rapeशिक्षा के मंदिर में यौन शोषण, सेक्स रैकेट चलने के मामले पर शायद ही कोई यकीन करे, लेकिन गोड्‌डा जिले के पथरगामा स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय की उन्नीस वर्षीय छात्रा ने विद्यालय में सेक्स रैकेट चलने का खुलासा कर सनसनी फैला दी. ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा आयशा (बदला हुआ नाम) ने विद्यालय की वार्डन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए. छात्रा छह माह की गर्भवती थी और गर्भपात के लिए उसे दवा दी गई, ज्यादा मात्रा में गर्भपात वाली दवा लेने के कारण जब उसकी स्थिति बिगड़ी, तब यह मामला उजागर हुआ. वैसे शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले को ही बेबुनियाद बताते हुए दोनों वार्डन को क्लीन चिट दे दी. यही नहीं, इस प्रकरण में उल्टे छात्रा को ही कठघरे में खड़ा करते हुए छात्रा पर नियमित रूप से स्कूल नहीं आने का दोष मढ़ दिया. होली के बाद जब छात्रा घर से वापस लौटी तो विद्यालय की छात्राओं व शिक्षकों को इस बात की जानकारी हुई, कि छात्रा गर्भवती है. अभिभावक ने भी बदनामी के डर से इस बात को छिपाने का आग्रह शिक्षिका सहित वार्डन से किया था, इस कारण इस बात को गोपनीय रखा गया. राज्य की शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने कहा कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए, इससे छात्राओं के भविष्य पर ख़तरा उत्पन्न होगा, वहीं विपक्ष ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.

इस मामले के उजागर होने के साथ ही कस्तूरबा विद्यालय की शिक्षिका एवं वार्डन के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने  एकजुट होकर छात्राओं पर ही अनैतिक कार्य में लिप्त होने का आरोप मढ़ डाला. इन लोगों ने सरकार से यह मांग कर डाली, कि छुट्‌टी के बाद छात्राएं स्कूल आती हैं, तो छात्राओं का प्रेगनेंसी टेस्ट कराया जाए. इस प्रकार के बयान से अभिभावकों में उबाल आ गया. उनकी मनोभावनाएं विचलित हो गईं. दुमका जिले के जेंडर समन्वयक अरुण कुमार भी इसे सही मानते हैं. उनका कहना है कि अवकाश के बाद स्कूल आने वाली छात्राओं का प्रेगनेंसी टेस्ट होना चाहिए जबकि जिले के उपायुक्त राहुल सिन्हा के अनुसार यह सरासर गलत है. ऐसा कोई आदेश जिला प्रशासन ने नहीं दिया है. टेस्ट पूर्णत: गैरक़ानूनी है. केवल छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण का आदेश दिया गया है, ताकि अगर कोई लड़की बीमार है, तो उसका इलाज कराया जा सके या उसे घर भेजा जा सके. नियमानुसार किसी का प्रगेनेंसी टेस्ट नहीं हो सकता है. इधर जिला  शिक्षा अधीक्षक ने भी कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के वार्डन के साथ बैठक कर यह निर्देश दिया था, कि अवकाश के बाद स्कूल  लौटने पर छात्राओं का प्रेगनेंसी टेस्ट कराया जाए. इसका भारी विरोध होने पर इस निर्णय को वापस लेना पड़ा.

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झारखंड शिक्षा परियोजना की निदेशक राजेश्वरी बी द्वारा दोनों वार्डन को क्लीन चिट दिए जाने से भी अभिभावक नाराज हैं. घटना के उजागर होने के बाद दोनों वार्डन को पुलिस ने हिरासत में लिया था, परंतु उन्हें रिहा कर दिया गया. जिले के पुलिस कप्तान संजीव कुमार ने कहा कि पीड़िता के बयान के आधार पर गोड्‌डा महिला थाना मेें प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. विद्यालय के दो वार्डन के ख़िलाफ गर्भपात कराने, बलात्कार, साक्ष्य छिपाने व पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. पूरे मामले की जांच की जा रही है.

गोड्‌डा हो या विशाखापत्तनम हर जगह एक ही मानसिकता बता रही है, कि चाहे क़ानून कितना भी कड़ा क्यों न बना दिया जाए, लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आने वाले हैं. पथरगामा की घटना तो शर्मसार कर देने वाली है. अविवाहित और नाबालिक छात्रा के गर्भवती होने की पोल भी खुली. छात्राएं पढ़ाई के लिए घर-परिवार छोड़कर स्कूल में दाखिला लेती हैं. इसमें अभिभावक तुल्य शिक्षक का संरक्षण नहीं मिलना अपने आप में बड़ा सवाल है. ऐसे में लाख टके का सवाल यह भी है कि जब रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं तो फिर किसपर भरोसा किया जाए. खास बात यह भी है कि प्रदेश के सभी 83 कस्तूरबा विद्यालयों की स्थिति भी काफी दयनीय है. आबादी से दूर बने ऐसे विद्यालयों में सुरक्षा के कोई प्रबंध नही हैं. स्कूलों में चहारदीवारी नहीं होने के कारण छात्राएं हमेशा भयभीत रहती हैं. अपराधिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है व इसके अलावा छेड़छाड़ की घटनाएं तो आम बात हैं. छात्रावास होने के बावजूद रात्रि प्रहरी की व्यवस्था नहीं है. विद्यालय का ही कोई चपरासी या कर्मचारी रात्रि प्रहरी की भूमिका में रहता है. विद्यालय की वार्डन भी अपने घर चली जाती हैं. छात्राएं यहां मजबूरन भगवान भरोसे रहती हैं.

