नई दिल्ली: आने वाले इतिहास के गर्भ में क्या है? इसे तो शायद इतिहास भी नहीं जानता लेकिन मेरे सूत्र मुझे बता रहे हैं कि जैसे भारत में धारा 370 खत्म कर और जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांटकर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बना लिया और वहां वह सारे कानून लागू कर दिए जो भारत के कानून है, यह योजना हो सकता है एक बड़ी योजना का हिस्सा हो जिसका आखरी परिणाम कश्मीर समस्या का आखरी समाधान हो..
जम्मू कश्मीर और लद्दाख के बारे में बोलते हुए अमित शाह ने जो देश के गृहमंत्री हैं कहीं पर भी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर जिसे आजाद कश्मीर कहते हैं उसका नाम नहीं लिया.मेरे विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि अगले कुछ दिनों में ही पाकिस्तान आजाद कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बना लेगा और तब अमेरिका का फार्मूला या कहे की राष्ट्रपति ट्रंप का फार्मूला जो कश्मीर जिस देश के साथ मिल गया वह उसका हिस्सा रहेगा.. जो एलओसी है वह अंतरराष्ट्रीय सीमा में बदल जाएगी.. इससे चीन को भी आपत्ति नहीं होगी क्योंकि उसका बहुत बड़ा निवेश गिलगिट और बालटिस्तान में है..

भारतीय जनता पार्टी भी या प्रधानमंत्री मोदी भी इस स्थिति को आसानी से मान लेंगे.. क्योंकि मनमोहन सिंह के समय जितना ज्यादा समर्पण अमेरिका के सामने भारत ने किया था इस समय उससे कम समर्पण भारत नहीं कर रहा.. फर्क सिर्फ इतना है कि उस समय के समर्पण की खबरें देश के समाचार जगत में आ जाती थी आज नहीं आती.. विदेशी समाचार जगत में छपी खबरें पहले हमें आसानी से मिल जाती थी लेकिन अब वह नहीं मिलती..

हम मान सकते हैं कि आज की घटना भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे सबसे लंबे विवाद यानी कश्मीर विवाद के हल की ओर पहला कदम है, शायद इसीलिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बयान दिया था अगर भारत और पाकिस्तान चाहे तो वह मध्यस्था के लिए तैयार है, दूसरा कश्मीर की समस्या दुनिया की सबसे पुरानी समस्याओं में से एक है.