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सेक्‍स, सीडी और खिलाड़ी
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सेक्‍स, सीडी और खिलाड़ी

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. इससे भी बड़ा परिचय उनका यह है कि वह सांसद हैं. ऐसे-वैसे सांसद नहीं, बल्कि संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं. वह देश में क़ानून बनाने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली केंद्र हैं. इससे भी बड़ी ज़िम्मेदारी अभिषेक मनु सिंघवी पर यह है कि जब-जब कांग्रेस पार्टी और सरकार पर कोई मुसीबत आती है, तो वही मीडिया के सामने और संसद के अंदर दोनों का बचाव करने आगे आते हैं. वाजिब है, ऐसा व्यक्ति न स़िर्फ शक्तिशाली होगा, साथ ही वह बुद्धिमान एवं ज्ञानी भी होगा और होना भी चाहिए, लेकिन अभिषेक मनु सिंघवी ने जो किया, उससे यही लगता है कि उन्हें इस बात का घमंड हो गया कि अपनी शक्तिके इस्तेमाल से वह मीडिया को रोक लेंगे, क़ानून की अपनी जानकारी से क़ानूनी प्रक्रिया को ही पथभ्रष्ट कर देंगे और देश की जनता को बेवक़ू़फ बनाकर अपना अपराध छिपा ले जाएंगे. उन्हें इस बात का अहंकार था कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकेगा. इसी अहंकार ने उन्हें अंधा बना दिया और वह एक के बाद एक ग़लतियां करते चले गए. राष्ट्रीय स्तर के राजनेता के लिए यह सचमुच अशोभनीय है कि वह अपना अपराध छिपाने के लिए अपने ड्राइवर को भी उसमें शामिल कर ले और उसे भी अपराधी बना ले. भारत में किसी बड़े आदमी की सेक्स सीडी सार्वजनिक हो जाती है तो वह जंगल की आग की तरह फैल जाती है. इसे रोकना वैसे भी किसी के वश की बात नहीं है. अब तो इंटरनेट का ज़माना है तो यह काम और भी मुश्किल हो जाता है. सबसे पहले जानते हैं कि अभिषेक मनु सिंघवी ने इस सेक्स सीडी के पीछे की क्या कहानी बताई.

अगर आप देश की एक बड़ी शख्सियत हैं, राजनेता हैं, क़ानून के जानकार हैं, सांसद हैं, अमीर हैं तो क्या अपनी बिरादरी के लोगों पर ज़ोर चलाकर और क़ानून का सहारा लेकर सारे संवैधानिक, नैतिक एवं न्यायसंगत दायित्यों से छूट जाएंगे? क्या आपको इस बात की आज़ादी मिल जाती है कि खुद को बचाने के लिए आप ग़रीब ड्राइवर को भी अपने अपराध में सहभागी बना देंगे, क्या संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरपर्सन की सेक्स सीडी शोभनीय है? देश की सबसे बड़ी पार्टी का मुख्य प्रवक्ता जज बनने का प्रलोभन देते हुए किसी सेक्स सीडी में नज़र आए तो यह मान लेना चाहिए कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता है. क्या विपक्ष मौन रहेगा, क्या दूसरी संवैधानिक संस्थाएं इसे नज़रअंदाज़ कर देंगी और क्या हमारे देश में इसी प्रक्रिया से जज बनाए जाएंगे?

अभिषेक मनु सिंघवी ने इस सेक्स सीडी का प्रसारण रुकवाने के लिए एक ज़बरदस्त रणनीति तैयार की. उनके मुताबिक़, यह सीडी उनके ड्राइवर मुकेश कुमार लाल ने बनाई. वह इस सीडी के ज़रिए उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है. अभिषेक मनु सिंघवी यह भी बताते हैं कि उनके ड्राइवर ने यह सीडी क्यों बनाई. उनके मुताबिक़, एक दिन उनके कुत्ते ने ड्राइवर की पत्नी को काटा था. ड्राइवर को लगता है कि कुत्ते के काटने की वजह से ही उसकी पत्नी ने विकलांग बच्चे को जन्म दिया. वेतन को लेकर भी उसकी नाराज़गी थी. उसे लगता था कि इतना ज़्यादा पैसा होने के बावजूद सिंघवी परिवार उसे बहुत कम वेतन दे रहा है. इसलिए ग़ुस्से में आकर उसने सीडी बनाई, क्योंकि वह सिंघवी परिवार से बदला लेना चाहता था. सिंघवी साहब खुद इस मामले को पुलिस और कोर्ट में लेकर गए थे. सिंघवी ने अदालत को बताया कि लाल ने गत 17 मार्च को बिना पूर्व सूचना के काम छोड़ दिया. उसके बाद 22 से लेकर 24 मार्च तक लगातार तीन दिन उसके एसएमएस सिंघवी को मिले, जिनमें धमकी भरे अंदाज़ में संदेश दिया गया था. 24 मार्च को जब सिंघवी ने लाल से बातचीत की, तो उसने ब्लैकमेल करने की कोशिश की. लाल ने उन्हें धमकाया था कि अगर उसे पैसा नहीं मिला तो वह सिंघवी के बारे में और ज़्यादा अ़फवाहें फैलाएगा. सिंघवी की तऱफ से पुलिस थाने में भी रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है.

