2013 में बसपा ने भले ही कोई बड़ा राजनैतिक धमाका नहीं किया हो, लेकिन 2104 का आग़ाज़ मायावती धमाकेदार तरी़के से करने जा रही है. इसके लिए उन्होंने 15 जनवरी का दिन तय किया है. 15 जनवरी यानी माया का जन्मदिन. इस दिन मायावती लखनऊ में सावधान विशाल महारैली करने जा रही हैं. इसमें पूरे देश से बसपाई आएंगे. रैली मैदान पुराना वाला यानी रमाबाई अम्बेडकर मैदान ही रहेगा, जहां रैली करने का साहस माया के अलावा कोई नहीं कर पाता है. रैली को सफल बनाने के लिए मायावती पिछले कई दिनों से लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं.
IAS-Jawed-Usmaniउत्तर प्रदेश की सत्ता गंवाने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2013 में कोई ख़ास धमाका नहीं किया. उनकी तरफ़ से विरोधियों पर हल्के-फुल्के हमले ज़रूर किए गए, लेकिन यह औपचारिकता से अधिक कुछ नहीं था. माया चुप थीं तो उनके सिपहसलारों ने भी अपवाद को छोड़कर अधिकांश मौक़ों पर मुंह बंद ही रखा. यह सिलसिला नवंबर में हुए चार राज्यों के विधानसभा चुनाव के समय भी जारी रहा, जिसका पार्टी को नुकसान भी हुआ. माया की चुप्पी का राजनैतिक पंडितों ने समय-समय पर खूब पोस्टमार्टम किया. किसी ने कहा बहनजी यूपी की गद्दी जाने के सदमे से उबर नहीं पा रही हैं, तो कोई बोला नरेंद्र मोदी के उभार से बसपा का दलित छोड़कर अन्य वोट बैंक भाजपा की तरफ़ खिसक गया है. ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जिनको लग रहा था कि माया के राजनैतिक कैरियर में विराम लग गया है. यूपी तो उनसे छिन ही गया था, दिल्ली में भी बसपा के मुक़ाबले समाजवादी नेता पूरे साल ज्यादा चमक फैलाते रहे. इस दौरान बसपा ने अगर कुछ ख़ास किया तो बस इतना कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों (लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाकर) के नामों की घोषणा कर दी. यह और बात है कि बदले राजनैतिक माहौल के बीच उन्हें अपने कई प्रत्याशी बदलना पड़ रहे हैं. माया शांत रहीं तो समाजवादी सरकार भी उनको लेकर चुपी साधे रही, लेकिन जैसे ही माया ने मुंह खोला, सपा सरकार ने भी उनके ख़िलाफ़ हल्ला बोल दिया. साल के पहले ही दिन माया टीम के कई सदस्यों, जो पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं, के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार सहित कई मामलों में मुक़दमा दर्ज हो गया. सतर्कता विभाग के महानिदेशक एएल बनर्जी के निर्देेश पर राजधानी लखनऊ के गोमती नगर थाने में स्मारक घोटाले में 19 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज होने के साथ ही यह साफ़ हो गया कि चुनावी मौसम आते ही बसपा और सपा को पुरानी दुश्मनी याद आने लगती है.
बहरहाल, 2013 में बसपा ने भले ही कोई बड़ा राजनैतिक धमाका नहीं किया हो, लेकिन 2104 का आग़ाज़ मायावती धमाकेदार तरी़के से करने जा रही है. इसके लिए उन्होंने 15 जनवरी का दिन तय किया है. 15 जनवरी यानी माया का जन्मदिन. इस दिन मायावती लखनऊ में सावधान विशाल महारैली करने जा रही हैं. इसमें पूरे देश से बसपाई आएंगे. रैली मैदान पुराना वाला (रमाबाई अम्बेडकर मैदान) ही रहेगा, जहां रैली करने का साहस माया के अलावा कोई नहीं कर पाता है. रैली को सफल बनाने के लिए मायावती पिछले कई दिनों से लखनऊ में डेरा डाले हुए हैं. रैली में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से पांच हज़ार और लोकसभा क्षेत्र से 25 हज़ार की भीड़ लाने को बसपा नेताओं से कहा गया है. भीड़ को ढोने के लिए बसों और छोेटे-छोटे वाहनों के अलावा क़रीब डेढ़ दर्जन रेलगाड़ियां भी बुक कराई गई हैं. बसपा से टिकट की चाह रखने वालों और जिनको टिकट मिल गया है, उन्हें अपना टिकट बचाए रखने के लिए हर हालत में भीड़ जुटाकर मायावती को प्रभावित करना होगा. वामसेफ के कार्यकर्ता इस बात पर नज़र रखेंगे कि कौन नेता कितनी भीड़ लेकर आया.
पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से अधिक से अधिक भीड़ जुटाने के लिए आगाह किया गया है. भीड़ में भी मुस्लिमों की तादात अच्छी रहे, इसके लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं. कोशिश यह की जा रही है कि मायावती की रैली पिछले दिनों हुई भाजपा और सपा की रैलियों से हर मायने में बेजोड़ साबित हो. भीड़ का आंकड़ा मोदी-मुलायम की रैली से दोगुना रखने की कोशिश की जा रही हैं. माया अपना वोट बैंक मज़बूत करने के लिए किसानों-मुसलमानों और दलितों पर ख़ास फोकस डाल सकती हैं.
