देश के ख़ुदरा बाज़ार में एफडीआई की मंजूरी किसानों, मज़दूरों एवं छोटे व्यापारियों के लिए फ़ायदेमंद नहीं है, फिर भी केंद्र सरकार इसे लेकर अपनी ज़िद पर अड़ी हुई है. वर्ष 1990 में भी तत्कालीन वित्त मंत्री एवं वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ऐसी ही ज़िद करके नई आर्थिक नीति लागू की थी. उस वक्त भी संसद से लेकर सड़क तक विरोध-प्रदर्शन हुए थे. बावजूद इसके कांग्रेस सरकार ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और विदेशी पूंजीपतियों को इस देश में लूट करने की खुली छूट दे दी. इसे कांग्रेस पार्टी की उपलब्धि कहा जाएगा या उसकी अब तक की सबसे बड़ी भूल, जिसने वर्ष 1990 और वर्ष 2012 में नई आर्थिक नीति लागू करके देश के करोड़ों लोगों को गहरे अवसाद में डाल दिया है.

देश के व्यापारी समुदाय के शीर्षस्थ संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) एवं ख़ुदरा व्यापारियों के मोर्चे ने ख़ुदरा बाज़ार में एफडीआई के ख़िलाफ़ गत 7 मार्च को राजधानी दिल्ली में अपना कारोबार पूरी तरह ठप कर दिया. केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की ख़ातिर व्यापारी संगठनों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में ख़ुदरा स्वराज्य बचाओ रैली का आयोजन किया. इस रैली में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी, विजय गोयल, अरुण जेटली एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता ए बी वर्धन समेत कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने देश के ख़ुदरा बाज़ार में एफडीआई की मंजूरी को जनविरोधी क़रार दिया. राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इस मुद्दे पर संघर्ष तेज़ करने का संकल्प दोहराया.
इस रैली में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल और दिल्ली प्रदेश महामंत्री नरेंद्र मदान ने कहा कि देश में व्यापारियों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. केंद्र सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों और विदेशी कंपनियों के दबाव में है और उन्हीं की सुविधानुसार क़ानून बनाकर देशी व्यापारियों पर लादे जा रहे हैं. उनके अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर हो रही है, लेकिन सरकार घरेलू संसाधनों का उपयोग करने की बजाय पश्‍चिमी देशों में बुरी तरह असफल हुए व्यापारिक मॉडल को भारत में लागू करना चाहती है. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि देश में व्यापारियों पर नए-नए क़ानून लादे जा रहे हैं, जिनमें वैट, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, दिल्ली किराया क़ानून, व्यापारियों पर लगने वाले कन्वर्शन एवं पार्किंग शुल्क महत्वपूर्ण हैं.
ख़ुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई पर संसद के भीतर बहस और मतदान की प्रक्रिया से यह साफ़ हो गया है कि तथाकथित क्षेत्रीय पार्टियों का आम जनता के व्यापक हितों, जिसे अक्सर राष्ट्रीय हितों के रूप में परिभाषित किया जाता है, से कोई सरोकार नहीं रह गया है. इन दलों का मक़सद अपने नेताओं के हितों की रक्षा करना और केंद्र सरकार एवं सत्तारूढ़ दलों से सौदेबाज़ी तक सीमित रह गया है. बहरहाल, एफडीआई पर आम जनता के बीच काफ़ी समय से बहस जारी है. हालांकि, संसद में इस बहस पर विराम लग चुका है. अगर सरकारी विज्ञापन और प्रचार को छोड़ दिया जाए, तो यह स्पष्ट है कि एफडीआई आम जनता के हित में नहीं है, क्योंकि इससे देश की अर्थव्यवस्था में कोई सकारात्मक सुधार आने वाला नहीं है. ऐसा आर्थिक पैमाना किसी काम का नहीं, जिसका जनता के जीवन स्तर पर कोई सकारात्मक प्रभाव न दिखे. सरकार के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि आम जनता को ग़रीबी, भुखमरी, महंगाई और बेरोज़गारी से राहत क्यों नहीं मिल रही है?
वर्ष 1990 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जो उस समय देश के वित्त मंत्री थे, ने नई आर्थिक नीति को मंजूरी दी. सरकार के उस फैसले से कितना फ़ायदा हुआ, यह तो वही जानें, लेकिन उसके दुष्परिणाम अब सबके सामने हैं. उस समय भी यही दलील दी गई थी कि आम जनता को उसकी तकलीफों से उबारने और आर्थिक संसाधनों को जुटाने के लिए इन सुधारों को लागू किया जा रहा है. पिछले बाइस-तेइस सालों में आम जनता की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि उसकी दशा पहले से अधिक ख़राब हो गई है. इसमें कोई शक नहीं कि आर्थिक सुधारों के नाम पर एफडीआई की मंजूरी असल में आर्थिक असमानता बढ़ाने वाली नीति है. एफडीआई के लिए तय नियम-क़ानून उसके मुना़फे के हित में कल बदले नहीं जाएंगे, इसकी गारंटी कौन देगा?

बंद में शामिल होने वाले व्यापारिक संगठन

ख़ुदरा लोकतंत्र बचाओ रैली में दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन, खारी बावली सर्व व्यापार मंडल, करोल बाग ट्रेडर्स फेडरेशन, दिल्ली साड़ी ट्रेडर्स एसोसिएशन, पेपर मर्चेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन, अशोक विहार व्यापार मंडल, जनरल मशीनरी मर्चेंट्स एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ रोहिणी ट्रेडर्स एसोसिएशन, राजौरी गार्डन मार्केट एसोसिएशन, उत्तम नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, यमुनापार व्यापार महासंघ, दिल्ली वेडिंग एंड ग्रीटिंग कार्ड एसोसिएशन, दिल्ली सीमेंट डीलर्स एसोसिएशन, दिल्ली कैनवास मर्चेंट्स एसोसिएशन, दिल्ली सेनेटरी डीलर्स एसोसिएशन और ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मुख्य रूप से हिस्सा लिया.
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