दिल्ली हाईकोर्ट में 13 अप्रैल को सुनवाई हुई. इस दौरान ड्राइवर मुकेश लाल ने कहा है कि उसने दरभंगा (बिहार) की एक दुकान में इसकी चार सीडी तैयार कराई थीं. जस्टिस रेवा खेत्रपाल ने सिंघवी के ड्राइवर मुकेश लाल का बयान दर्ज किया. सिंघवी के वकील ने कोर्ट से कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है, जिसके मुताबिक़ अभिषेक मनु सिंघवी अपने ड्राइवर मुकेश लाल के खिला़फ पुलिस के समक्ष दायर शिकायत वापस लेंगे. अदालत ने लाल के जवाब को भी संज्ञान में लिया, जिसमें उसने सिंघवी को धमकी भरा एसएमएस भेजने के लिए मा़फी मांगी. इसके बाद जस्टिस खेत्रपाल ने 13 अप्रैल को एकतऱफा आदेश देकर सीडी के प्रकाशन-प्रसारण पर रोक लगा दी. आज तक, हेडलाइंस टुडे और इंडिया टुडे के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह उस व्यक्ति को कथित सीडी वापस दे देंगे, जिसने उन्हें दी है.

अभिषेक मनु सिंघवी के सेक्स सीडी प्रकरण पर जब ग़ौर करते हैं तो कई सवाल खड़े होते हैं. पहला सवाल है कि यह सीडी किसने बनाई और क्यों बनाई, क्या एक अदना सा ड्राइवर इतनी बड़ी जुर्रत कर सकता है? भरोसा तो नहीं होता है, लेकिन अगर मान भी लिया जाए कि ड्राइवर ने ही बनाई, तो जो समझौता कोर्ट के सामने हुआ, उसे तो सिंघवी इस प्रकरण की शुरुआत में ही अपने घर पर बैठकर कर सकते थे. ड्राइवर अपने वेतन के लिए परेशान था. सिंघवी साहब को सीडी के बारे में मालूम था. साथ ही उन्हें यह भी मालूम था कि अगर सीडी बाहर आ गई तो उसका अंजाम क्या होगा. अभिषेक मनु सिंघवी बड़े आराम से पैसे देकर इस सीडी का निपटारा कर सकते थे. समझने वाली बात यह है कि जिस व़क्त ड्राइवर ब्लैकमेल कर रहा था, तब तक तो उसने यह सीडी मीडिया को नहीं दी थी. तर्कसंगत बात तो यही है कि ड्राइवर ने यह सीडी तब दी होगी, जब अभिषेक मनु सिंघवी ने पैसे देने से मना कर दिया होगा या जब उन्होंने ड्राइवर के खिला़फ थाने में शिकायत की होगी.

अभिषेक मनु सिंघवी बड़े आराम से पैसे देकर इस सीडी का निपटारा कर सकते थे. समझने वाली बात यह है कि जिस व़क्त ड्राइवर ब्लैकमेल कर रहा था, तब तक तो उसने यह सीडी मीडिया को नहीं दी थी. तर्कसंगत बात तो यही है कि ड्राइवर ने यह सीडी तब दी होगी, जब अभिषेक मनु सिंघवी ने पैसे देने से मना कर दिया होगा या जब उन्होंने ड्राइवर के खिला़फ थाने में शिकायत की होगी. एक ड्राइवर इतने बड़े आदमी को ब्लैकमेल कर ले, यह बात भी समझ में नहीं आती. उसने सिंघवी को धमकी दी या नहीं, ब्लैकमेल किया या नहीं, यह सच्चाई भी सामने आनी चाहिए थी, लेकिन लगता है, अभिषेक मनु सिंघवी इन सच्चाइयों को सामने लाना नहीं चाहते थे.

