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LIVE: राहुल-प्रियंका को पुलिस ने मेरठ जाने से रोका, हिंसा पीड़ितों से करनी है मुलाकात
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LIVE: राहुल-प्रियंका को पुलिस ने मेरठ जाने से रोका, हिंसा पीड़ितों से करनी है मुलाकात

नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में हिंसा हुई थी. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की मौत भी हो गई थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अब हिंसा में मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिजनों से मुलाकात करने मेरठ जा रहे थे, लेकिन यूपी पुलिस ने उन्हें बॉर्डर पर ही रोक लिया है.

कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए राहुल-प्रियंका को मेरठ में घुसने से रोका गया है. हालांकि, राहुल-प्रियंका की तरफ से सिर्फ तीन लोगों के अंदर जाने की इजाजत मांगी गई लेकिन अभी तक पुलिस ने उन्हें नहीं जाने दिया है. मेरठ में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान जो हिंसा हुई थी, उसमें चार लोगों की मौत हो गई थी.

बता दें कि अभी मेरठ में धारा 144 लागू है और इस दौरान किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि करने पर रोक है.

इससे पहले प्रियंका बिजनौर भी गई थीं और हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात की थी. गौरतलब है कि सोमवार को ही कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के राजघाट पर CAA के खिलाफ सत्याग्रह किया था, जिसमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हुए थे.

मेरठ में हुई थी चार प्रदर्शनकारियों की मौत

बता दें कि नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन हो रहा है. यूपी के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर समेत कई शहरों में पत्थरबाजी, गोलीबारी भी हुई थी.

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बीते शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद मेरठ में प्रदर्शनकारियों ने हिंसक प्रदर्शन किया था, यहां पुलिस पर पत्थरबाजी की थी. पुलिस ने बचाव में आंसू गैस के गोले छोड़े थे. इसी हिंसा में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. विरोध प्रदर्शन के बाद से ही मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और सहारनपुर में इंटरनेट बंद है.

बिजनौर में भी परिजनों से मिली थीं प्रियंका गांधी

इससे पहले प्रियंका गांधी ने बिजनौर जिले के नहटौर में मारे गए लोगों के परिजनों से मुलाकात की थी. बिजनौर में जो हिंसा हुई थी, इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी. यहां प्रियंका ने योगी सरकार पर निशाना साधा और कहा था कि नागरिकता के अधिकार का किसी को सबूत मांगने का अधिकार नहीं है. यह कानून गरीबों के खिलाफ है. ये कानून महंगाई से, बेरोजगारी से, ध्यान भटकाने के लिए लाया गया है.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी तक हुई हिंसा में कई केस दर्ज किए जा चुके हैं. पुलिस की ओर से 10 हजार से अधिक पर केस दर्ज किया गया है, सैकड़ों को हिरासत में भी लिया गया है. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 250 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे.

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