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क्या सरकार ने कराई थी वॉट्सएप की जासूसी ? क्या कहता है विपक्ष और कौन हुआ शिकार?
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क्या सरकार ने कराई थी वॉट्सएप की जासूसी ? क्या कहता है विपक्ष और कौन हुआ शिकार?

व्हाट्सएप में स्पाइवेयर के माध्यम से जासूसी के मामले ने भारत में सियासी हड़कंप मचा दिया है. इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी NSO ग्रुप की ओर से भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को स्पाइवेयर द्वारा टारगेट कर उनकी जासूसी की गई. गुरुवार को जब ये मामला सामने आया तो विपक्ष ने एक बार फिर मोदी सरकार को निशाने पर लिया.

वॉट्सऐप ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इजरायल की साइबर खुफिया कंपनी एनएसओ ग्रुप की ओर से भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को स्पाइवेयर द्वारा टारगेट कर उनकी जासूसी की गई. गुरुवार को जब ये मामला सामने आया तो विपक्ष ने एक बार फिर मोदी सरकार को निशाने पर लिया. कांग्रेस के राहुल गांधी ने इस मसले को राफेल विवाद से जोड़ दिया है, तो वहीं रणदीप सुरजेवाला ने भी निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी सरकार की इस हरकत से वह हैरान नहीं हैं.

क्या कहती है मोदी सरकार ?
गृह मंत्रालय ने कहा है कि ये सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है. इजरायली कंपनी के द्वारा Pegasus नाम के स्पाईवेयर से भारतीय पत्रकारों को निशाना बनाया गया, जिसमें 2 दर्जन से ज्यादा पत्रकार, वकील और हस्तियां शामिल हैं. अगर दुनियाभर में इस आंकड़े को देखें तो ये नंबर करीब 1400 तक जाता है. अब Pegasus के दस्तावेज जो सामने आ रहे हैं, उससे ये खुलासा हो रहा है कि ये जासूसी सिर्फ वॉट्सएप तक सीमित नहीं है.

इन दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि Pegasus स्पाइवेर का खेल वॉट्सएप के अलावा सेल डाटा, स्काइप, टेलिग्राम, वाइबर, एसएमएस, फोटो, ईमेल, कॉन्टैक्ट, लोकेशन, फाइल्स, हिस्ट्री ब्राउज़िंग और माइक-कैमरा तक को अपने कब्जे में ले सकता है. इस स्पाइवेर के द्वारा टारगेट किए गए फोन नंबर के कैमरा, माइक के डाटा को इकट्ठा किया जा सकता है.

कागजों के मुताबिक, इसके लिए सिर्फ स्पाइवेर को इन्स्टॉल करने की जरूरत है, जो कि सिर्फ फ्लैश SMS से भी हो सकता है.

कौन-कौन हुए हैं जासूसी का शिकार?
भारत के 10 एक्टिविस्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि वॉट्सएप की ओर से उन्हें बताया गया है कि उनकी जासूसी हुई थी. इसमें बेला भाटिया, भीमा कोरेगांव केस में वकील निहाल सिंह राठौड़ ने वॉट्सएप से अलर्ट की बात स्वीकारी है, जो कि मई 2019 में दो हफ्ते के अंतराल का था. इनके अलावा जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित एक्टिविस्ट डिग्री प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुम्बडे, शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली के आशीष गुप्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर सरोज गिरी, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और राजीव शर्मा के नाम भी शामिल हैं. हालांकि, वॉट्सएप ने उन नामों की पुष्टि करने से इनकार किया जो निशाने पर थे, लेकिन इन सभी को सूचित किया गया.

सरकार ने क्या किया ? 
जासूसी का मामला सामने आने के बाद से ही मोदी सरकार एक्शन में आ गई है. केंद्र सरकार ने वॉट्सएप से 4 नवंबर तक इस मामले में सफाई देने को कहा है. केंद्रीय IT मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार इस मामले में गंभीर है और वॉट्सएप से इस बारे में जवाब मांगा गया है. भारत सरकार लोगों की प्राइवेसी को प्रोटेक्ट करने के लिए तत्पर है.

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं ?
इस मामले में आम आदमी ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि हैकिंग की तकनीक इतनी ज्यादा एडवांस है कि वॉट्सएप इसमें कुछ नहीं कर पाया. लेकिन वॉट्सएप को ये भी ध्यान रखना चाहिए कि आगे से ऐसा कुछ ना हो. उन्होंने सलाह दी कि लोगों को एप्लिकेशन को समय दर समय अपडेट करते रहना चाहिए.
विपक्ष ने सरकार को घेरा

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