एक ड्राइवर इतने बड़े आदमी को ब्लैकमेल कर ले, यह बात भी समझ में नहीं आती. उसने सिंघवी को धमकी दी या नहीं, ब्लैकमेल किया या नहीं, यह सच्चाई भी सामने आनी चाहिए थी, लेकिन लगता है, अभिषेक मनु सिंघवी इन सच्चाइयों को सामने लाना नहीं चाहते थे. अभिषेक मनु सिंघवी संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं. संसद में बनने वाले क़ानूनों में इस कमेटी की मुख्य भूमिका होती है. लोकपाल क़ानून को आखिरी शक्ल देने की ज़िम्मेदारी भी इसी कमेटी की है. कुछ दिनों पहले इसी कमेटी में ज्यूडिशियल स्टैंडर्स एंड एकाउंटिबिलिटी बिल-2010 पर मीटिंग हुई, जिसकी रिपोर्ट 30 अगस्त, 2011 को संसद में पेश की गई थी. मज़ेदार बात यह है कि इस रिपोर्ट के मुताबिक़, जजों की नियुक्ति के तरीक़े में बदलाव की ज़रूरत है. इसी कमेटी के चेयरमैन का एक ऐसे विवाद में नाम आना हैरान करता है. हैरानी इसलिए, क्योंकि एक अहम सवाल है कि इस सीडी में शामिल महिला कौन है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, वह एक वकील है, जो जज बनना चाहती है. कुछ जगहों पर नाम भी बताया गया है. हैरानी वाली बात यह है कि इस महिला का नाम उस लिस्ट में शामिल था, जिसे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस कपाडि़या ने रद्द कर दिया था. एक टीवी चैनल पर बहस के दौरान बताया गया कि इस सीडी की शुरुआत में ही इस महिला से अभिषेक मनु सिंघवी कहते हैं कि तुम जज कब बन रही हो. एक और अजीबोग़रीब बात हुई है. इस दौरान हाईकोर्ट कोलिजियम ने फिर से पांच जजों के नाम भेजे हैं. इस नई लिस्ट में इस महिला का नाम नहीं है. मतलब यह कि इन सबके बावजूद वह महिला जज नहीं बन सकी. इसलिए अब एक अहम सवाल उठता है कि इस सीडी को किसने बनाया. दिल्ली में यह भी चर्चा है कि इस सीडी को ड्राइवर ने नहीं बनवाया. किसी और ने बनवाया है, जिसे यह पता था कि बंद कमरे में क्या होता है और जब अभिषेक मनु सिंघवी को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपना अपराध छिपाने के लिए क़ानून का सहारा लिया और ड्राइवर को भी अपने अपराध में शामिल कर लिया. बताया जाता है कि यह सीडी मार्च महीने के पहले सप्ताह के दौरान बनाई गई. जब उन्हें मालूम हुआ कि यह सीडी मीडिया को दे दी जाएगी तो उन्होंने अपने ड्राइवर को इस बात के लिए मना लिया कि वह सीडी बनाने की बात क़ुबूल कर ले. फिर उसके खिला़फ पुलिस में मामला दर्ज करा दिया.

समझने वाली बात यह है कि ड्राइवर के खिला़फ दो मामले हैं. पहले एक आपराधिक मामला है और दूसरा दीवानी मामला है. जो पहली एफआईआर अभिषेक मनु सिंघवी ने 29 मार्च को दर्ज कराई, वह ब्लैकमेलिंग करने, फर्ज़ी सीडी बनवाने, धमकी देने की थी. यह एक आपराधिक मामला है. आम तौर पर ऐसे मामले में कोर्ट द्वारा जांच का आदेश दिया जाता है. सीडी सही है या ग़लत, यह जांच होती. सीडी की सच्चाई का पता चलता. धमकी कब मिली, क्या धमकी दी गई, कितनी रक़म मांगी गई, इन सबका पता चलता. लेकिन अभिषेक मनु सिंघवी बड़ी चालाकी से एक आपराधिक मामले को दीवानी मामले में बदल कर हाईकोर्ट पहुंच गए. अगर आपराधिक मामला होता तो समझौता न हो पाता. अभिषेक मनु सिंघवी क़ानून के बड़े जानकार हैं. उन्होंने इस बात को जानते हुए यह क़दम उठाया. इससे सा़फ होता है कि वह स़िर्फ इतना चाहते थे कि किसी तरह से सीडी के प्रसारण पर रोक लग जाए. अभिषेक मनु सिंघवी ने समझौता करके पूरा मामला ऱफा-द़फा करा दिया. हैरानी की बात यह है कि किसी मीडिया, किसी न्याय-क़ानून के जानकार ने इस चालाकी को पकड़ने की ज़रूरत नहीं समझी. इस तरह अभिषेक मनु सिंघवी ने सेक्स सीडी को टीवी चैनलों पर प्रसारित होने से रुकवा दिया, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि इंटरनेट पर यह वीडियो इस तरह फैलेगा. अभिषेक मनु सिंघवी की सीडी इंटरनेट पर आ गई. यू ट्यूब पर इस सीडी को आते ही हटा दिया गया, लेकिन फिर किसी ने इसे फेसबुक और यू ट्यूब पर डाल दिया और यह धमकी भी दे डाली कि अगर इस बार अभिषेक मनु सिंघवी की सीडी हटाई गई तो वह गृहमंत्री पी चिदंबरम की सेक्स सीडी इंटरनेट पर डाल देगा. इसके बाद इंटरनेट पर इस वीडियो को लोग देखने लगे. लाखों लोगों ने देखा. वायरस की तरह यह वीडियो इंटरनेट पर फैल गया. नतीजा यह हुआ कि अभिषेक मनु सिंघवी को अपने सारे पदों से इस्ती़फा देना पड़ा.

