modiiiiiiiiउत्तर प्रदेश में भाजपा की विजय पताका फहराने के लिए राष्ट्रीय स्वयं संघ आगे आ गया है. अब बिना संघ की मर्ज़ी के एक पत्ता भी नहीं हिल सकता. भाजपाई समझते हैं कि विधानसभा चुनाव में वह ग़लती कर चुके हैं, जिसे संघ उन्हें दोहराने नहीं देना चाहता है. संघ की कसौटी पर प्रत्याशी तराशे जा रहे हैं. काफ़ी जांच, परख और खरा उतरने के बाद ही उन्हें चुनाव मैदान में भेजा जाएगा. इसी के मद्देनज़र नये साल में संघ प्रदेश भाजपा की बिखरी गोटियों को एक एक कर सहेज रहा है. संघ को मालूम है कि चार राज्यों में जीत के चलते उत्तर प्रदेश के भाजपाई, आत्ममुग्ध और गदगद ज़रूर हैं, लेकिन उनके ज़रिये दिल्ली नज़दीक हो गई हो, यह सोचना अभी दिवास्वप्न जैसा ही होगा. हालांकि, प्रदेश भाजपा संघ के मुताबिक़ ही अमल करती दिख रही है. इसीलिए भाजपा इस बार राम पर नहीं, बल्कि रामभक्तों पर यक़ीन कर रही है. यही वजह रही है कि उसने विहिप की चौरासी कोसी परिक्रमा, मुज़फ़्फ़रनगर दंगा और सरकार की तुष्टीकरण नीति जैसे मुद्दों पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. वहीं अब भाजपा ने रणनीति के अनुसार ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ निर्माण कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अयोध्या, मथुरा चित्रकूट समेत कई ज़िलों से साधु संतों का मार्च निकाला. साथ ही झांसी, कानपुर और लखनऊ जैसे 14 स्थानों पर महिला कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला. इसके अलावा प्रदेश के सभी सांसदों, विधायकों मेयर व अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने ज़िला मुख्यालयों पर आयोजित दौड़ में हिस्सा लिया. राजनीतिक हलकों में चर्चा है भाजपा की यह दौड़ सपा, बसपा और रालोद प्रभाव वाले क्षेत्रों में कुछ फ़ीकी रही है.
लोकसभा की तैयारी में मुस्तैदी से लगे पार्टी कार्यकर्ता कमल को खिलाने के लिए घर-घर दौड़ लगाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं. पार्टी का महिला मोर्चा कमल मेंहदी अभियान चलाकर महिला आबादी से सीधे संपर्क साधने की जुगाड़ में है. महिला कार्यकर्ता मंडल स्तर पर महिलाओं की दोनों हथेलियों तथा अंगुलियों पर कमल का निशान बनाएंगी, साथ ही राज्य व केन्द्र सरकार के कुशासन वह भ्रष्टाचार को उजागर करेंगी. वह कथा सुंदरकांड, धार्मिक कार्य तथा गीत गायन आदि आयोजित कर योजना को साकार करेंगी. भाजपा ने सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए गांवों से लोहा संग्रहण की शुरुआत की तारीख़ एक जनवरी रखी है, जिसका शुभारंभ प्रदेश के 900 स्थानों पर एक साथ करने की बात कही गई. लौह संग्रह सहयोग समिति संयोजक ओमप्रकाश सिंह के  अनुसार, सभी आठ क्षेत्रों में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष और संग्रह समिति संयोजक उपस्थित रहेंगे. भाजपा जिलाध्यक्ष व समिति के जिला संयोजक  संयुक्त आयोजन करेंगे.
पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का कहना है कि सपा सरकार से जनता नाख़ुश है, इसलिए उसे आठ सीटें बसपा के कुशासन को जनता देख चुकी है, लिहाज़ा इसे नौ सीटो पर ही संतोष करना होगा. लोकदल का सफ़ाया हो जाएगा. यह अतिशयोक्ति नहीं. क्योंकि 1998 लोकसभा चुनाव में 85 सीटों में 60 पर भाजपा जीत चुकी है. उत्तर प्रदेश भाजपा में नेताओं की कमी नहीं है. अमित शाह प्रदेश प्रभारी हैं और उन्हें सांगठनिक दक्षता हासिल है. यूपी में जातिवाद की काट राष्ट्रवाद से होगी. हम सभी को साथ लेकर चलेंगे. इस बार ख़ास बात यह है कि बूथ स्तर पर संगठन खड़ा है. भाजपा नेताओं का तर्क है कि जिस  तरह प्रदेश की जनता ने सपा को बड़ा जनाधार देकर युवा मुख्यमंत्री का चयन किया था. वह मुख्यमंत्री आज जनता का विश्‍वास व जनाधार खंडित कर रहा हैं. नौजवानों को लैपटाप देकर बहलाया जा रहा है, जबकि बेरोज़गार नौजवानों को रोज़गारक की ज़रूरत हैं. भाजपाई मंचों से घोषणा कर रहे हैं कि प्रदेश व देश में उनकी सरकार बनी तो युवाओं को बेरोज़गारी भत्ता व लैपटाप देने की की जगह प्रदेश के हर बेरोज़गार को दस लाख रुपये का बगैर ब्याज ॠण देकर उनके हाथों में रोज़गार देने का काम किया जाएगा.