पथरगामा स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में इस घटना के उजागर होने के बाद सरकार की नींद खुली. राज्य की शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने कहा कि सभी आवासीय विद्यालयों में ऊंची चहारदीवारी का निर्माण करने के साथ सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. रात्रि सुरक्षा की व्यवस्था करने के साथ ही संबधित थानों को गश्त तेज़ करने के निर्देश दिए जाएंगे ताकि छात्रावास में छात्राओं को सुरक्षा दी जा सके और वे निर्भीक होकर शिक्षा ग्रहण कर सकें. कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों के गठन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में होनहार छात्राओं की तलाश करना और उन्हें बेहतर शिक्षा मुहैया करना था, लेकिन अक्सर ये विद्यालय विवादों में ही रहा. कभी छात्राएं सुविधा के आभाव में तो कभी सुरक्षा के भय से विद्यालय से भाग जाती हैं. पथरगामा का कस्तूरबा विद्यालय तो हमेशा से विवादों में घिरा रहा है. कभी शिक्षिका द्वारा छात्राओं को पीटने के मामले में तो कभी छात्राओं के विद्यालय से भागने के कारण लेकिन इस बार तो छात्रा ने ही स्कूल में  सेक्स रैकेट चलने का खुलासा कर सभी को स्तब्ध कर दिया. इस खुलासे के बाद तो पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया.

सूत्रों की माने तो इस आवासीय विद्यालय में रात को जिले के शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारी तो आते-जाते ही थे, साथ ही स्कूल में सामान की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार भी बेधड़क आते-जाते थे. दरअसल ये ठेकेदार उसी स्कूल की किसी शिक्षिका के पति या रिश्तेदार होते हैं. इन्हें ही ठेका भी मिलता है. ये लोग भी छात्राओं के साथ अश्लील हरकत किया करते थे. पीड़ित छात्रा ने तो यहां तक आरोप लगाए हैं कि स्कूल की शिक्षिका छात्राओं को रात में वरीय अधिकारी या अन्य किसी के पास जाने के लिए विवश करती थीं. रात या दिन में भी छात्राओं को होटल तक भेजा जाता था. ज़ाहिर है कि इस स्कूल में सेक्स रैकेट चल रहा था. पीड़ित छात्रा बगल के ही गांव की रहने वाली थी. उसने दसवीं पास करने के बाद ग्यारहवीं में नामांकन कराया था. उसने बताया कि उसके गर्भवती होेने की जानकारी जब शिक्षिका को हुई तो उसने मुंह बंद रखने की सलाह देते हुए गर्भपात की गोलियां खाने को दीं. गोलियां खाने के बाद गर्भपात हुआ, लेकिन उसकी स्थिति बिगड़ती देख शिक्षिका ने डॉक्टर को बुलाकर उसका इलाज करवाया. इसके बाद उसे गांव भेज दिया. वहां उस लड़की ने परिवार को अपनी पीड़ा सुनाई. इसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने वार्डन की गिरफ्तारी के साथ पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करने लगे. राजनीतिक दलों ने भी इसे मुद्दा बनाया और जांच की मांग का समर्थन करते हुए दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की.

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इधर विद्यालय की वार्डन का कहना है, कि छात्रा होली की छुट्टी के बाद स्कूल आई थी. बाथरूम में खून के धब्बे व गर्भपात के निशान मिले तो वार्डन ने छात्राओं से इस बात की जानकारी ली तो पता चला कि आयशा की तबीयत खराब है. जब उससे बातचीत की तो हमलोगों के होश उड़ गए. छात्रा ने स्वयं को गर्भवती बताया और गर्भपात के उद्देश्य से उसने दवा खाने की बात कही. शिक्षिकाओं का कहना है कि उक्त छात्रा की उपस्थिति भी कम रहती थी. संभवत: वह गांव चली जाती थी. वहां उसका किसी के साथ अनैतिक संबंध रहा होगा. जांच टीम की मुखिया शिक्षा परियोजना निदेशक राजेश्वरी वी ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि आवासीय विद्यालय में कोई अनैतिक कार्य नहीं होता था. पीड़िता के आरोप सरासर बेबुनियाद हैं. उन्होंने वार्डन को क्लीन चिट भी दे दी. वैसे इस जांच पर उंगलियां  उठने लगी हैं. निदेशक अपने पति व बच्चों के साथ वहां जांच करने गईं और दो घंटे के भीतर जांच पूरी करके रांची लौट गईं औेर अपनी रिर्पोट सौंप दी. निदेशक ने पीड़िता का बयान तक दर्ज करना उचित नहीं समझा. ऐसे में सवाल यह है कि जब पीड़िता का बयान ही नहीं लिया गया तो आरोपियों को क्लीन चिट कैसे दे दी गई. छात्रा के अभिभावकों और ग्रामीणों से भी बातचीत नहीं की गई. मामले को रफा-दफा करने के लिए केवल विद्यालय की छात्राओं एवं शिक्षकों के बयान लेकर जांच रिर्पोट सौंप दी. अगर इस बात में सच्चाई नहीं होती तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों के होश क्यों उड़ गए थे? रातोंरात जांच कमेटी क्यों बनाई गई? हर स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात क्यों उठी? इन सभी बातों पर गौर करें, तो शंका होती है कि वहां दाल में जरूर कुछ काला है. प्रदेश के विपक्षी दलों ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है. झामुमो व झाविमो सहित अन्य दलों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. अब देखना है, कि शिक्षा मंदिर को दूषित करने वालों को सजा मिलती है या मामले को यूं ही रफा-दफा कर दिया जाता है.

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