एक सवाल और है, जिसका जवाब जानना ज़रूरी है कि अगर इस सीडी को अभिषेक मनु सिंघवी के ड्राइवर ने बनवाया और दो सीडी उसने दो टीवी चैनलों के रिपोर्टरों को दे दीं तो यह सीडी बाज़ार में कैसे आ गई. इंटरनेट पर लोड करने वालों के पास कैसे पहुंच गई. इन सवालों का जवाब इसलिए ज़रूरी है कि जो कहानी अभिषेक मनु सिंघवी बता रहे हैं, उससे इसके तार जु़डते नहीं दिखाई देते. इस बात की जांच होनी चाहिए कि यह सीडी किसने बनाई. इस सेक्स सीडी की वजह से संसद की स्टैंडिंग कमेटी की गरिमा को धक्का लगा है, सांसदों के चरित्र पर सवालिया निशान खड़ा हुआ है, राजनीतिक दलों में काम करने वाले सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की नैतिकता पर लोगों को शक हो रहा है. उससे भी अहम बात कि यह सीडी देश में जज बनाए जाने की शर्मनाक कहानी बता रही है. यह सीडी एक साथ कई सर्वोच्च संस्थानों की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़ा कर रही है, लेकिन मीडिया में बेशर्म चुप्पी है. टीवी चैनल और अ़खबार न स़िर्फ चुप हैं, बल्कि वे इस मामले को प्राइवेट और पब्लिक की बहस की ओर ले गए. राजनीतिक पार्टियों की भूमिका और भी शर्मनाक है. सभी राजनीतिक दल इसे अभिषेक मनु सिंघवी का निजी मामला बताने पर आमादा हैं. वे इस बात को भूल गए कि ऐसे रु़ख से जनता को तो यही संदेश जाएगा कि हर पार्टी यही काम करती है. यह सेक्स सीडी कांड अभिषेक मनु सिंघवी का निजी मामला नहीं है. इस शर्मनाक सीडी ने देश की संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. इसलिए इस मामले की जांच होनी चाहिए. कोर्ट को स्वत: इस मामले में आगे बढ़कर जांच के आदेश देने की ज़रूरत है, ताकि न्यायपालिका पर लगे इस दाग़ को धोया जा सके.

पी चिदंबरम की सीडी को लेकर कांग्रेस में खलबली

बीते 24 अप्रैल को संसद की कैंटीन में अहमद पटेल, जनार्दन द्विवेदी और राजीव शुक्ला एक साथ थे. तभी अचानक उन्हें खबर मिली कि सोनिया गांधी के घर एक महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए जाना है. वहां मालूम हुआ कि चार और भी लोगों को बुलाया गया है, जिनमें सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, ग़ुलाम नबी आज़ाद और व्यालार रवि शामिल हैं. जयराम रमेश ने एनडीटीवी के ज़रिये यह खबर फैला दी कि चार मंत्री सरकार छोड़कर पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं. बाद में पता चला कि सारी खबरें झूठी थीं. न किसी ने चिट्ठी लिखी थी और न कोई मंत्री पद छोड़कर पार्टी के लिए काम करना चाहता है. तो सवाल उठता है कि इतनी हाईप्रोफाइल मीटिंग क्यों हुई? दरअसल, यह मीटिंग अभिषेक मनु सिंघवी की सेक्स सीडी से पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए हुई थी. इंटरनेट पर जब यह धमकी मिली कि पी चिंदंबरम की सीडी भी बाज़ार में आ सकती है तो खलबली मच गई. सोनिया गांधी ने यह मीटिंग इस परिस्थिति से निपटने के लिए बुलाई थी.

2 comments

  • admin

    संसद -संसद- एंड लोकतंतर .

  • admin

    जब तक चुनाव में दोहरी निति ख़तम करके एक सुरक्षित सर्कार नहीं बनती तब तक सर्कार गिराने की ताकत अपने समझने वाले लोग ऐसा ही आचरण करेंगे. सर्कार उसकी बने जिसके सबसे जियादा संसद हों.

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