी सभ्यता का पता चलता है. बचपन में सभी ने...

टाइन बाउन ने इतिहास रचा

टाइन बाउन ने इतिहास रचा

डेनमार्क की बैडमिंटन खिला़डी टाइन बाउन ने 33 वर्ष की उम्र में ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप का महिला एकल ख़िताब जीतकर इतिहास रच दिया है. उन्होंने प्रतियोगिता के फाइनल में सबसे कम उम्र में जगह बनाने वाली 18 वर्षीय थाईलैंड...

जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी

जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन दिनों अपने मूल स्थान से विस्थापित होना प़ड रहा है. हालांकि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद कर रहे...

निर्णयों पर अडिग रहते थे संजय गांधी

निर्णयों पर अडिग रहते थे संजय गांधी

आज़ाद भारत के इतिहास में संजय गांधी ऐसे इकलौते राजनेता हैं, जिनके व्यक्तित्व और क्रियाकलापों के बारे में जानने की जिज्ञासा भारतीय जनमानस में अब भी है, लेकिन उनके बारे में ज़्यादा लिखित सामग्री उपलब्ध नहीं है, लिहाज़ा उनके बारे...

गांवों की पुरातन व्यवस्था

गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत का वर्ष भर दौरा किया. भारत के ग्रामीणों की दुर्दशा देखी. उनके मुंह से वेदनापूर्ण उद्गार निकले, हमारे गांव पैमाल (तुच्छ) हो गए हैं, क्योंकि हम सच्चा अर्थशास्त्र एवं सच्चा समाजशास्त्र जानते...

इतिहास कभी मा़फ नहीं करता

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंद्रह अगस्त को लाल क़िले से देश को संबोधित किया. संबोधन से पहले लोग आशा कर रहे थे कि वह उन सारे सवालों का जवाब देंगे, जो देश के सामने हैं या जिन्हें उनके सामने उठाया...

महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

महाभारत के पात्र आसपास बिखरे हैं

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लेकर आज तक सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है. उस व़क्त भी ताक़तवर व्यक्ति अपने फायदे के लिए कमज़ोर व्यक्ति का इस्तेमाल करता था, और आज भी ऐसा ही...

स्त्री विमर्श की बदमाश कंपनी

स्त्री विमर्श की बदमाश कंपनी

हिंदी में स्त्री विमर्श का इतिहास बहुत पुराना नहीं है. हिंदी साहित्य में माना जाता है कि राजेंद्र यादव ने अपनी पत्रिका हंस में स्त्री विमर्श की गंभीर शुरुआत की थी. दरअसल स्त्री विमर्श पश्चिमी देशों से आयातित एक कांसेप्ट...

लॉयनल मेसी : फुटबॉल का स्वर्णिम युग या सर्वश्रेष्‍ठ फुटबॉलर?

लॉयनल मेसी : फुटबॉल का स्वर्णिम युग या सर्वश्रेष्‍ठ फुटबॉलर?

फुटबॉल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि वैज्ञानिक किसी खिला़डी के अद्‌भुत खेल का कारण जानना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने लॉयनल मेसी के दिमाग़ का परीक्षण करने का फैसला किया है, क्योंकि मेसी अभी 25 साल...

श्यामल के हौसले को सलाम

श्यामल के हौसले को सलाम

दुनिया में इतिहास रचने वालों की कोई कमी नहीं है. कुछ लोग अपना नाम चमकाने के लिए इतिहास रचते हैं तो कुछ लोग निस्वार्थ रूप से अपना कार्य करते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि उन्होंने इतिहास रच...

लेफ्टिनेंट की कुर्बानी बेकार गई

लेफ्टिनेंट की कुर्बानी बेकार गई

बीते 20 अगस्त को गुरेज सेक्टर में भारतीय सेना का एक युवा लेफ्टिनेंट आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गया. शहीद लेफ्टिनेंट 15 मराठा एलआई बटालियन से जुड़ा था. इस युवा सेना अधिकारी की शहादत ने देश के समक्ष हमारे...

इक और जहां मुमकिन है

इक और जहां मुमकिन है

कैमूर क्षेत्र के जनपद सोनभद्र, मिर्जापुर एवं चंदौली के दलितों-आदिवासियों ने पिछले 8 वर्षों में जंगल की खाली और बंजर पड़ी क़रीब 30,000 एकड़ ज़मीन पर दोबारा अपना दख़ल क़ायम करते हुए 25 से ज़्यादा नए गांव बसाकर एक नया...

शरणार्थी समस्या : सकारात्मक पहल की ज़रुरत

शरणार्थी समस्या : सकारात्मक पहल की ज़रुरत

जनसंख्या विस्थापन के क्षेत्र में दक्षिण एशिया का एक अनूठा इतिहास रहा है. यहां युद्ध के बाद लोग या तो अपने देश की सीमाओं से बाहर निकाल दिए गए अथवा वे जाति, नस्ल या धर्म के आधार पर देश छोड़ने...

