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इंजीनियर के सब्र की इन्तेहां, आईआरसीटीसी ने 2 साल बाद लौटाए 33 रुपये
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इंजीनियर के सब्र की इन्तेहां, आईआरसीटीसी ने 2 साल बाद लौटाए 33 रुपये

कोटा के एक इंजीनियर सुजीत स्वामी को 2 साल चली लंबी लड़ाई के बाद आईआरसीटीसी से 33 रुपये का रिफंड मिला है. बताया जा रहा था कि साल 2015 में एक टिकट कैसिल कराने के दौरान 35 रुपये बतौर कैंसिलेशन चार्ज काट लिए गए थे. जिसके खिलाफ सुजीत पिछले दो साल से कानूनी लडाई लड़ते आ रहे थे. हालांकि आईआरसीटीसी की तरफ से उन्हें जो रकम लौटाई गई है उसमे भी दो रुपये कम हैं. जिसके लिए सुजीत अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कहते नज़र आ रहे हैं.

सुजीत के मुताबिक उन्होंने साल 2017 में गोल्डन टेंपल मेल में कोटा से दिल्ली की यात्रा के लिए 2 जुलाई का टिकट बुक किया था. जिसके लिए उन्होंने आईआरसीटीसी को 765 रुपये का भुगतान था. लेकिन वेटिंग होने की वजह से उन्होंने टिकट कैंसल कर दिया. इसके बाद उन्हें केवल 665 रुपये वापस मिले .जबकि टिकट कैंसल होने पर उन्हें 700 रुपये वापस मिलने थे. इसके बाद अपने 35 रुपये वापस पाने के लिए सुजीत को रेलवे के मामलों से संबंधित विभागों से 2 साल तक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी.

दरअसल इस मामले को लेकर सुजीत का कहना था कि रेलवे ने उनके 35 रुपये सर्विस टैक्स के नाम पर काट लिए जबकि जीएसटी लागू होने से पहले ही वे अपना टिकट रद्द करवा चुके थे. इस हिसाब से सर्विस टैक्स नहीं लगना चाहिए था. सुजीत ने इस मामले में 8 अप्रैल 2018 को लोक अदालत में याचिका दायर की थी. लेकिन 2019 में अदालत ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए मामला बंद कर दिया.

इस बीच दिसंबर 2018 में उनकी सुजीत की तरफ से इस मामले को लेकर दायर की गई आरटीआई भी अप्रैल महीने तक करीब 10 विभागों में चक्कर काटती रही. इस आरटीआई में उन्होंने आईआरसीटीसी द्वारा काटे गए 35 रुपये से जुड़े नियमों की जानकारी मांगी थी. जिसके जवाब में आईआरसीटीसी ने कहा कि रेलवे मंत्रालय के कमर्शियल सर्कुलर संख्या 43 के अनुसार, जीएसटी लागू होने से पहले बुक किए गए टिकटों को रद्द करने पर सर्विस टैक्स नहीं लिया जाएगा. इसके बाद 1 मई 2019 को रेलवे ने सुजीत के खाते में 33 रुपये जमा करा दिए.

वहीं अपनी इस लड़ाई के बारे में सुजीत का कहना है कि निमानुसार उन्हें 35 रुपये वापस मिलने थे. लेकिन मिले सिर्फ 33 रुपये. सुजीत ने बताया कि उनके अलावा करीब 9 लाख और यात्री थे जिन्होंने 1 से 11 जुलाई के बीच अपना टिकट कैंसल किया था. जिसने रेलवे ने सर्विस टैक्स के नाम पर कुल 3.34 करोड़ रुपये वसूले थे.

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