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अधिकारियों का सेवा विस्तार या रिटायर अधिकारियों को फिर से नियुक्त करना यूपीए सरकार का हॉलमार्क बन गया है. सेवा विस्तार से सरकार के बेहद विश्‍वासपात्र समझे जाने वाले अधिकारी तो खुश हैं, लेकिन उन अधिकारियों में निराशा का माहौल है, जो बड़े पदों के लिए योग्य थे या जिनकी नियुक्ति आगे के दिनों में वरिष्ठ पदों पर होनी थी. मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर में इन दिनों यह प्रकरण चर्चा का विषय बना हुआ है. और इस चर्चा ने तब और जोर पकड़ा, जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने छह आईएफएस अधिकारियों का सेवा विस्तार करते हुए उन्हें नई नियुक्तियां दीं. पीएमओ के इस आदेश से लाभान्वित होने वालों में एस जयशंकर हैं, जो अभी तक चीन में भारत के राजदूत थे और अब नई नियुक्ति के तहत इसी पद पर जाएंगे. पूर्व विदेश सचिव रंजन मथाई अब यूनाइटेड किंगडम के हाई कमिश्‍नर बनेंगे. इसी तरह पी एस राघव, जो इस समय अतिरिक्त सचिव हैं और 2015 में रिटायर होने वाले हैं, उन्हें रूस का एंबेसडर बनाकर दो साल का एक्सटेंशन दिया जा रहा है. जाहिर है सरकार के इन कदमों से दूसरे आईएफएस अधिकारी चिढ़े हुए हैं. संभव है कुछ लोगों को अब शीर्ष राजनयिक मिशनों के लिए राजदूत बनने से वंचित रहना पड़े. फिलहाल सभी लोग चुप्पी साधे हुए हैं और इस समय उनके लिए यही ठीक भी है.

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