nira-radiaनीरा राडिया की अंतरंग दुनिया

स्वीकृति पत्र, जिस पर मैं हस्ताक्षर कर चुका था, मिलने के एक सप्ताह के भीतर मुझे पहला भुगतान मिलना था. तीन महीने बीत गए थे, लेेकिन भुगतान का कोई अता-पता नहीं था. नीरा इस बारे में गोलमोल जवाब दे रही थी. वह क्रिसमस या नए साल या नए वित्तीय वर्ष जैसी बहानेबाजी कर रही थी. अब नीरा मेरे घर पर कम ही आ रही थी. फिर उसने अचानक मेरे घर आना बंद कर दिया. वह मेरे फोन उठाती तो थी, लेकिन जवाब में मुझे मिलता था फूलों का महंगा बुके. नीरा ऐसे बुके लगातार मेरे ऑफिस भेजती रही. मेरे फार्म पर लगातार आने की वजह से उसे पता था कि मुझे बागवानी और फूलों का शौक है.

अंत में मैंने सीधे जॉन डेरबीशायर को पत्र लिखा. जो जवाब मुझे मिला, उसके साथ एक फैक्स कॉपी भी थी, जिसकी तिथि नौ जुलाई, 1999 थी. उससे मैं सन्न रह गया. पत्र में कहा गया था कि 23 दिसंबर, 1998 को नीरा राडिया के माध्यम से मेरा सारा भुगतान किया जा चुका है. उन्होंने मुझसे तत्काल इस खबर की पुष्टि करने को कहा. इसी के साथ पत्र की एक कॉपी नीरा को भेजी गई. मुझे नीरा की ओर से एक और बुके मिला. उसके बाद एक फोन आया और उसने मुझसे मिलने के लिए वक्त मांगा.

अगले दिन वह मेरे ऑफिस आई और क्षमा मांगते हुए कहा कि उसे पैसों की ज़रूरत थी, इसलिए उसने मुझे खबर नहीं दी. इसके लिए उसने केएलएम से सीधे अपने नाम से चेक भेजने का अनुरोध किया और चेक मिलते ही उसे अपने विदेशी एकाउंट में डाल दिया.

मैंने नीरा को धिक्कारते हुए कहा कि यह केस मैंने स़िर्फ पैसों के लिए नहीं लिया था, बल्कि इससे मेरे देश की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई थी. मैंने नीरा को बहन माना था. वह सीधे मुझसे पैसों की ज़रूरत के लिए बोल सकती थी, जिसे मैं शायद ही नकारता. मैंने उसे बताया कि उसने ऐसा करके अपराध किया है और फेरा क़ानून के तहत इसके लिए उसे सजा मिल सकती है. नीरा रोने लगी. उसने बताया कि केएलएम के साथ उसका रिश्ता खत्म हो गया है और मैं चाहूं, तो सीधे केएलएम से अपने पैसों के लिए बात कर सकता हूं.

बहरहाल, इतना सब कुछ होने के बाद भी वह असल बात नहीं बता रही थी. मुझे लग रहा था कि वह एक ही समय में केएलएम और मेरे साथ दोहरा खेल खेल रही थी. मैं सही था, क्योंकि इस मुलाकात के बाद अपनी फीस लेने के लिए मुझे एक दशक से भी अधिक समय तक लड़ाई लड़नी थी.

उस धोखे के बाद भी मेरे दिल के एक कोने में नीरा के लिए जगह बची हुई थी. हमारा कॉमन दोस्त, जिसने मुझे नीरा से मिलवाया था, ने कुछ और मुलाकातें कराने की कोशिश की. हमने दिल्ली के अंबेसडर होटल में लंच किया, लेकिन असल मुद्दा लटका ही रहा. नीरा ने मेरे दोस्त से यह भी कहा कि या तो वह मुझे चुने या फिर नीरा को. लेकिन, मेरा दोस्त कूटनीतिक रास्ता अपनाते हुए मेरे और नीरा के बीच संवाद के विभिन्न माध्यम तलाशता रहा.

बाद में एक बहुत ही संवेदनशील और व्यक्तिगत समस्या को लेकर नीरा मेरे पास मदद मांगने आई. तब मैं जेनेवा में था. वहां मुझे नीरा का फोन आया. वह ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी. मामला यह था कि राव धीरज सिंह ने दुर्घटनावश रिवाल्वर से अपनी गर्दन घायल कर ली थी और पुलिस तहकीकात के लिए पहुंची हुई थी. मैंने तत्काल दिल्ली में अपने वकील सहयोगियों से वहां जाकर यह सुनिश्चित करने को कहा कि पुलिस नीरा से बुरा व्यवहार न करे. उस घटना को मेरी टीम ने संभाला और कोई केस नहीं बना. यह सब बताने का मकसद स़िर्फ इतना है कि मैं जहां दोस्ती को देख रहा था, वहीं नीरा अपनी महत्वाकांक्षा को और ऊंचाई दिए जा रही थी.

फीस के लिए मेरी लड़ाई

मैं चाहता, तो नीरा को सजा दिलवा सकता था. मेरे कुछ दोस्तों ने मुझे ऐसा करने की सलाह भी दी, लेकिन मैं एक नज़दीकी दोस्त की धोखेबाजी से आहत था. अब मैं वह कहानी बताऊंगा, जिसमें मुझे अगले एक दशक तक लड़ाई लड़नी पड़ी. यह कहानी उदाहरण है कि कैसे कोई व्यक्ति बेशर्मी के साथ अपनी हसरत पूरी करने के लिए दूसरे को अपने पैरों से रौंदने में भी नहीं हिचकता.

वह पत्र पाने के आधे घंटे के भीतर ही मुझे डेरबीशायर का फोन आया, जिसमें वह जानना चाहते थे कि क्या नीरा ने मुझे वह पैसा दिया है, जो उन्होंने नीरा को चेक के ज़रिये भेजा था. मैंने सीधे कहा कि नहीं, मुझे पैसा नहीं मिला. चूंकि केएलएम के पास मेरे बैंक एकाउंट के सारे डिटेल थे, तो उन्हें सीधे मेरे एकाउंट में पैसा भेजना चाहिए था. मैंने डेरबीशायर को बताया कि नीरा उनकी एजेंट है, मेरी नहीं. और, यह भी कि फेरा क़ानून के तहत पैसा सीधे मेरे एकाउंट में आना चाहिए था. उन लोगों ने मुझसे बात करने से पहले नीरा से बात की थी और नीरा ने उन्हें कुछ ग़लत जानकारी दी थी.

वे लोग मेरी बात का भरोसा नहीं कर रहे थे कि मुझे पैसे नहीं मिले. इस सबके बाद भी मैंने नीरा और केएलएम से संपर्क नहीं तोड़ा. धैर्यपूर्वक मैं उन्हें बताता रहा कि मुझे पैसे मिलने चाहिए.

जारी…

(आरके आनंद मशहूर वकील और क्लोज इंकाउंटर्स विद नीरा राडिया के लेखक हैं.) 

Adv from Sponsors

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here