एक तरफ़ बसपा के रणनीतिकार भीड़ जुटाने का रिकॉर्ड बनाने को बेताब हैं तो दूसरी तरफ़ भाजपा, कांग्रेस और सपा नेताओं के ख़िलाफ़ बसपा सुप्रीमो उन मुद्दों को धार देंगी जो लोकसभा चुनाव के समय विरोधियों को घेरने के काम आएंगे. प्रदेश की बिगड़ी क़ानून व्यवस्था के अलावा बसपा की कोशिश उन मुस्लिमों को अपने पाले में फिर से खींचने की है जो 2012 के विधानसभा चुनाव में उससे छिटककर सपा के पास चले गए थे. इसके लिए बसपा मुज़फ़्फ़रनगर दंगों की सियासत को आगे बढ़ाएगी. वह चाहेंगी की किसी भी तरह से मुलायम एंड कंपनी को मुस्लिम विरोधी क़रार दे दिया जाए. इसी लिए दंगों के समय समाजवादी सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा किया जाएगा. दंगा शिविरों में रह रहे लोगों को बुलडोजर चलाकर हटाए जाने और उनके ख़िलाफ़ (दंगा पीड़ितों) मुलायम के बेतुके बयान को बसपा सुप्रीमो हवा देंगी. इसके अलावा माया ने अपने नेताओं से कह रखा है कि अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ जहां भी समाजवादी सरकार दिक्कतें और भय का माहौल बना रही हैं, वहां ऐसे मुद्दों को गंभीरता से उठाया जाए.
बसपा सुप्रीमो की कोशिश है कि मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के बहाने मुलायम को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के समानान्तर खड़ा कर दिया जाए. अपनी बात सिद्ध करने के लिए मायावती पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नक़्शे-क़दम पर चलने का आरोप भी लगा चुकी हैं. उन्होंने यह कहकर सपा को कटघरे में खड़ा किया था कि कड़ाके की ठंड में राहत कैंपों में बुलडोजर चलाकर उनके ज़ख्मों पर वैसे ही नमक छिड़कने का काम सपा सरकार ने किया जैसा कि भाजपा की गुजरात सरकार मुसलमानों के साथ करती आई है.
बसपा नेत्री लगातार इस कोशिश मे हैं कि जनता में सपा की इमेज भाजपा के साथ एक सिक्के के दो पहलू जैसी बना दी जाए. यह ऐसा मुद्दा है जिसके सहारे बसपा अपने सभी विरोधियों कांग्रेस, सपा, भाजपा और रालोद को एक साथ घेर सकती है. हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि यह काम इतना आसान नहीं है. माया जब अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की सियासत को हवा देंगी तो उनके सामने भी यह सवाल खड़ा होगा कि उनकी सरकार ने भी तो मुसलमानों की नहीं सुनी थी, आज भी उनका यही नज़रिया है. इसीलिए तो वह दंगा पीड़ितों का दुख-दर्द बांटने मुज़फ़्फ़रनगर नहीं गईं. हो सकता है इसकी सफाई वह सावधान रैली में दें. अन्य तमाम दलों के अलावा उनकी तेज़ी से उभर रही आम आदमी पार्टी के बारे में क्या सोच है, इसका जबाव भी जनता उनसे सुनना चाहेगी. उत्तर प्रदेश में पिछले करीब दो दशकों से बसपा ही ऐसा दल है जो समाजवादी पार्टी को चुनौती देता रहा है. इसीलिए माया की सावधान रैली पर अन्य दलों के नेताओं के अलावा सपा नेताओं की सबसे अधिक नज़रें जमी हुई हैं. सपा अभी से रैली की हवा निकालने की तैयारी में भी जुट गई है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि विरोधी दल राहत शिविरों में राजनीति कर रहे हैं. उनके बड़े नेता वहां दौर करते हैं, लेकिन सुझाव मांगो तो वे नहीं देते. बल्कि अपने दौरों की ख़बर ज़रूर चलवाते हैं. समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर हमला बोलते हुए कहा है कि वे (मायावती) फिर पहले की तरह अपने सांसदों, विधायकों और नेताओं से जन्मदिन की चंदा वसूली में लग गई हैं. जिसमें कइयों की जानें जा चुकी हैं.
बसपा, सपा-भाजपा को एक ही थाली का बैगन बताने में जुटी है तो सपा नेता ने आरोप लगाया कि मुज़फ़्फ़रनगर के मुस्लिमों के लिए दिखावटी हमदर्दी दिखाकर भाजपा की बी टीम का फ़र्ज़ निभाने जा रही है. लोकसभा चुनाव नज़दीक हैं और जनता को ऐसे तत्वों से सावधान रहना होगा जो मानवीय त्रासदी का भी सियासी फ़ायदा उठाने की साज़िशों से बाज़ नहीं आते हैं. प
 
 

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