केंद्रीय सूचना आयोग तमाम कठिनाइयों के बावजूद लगातार पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है. जन शिक़ायतों के निराकरण में हो रही देरी से चिंतित आयोग ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह जन शिक़ायतों के निराकरण के लिए एक समय सीमा तय करने के लिए गाइड लाइन जारी करे. संयोग से इन बातों का संबंध न्यायपालिका की उन आपत्तियों से नहीं है, जिनकी वजह से मनमोहन सिंह सूचना क़ानून में संशोधन करना चाहते हैं. यह निर्देश सूचना आयुक्त शैलेष गांधी ने जारी किए हैं. आरटीआई कार्यकर्ता इस निर्देश को महत्वपूर्ण मान रहे हैं, क्योंकि सरकार एक समय सीमा के तहत जवाब देने में असफल रही है. सूत्रों के मुताबिक़, कुछ राज्यों में गाइड लाइन बनाई तो गई है, लेकिन कभी उसका अनुपालन नहीं होता. शैलेष गांधी के पास जो मामला आया था, उसमें उन्हें पता चला कि प्रशासनिक सुधार और जन शिक़ायत विभाग ने जवाब देने के लिए एक ख़ास समय सीमा तय तो की थी, लेकिन उक्त लोक प्राधिकरण ने शायद ही कभी उस गाइड लाइन पर अमल किया हो. गांधी के इस निर्देश से उन बाबुओं को प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जो गाइड लाइन का पालन नहीं करते.

निष्क्रिय एजेंसी

जाति आधारित जनगणना, जिसकी मांग कई कैबिनेट मंत्रियों ने भी की थी, के बारे में गृहमंत्री पी चिदंबरम ने सुझाव दिया है कि यह काम पिछड़ा वर्ग के लिए बने राष्ट्रीय आयोग करे. हालांकि चिदंबरम ने जाति आधारित जनगणना की मांग का विरोध किया था. अब गृहमंत्री के बयान ने इस आयोग के लिए एक योग्य अध्यक्ष की खोज को तेज़ कर दिया है. वर्ष 2009 से यह आयोग, जब इसके अध्यक्ष जस्टिस आर एस पांडियन रिटायर हुए, बिना अध्यक्ष के ही चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक़, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम एन राव का नाम आगे बढ़ाया है. इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री कार्यालय से अभी हरी झंडी मिलना बाक़ी है.

इस्ती़फे से आई आ़फत

पंजाब के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का इस्ती़फा आजकल इस राज्य के नौकरशाहों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव जसवीर सिंह बीर ने अपने तबादले के बाद व़क्त से पहले ही रिटायरमेंट की मांग की. उनका तबादला इस बात के लिए किया गया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के परिवार की बात नहीं मानी थी. सूत्रों के मुताबिक़, बीर के इस्ती़फे ने बादल को मुसीबत में डाल दिया है. पंजाब के आईएएस एसोसिएशन ने सरकार से बीर की भावनाओं पर ध्यान देने की मांग की है. वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने इस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को अपमानित करने की घटना की जांच एक तय समय सीमा के भीतर कराने की मांग की है. बीर का इस्ती़फा अब एक महत्वपूर्ण मुद्दे में तब्दील हो चुका है.

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