पश्चिम बंगालः नया इतिहास गढ़ने की तैयारी

पश्चिम बंगालः नया इतिहास गढ़ने की तैयारी

चुनावी मौसम में मुद्दों का क़ब्रिस्तान खोद डालने का रिवाज नया नहीं है और जब मुक़ाबला ऐतिहासिक रूप से कांटे का हो तो उन मुर्दों के कंकाल से विरोधियों को डराने की कोशिश भी होती रही है.

स्वतंत्रता सेनानी : आजादी के बाद हक की लड़ाई

स्वतंत्रता सेनानी : आजादी के बाद हक की लड़ाई

ॠषिकेश की घटना है. एक दिन सड़क के किनारे एक महिला की लाश मिली. लाश आधी सड़ चुकी थी. लोग लाश को देखकर नाक बंद कर बगल से गुज़र जा रहे थे. किसी ने पुलिस को ख़बर दी. पुलिस आई...

टोनी ब्‍लेयर की जर्नी

टोनी ब्‍लेयर की जर्नी

टोनी ब्लेयर ब्रिटेन के पहले ऐसे राजनेता थे, जो बग़ैर किसी सरकारी अनुभव के सीधे प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुए थे. वह ब्रिटेन के लंबे लोकतांत्रिक इतिहास के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिनके नेतृत्व में पार्टी ने आम चुनाव में...

इतिहास का नायक

इतिहास का नायक

बिहार में नीतीश कुमार की जीत उनकी अपनी है या बिहार की जनता की है, यह सवाल बहुतों के मन में है. इसका उत्तर बहुत साफ है, बिहार में जनता जीती है और उसने नीतीश कुमार के रूप में एक...

करवट बदलती शाम-ए-अवध

करवट बदलती शाम-ए-अवध

जी हुजूर! शाम-ए-अवध यूं ही दुनिया भर में मशहूर नहीं है. लखनऊ की शाम की रंगीनियत यहां के वाशिंदों के दिलों में तो बसी ही है, साथ ही लखनऊ की शाम को देखने के मुंतज़िर लोगों को भी अपनी ओर...

हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा

हमने इतिहास से कुछ नहीं सीखा

एक राष्ट्र के रूप में आज हम जिन समस्याओं से रूबरू हैं, वह बेवजह नहीं है. आतंकवाद, बढ़ती बेरोज़गारी, ग़रीबी, शिक्षा का अभाव, संस्थाओं के बीच टकराव और सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने के लिए मची होड़ आदि सारी समस्याओं...

क्‍या डॉ. लोहिया समाजवादियों को याद हैं?

क्‍या डॉ. लोहिया समाजवादियों को याद हैं?

समाजवादी आंदोलन का इतिहास जुड़ने से ज़्यादा टूटने का रहा है. जिस डा. लोहिया को कांग्रेस के ख़िला़फ मोर्चा बनाने में जनसंघ से समझौता करने में परहेज नहीं हुआ, उसी जनसंघ के नए चेहरे भाजपा को लेकर समाजवादी खेमों में...

नैनो सेटेलाइट जुगनू

नैनो सेटेलाइट जुगनू

छह मार्च, 2010 आईआईटी कानपुर के इतिहास का सबसे सुनहरा दिन था, क्योंकि संस्थान ने इसी दिन अपनी स्थापना के 50 बरस पूरे किए. यह ऐतिहासिक दिन आईआईटी कानपुर के लिए उपलब्धियों के लिहाज़ से भी यादगार बना. संस्थान ने...

104 वर्ष की हुई पुलिस अकादमी

104 वर्ष की हुई पुलिस अकादमी

सन 1660 में राजा ऊदनशाह द्वारा निर्मित किए गए विशालकाय दुर्ग को आज सागर में जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी के नाम से जाना जाता है. 104 वर्ष की उम्र में आज भी इस अकादमी का वैभव और गरिमा वैसे ही...

सचिन का दोहरा शतक और क्रिकेट

सचिन का दोहरा शतक और क्रिकेट

ग्‍वालियर के रूप सिंह स्टेडियम में मैदान से पेवेलियन लौट रहे जैक कालिस की आंखों में सबकुछ नज़र आ रहा था. मैच ही नहीं, वनडे सीरीज़ गंवा चुके दक्षिण अफ्रीकी कप्तान की आंखों में हार का गम पानी की तरह...

मुंगेर का अभेद्य किला ढहने लगा

मुंगेर का अभेद्य किला ढहने लगा

अंग जनपद की ऐतिहासिक धरोहर मुंगेर किला अनेक उत्थान-पतन का साक्षी है. यह किला आज सरकारी उपेक्षा के कारण ढहने के कगार पर है. जिस किले पर कभी नौबत बजती थी, वहीं अब सन्नाटा पसरा है. इसकी दीवारें ढहनी शुरू...

राजा भोज के असली चेहरे की तलाश

राजा भोज के असली चेहरे की तलाश

इतिहास में गर्भ में न जाने कितने राज़ द़फन हैं. राजा महाराजाओं की विरासत से लेकर विलुप्त हो चुकी संस्कृतियों की जानकारी इसी गर्भ से हासिल होती है. लेकिन कुछ गुत्थियां ऐसी होती हैं जो अनसुलझी ही रह जाती हैं....

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