मिशन मोदी को परवान चढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मैदान में उतर पड़ा है. सबसे पहले इसने संघ परिवार के सभी घटक दलों, विशेष तौर से भाजपा और दूसरे संगठनों को एक दूसरे के साथ बैठाकर शिकायतें दूर करने का काम हाथ में लिया है. संघ ने नतीजों के विश्‍लेषण के बाद रणनीति के तहत पश्‍चिमी, बृज और बरेली के प्रमुख पदाधिकारियों की गाजियाबाद में बैठकों के सहारे ख़ामियों को दुरुस्त करने की रणनीति बनाई है. संघ का मानना है कि कि भाजपा में जिस तरह दूसरे दलों के लोग आ रहे हैं, इसके चलते मूल कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो सकती है. पहले भी ऐसा हुआ है, जब दूसरे दल के लोग आए, टिकट लिया और भाजपा के बुरे दौर के साथ ही खिसक लिए. यह भी बात सामने आई कि बाहर से आने वाले टिकट पाने के बाद अपना पूरा तंत्र खड़ा कर लेते हैं. जिले में संगठन के मूल लोगों की अनदेखी करते हैं, दागियों को टिकट से संघ परिवार के दूसरे संगठनों के काम करने में परेशानी की बात भी कही गई. इस बाबत भाजपा के प्रदेश प्रभारी अमित शाह का कहना है कि  इन बातों का पूरा ध्यान रखा जाएगा. आने वालों को टिकट का कोई आश्‍वासन नहीं दिया गया है. कसौटियों पर खरे उतरने वालों को ही टिकट दिए जाएंगे. भाजपा के रणनीतिकारों का विचार है कि चुनाव को देखते हुए इस बार पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा कि भूल से भी ऐसा कोई काम न होने पाए, जिससे मुसलमानों के धु्रवीकरण की संभावना होती हो. तर्क दिया जा रहा है कि  मुसलमानों में भाजपा को लेकर पहले की तुलना में भरोसा बढ़ रहा है. प्रतिशत भले ही कम हो, लेकिन पढ़े लिखे मुस्लिम नौजवान और अन्य लोग भाजपा को भी आज़माने का मन बना रहे हैं. भाजपा चुनाव में इन लोगों का भरोसा जीत पाई तो मुसलमान विरोधी बताकर वोट बटोरने वाली कांग्रेस, सपा, बसपा जैसे दलों के हौंसले पस्त हो जाएंगे. बहरहाल भाजपा ख़ुश है कि कम से कम अल्पसंख्यक भी भाजपा में आने शुरू हो गए हैं. हाल ही प्रदेश भाजपा मुख्यालय पर बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं एवं पुरुषों ने सदस्यता ग्रहण की थी.
मेरठ में अखिलेश सरकार के लोकनिर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव के इस कथन पर कि मोदी का जादू प्रदेश में नहीं चलेगा, इस पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने करारा जवाब दिया कि सपा की मज़बूती और तीसरे मोर्चे के प्रभावशाली होने का दिवास्वप्न देखना अच्छी बात है, पर जिस उत्तर प्रदेश के भरोसे यह दिवास्वप्न देखा जा रहा है, सरकार पूरी तरह से नाकाम हो रही हैं. सपाई हस्तक्षेप से क़ानून व्यवस्था से लेकर जनहित से जुड़ी विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. जनसुनवाई का आलम यह है कि तहसीलों व थानों पर अधिकारी मिल ही नहीं रहे हैं. सपा और इसके समर्थक दल के नेताओं में हो़ड मची है कि कौन मोदी के विरुद्ध कितनी बयानबाज़ी कर ले रहा है. तभी तो कभी नरेश अग्रवाल टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि चाय बेचने वाला कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकता तो जयराम रमेश मोदी की तुलना आसाराम से करते हैं. यही नहीं, बेनी प्रसाद वर्मा ने तो हिटलर तक कह डाला है. भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार की असफलता का बोझ सपा पर ही भारी पड़ रहा है. परिणाम-स्वरूप मुख्यमंत्री की फोटो होर्डिंगों से हटा दी गई है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र कहते हैं कि सपा ने ही अपने मुख्यमंत्री को रिजेक्ट कर दिया है तो प्रदेश की जनता क्यों बर्दाश्त करे? जब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से लेकर राम गोपाल यादव तक ने ही कहा कि यदि मैं मुख्यमंत्री होता तो ख़राब स्थितियां पैदा नहीं होतीं या फिर दुरुस्त कर देता.
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश भाजपा में संघ की चल रही है. उसने सूबे की सभी लोकसभा सीटों का ब्यौरा तैयार किया है, जिसके आधार पर टिकटों का वितरण होना है. यूपी भाजपा को इस बार खुली छूट नहीं हैं. मोदी लहर को देखते हुए जनता के हिसाब से प्रत्याशी उतारे जाएंगे. प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर कौन कितना सक्रिय, सशक्त और बेहतर चुनावी तंत्र रखता है. संघ ने सारा विवरण इकट्ठा करवा लिया है, ताकि जिताऊ प्रत्याशियों के चयन में असुविधा न हो. संघ की कसौटी पर कसकर ही प्रत्याशी चुनाव मैदान में भेजे जाएंगे. संघ यूपी की जीत के लिए कटिबद्ध है, वह भली-भांति इस बात को समझ रहा है कि भाजपा अभी नहीं तो कभी नहीं. फ़िलहाल मोदी के अश्‍वमेघ के घोड़े की रक्षा में संघ खड़ा है. इतना ज़रूर है कि मोदी की लहर और संघ की कसौटी के माध्यम से यदि भाजपाइयों ने काम किया तो प्रदेश में भाजपा एक बार फिर अपना परचम लहरा सकती है. इसे इस मुग़ालते में भी नहीं रहना चाहिए सपा, बसपा और कांग्रेस कमज़ोर हैं.

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