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दिल्‍ली का बाबूः गुजरात सरकार की नई परेशानी
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दिल्‍ली का बाबूः गुजरात सरकार की नई परेशानी

मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपीए सरकार के बीच तकरार होती रहती है. एक नया विवाद तब सामने आया, जब गुजरात के पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया है कि वह गुजरात में डीजीपी नियुक्त करने के लिए हस्तक्षेप करें. गुजरात में पिछले सितंबर से डीजीपी का पद खाली पड़ा है. सितंबर 2010 में एस एस खंडेलवाल डीजीपी पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जिसके बाद अभी तक स्थायी तौर पर किसी को डीजीपी नियुक्त नहीं किया गया और एडीजीपी चितरंजन सिंह को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. श्रीकुमार के अनुसार, नियमत: राज्य में डीजीपी का पद 6 महीने से अधिक समय तक खाली नहीं रखा जा सकता है. सूत्रों के अनुसार, श्रीकुमार ने गृह मंत्री से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि डीजीपी के रिक्त पद पर नियुक्ति क्यों नहीं की गई है. अब गृह मंत्री को इसका जवाब देना है.

रेल मंत्रालय के बाबू

ममता बनर्जी को नाराज करने के बाद दिनेश त्रिवेदी की रेल मंत्रालय से विदाई हो गई. उनकी जगह मुकुल राय को रेल मंत्री बनाया गया. मुकुल राय के रेल मंत्री बनने के बाद बाबुओं के बीच इस बात की चर्चा है कि क्या वह मंत्रालय में काम कर रहे अधिकारियों में कुछ फेरबदल करेंगे. जब ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं तो उन्होंने अपने विश्वासपात्र बाबुओं को साथ काम करने के लिए बुलाया था, लेकिन जब वह दिल्ली से कोलकाता गईं तो उनमें से कई बाबुओं को अपने साथ ले गईं. इनमें रतन मुखर्जी, तपन राय, जे के साहा एवं गौतम सान्याल के साथ कुछ अन्य अधिकारी शामिल थे. बाद में तपन राय और रतन मुखर्जी अपने पुराने मंत्रालय में वापस आ गए थे. अब जबकि मुकुल राय रेल मंत्री बन गए हैं तो देखना यह है कि वह ममता बनर्जी के विश्वासपात्र अधिकारियों को अपने साथ रखते हैं या फिर दूसरे अधिकारियों को, जिन्हें वह पसंद करते हैं.

 सूचना आयोग और बाबू

सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद सेवानिवृत्त बाबुओं को सूचना आयुक्त बनाया जाना जारी है. सूत्रों के अनुसार, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कुछ दिनों पहले सेवानिवृत्त हुईं मुख्य सचिव उर्वशी गुलाटी को राज्य का सूचना आयुक्त नियुक्त किया है. हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त नरेश गुलाटी भी पूर्व आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त बनने के लिए पिछले साल सिविल सेवा से इस्ती़फा दे दिया था. इसे संयोग ही कहा जाए कि वह उर्वशी गुलाटी के पति हैं. हालांकि उर्वशी गुलाटी मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हो गई हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक उनके उत्तराधिकारी का नाम घोषित नहीं किया है. वरीयता के आधार पर तो मुख्य वित्त आयुक्त राजकुमार उर्वशी गुलाटी के उत्तराधिकारी होंगे, लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि पी के चौधरी भी मुख्य सचिव पद के मुख्य दावेदारों में से एक हैं. चौधरी अभी केंद्र में डेपुटेशन पर हैं.

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