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राजा का एक और कारनामा
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राजा का एक और कारनामा


  • बीएसएनएल की वीएएस शा़खा में घोटाले की आशंका.
  • चलाई मनमानी, एक ही काम के लिए अलग-अलग एग्रीमेंट.
  • एक फ्रेंचाइजी को पहुंचाया फायदा, अन्य का क़रार निरस्त.
  • ऑनमोबाइल कंपनी का किया प्रचार, जमकर हुआ खर्च.
  • क्या राजा को थी इसकी जानकारी, क्यों नहीं हुई कार्रवाई.

दूरसंचार मंत्रालय और घोटालों का मानो चोली-दामन का साथ है. टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की आंच से अभी दूरसंचार विभाग उबरा भी नहीं था कि एक और नया मामला सामने आ गया. चौथी दुनिया की खास प़डताल से भारत संचार निगम लिमिटेड कीवैल्यू एडेड सर्विसेज शा़खा में एक नए घोटाले की बू आ रही है. 2004 से लेकर अब तक, बीएसएनएल के शीर्ष अधिकारी अपनी मनमानी करते हुए एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, वह भी ट्राई के तमाम नियम-क़ानून को ठेंगा दिखाते हुए. चौथी दुनिया की खास रिपोर्ट :

आपने कभी सोचा है कि जब आप नच बलिये, इंडियन आइडियल या कौन बनेगा करो़डपति जैसा कार्यक्रम देख कर एसएमएस करते हैं तो असल में वह पैसा किसे करोडपति बनाता है. ज़ाहिर है, आप जवाब के तौर पर दूरसंचार कंपनियों का नाम लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. इस खेल के पीछे दूरसंचार कंपनियों के अलावा भी कुछ ऐसी कंपनियां होती हैं जो आपके पैसों से करो़डपति-अरबपति बन जाती हैं, लेकिन इसके लिए दूरसंचार कंपनियों की कृपादृष्टि का होना बहुत ज़रूरी है. चौथी दुनिया के पास उपलब्ध दस्तावेज़ों से एक ऐसा ही खुलासा हो रहा है. एक ऐसी कंपनी का खुलासा जिस पर भारत की सबसे ब़डी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की खास नज़र-ए-इनायत है. मामला, बीएसएनएल की वैल्यू एडेड सर्विसेज से जु़डा हुआ है. वैल्यू एडेड सर्विसेज के तहत मोबाइल सब्स्क्राइबर को विभिन्न सुविधाएं मसलन, रिंग टोन, मोबाइल रेडियो, विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में वोटिंग की सुविधा इत्यादि शामिल है. इसके बदले ग्राहक से एक तय राशि प्रति महीने वसूले जाने की व्यवस्था है. भारत में मोबाइल वैल्यू एडेड सर्विसेज का कारोबार 21 हज़ार करो़ड रुपये से भी ज़्यादा का है. पैसा कमाने के लिए मोबाइल इंडस्ट्री को इसी सर्विस पर निर्भर होना प़डता है. चूंकि, बीएसएनएल देश की सबसे ब़डी दूरसंचार कंपनी है और इसके ग्राहकों की संख्या भी अच्छी खासी है. इस लिहाज़ से देखें तो इस सेवा के बदले बीएसएनएल को अच्छा मुना़फा होता होगा.

दरअसल, ग्राहकों तक वैल्यू ऐडेड सर्विसेज पहुंचाने का काम बीएसएनएल ने 2003 में शुरू किया. इस काम के लिए उसने शुरू में कुछ प्राइवेट कंपनियों के साथ समझौता किया यानी कुछ प्राइवेट कंपनियों को फ्रेंचाइजी प्रदान की गईं. इसके लिए प्राइवेट कंपनियों ने आवेदन किया, बैंक गारंटी दी, ज़रूरी आधारभूत संरचना ख़डी की, ताकि बीएसएनएल ग्राहकों को वीएएस सुविधा पहुंचाई जा सके. इस सबके पीछे बीएसएनएल को एक भी पैसा खर्च नहीं करना प़डा. बाक़ायदा कंपनियों के साथ एग्रीमेंट किया गया, नियम क़ानून बनाए गए. मुना़फे में बंटवारे के तौर पर बीएसएनएल को 75 फीसदी और कंपनियों को 25 फीसदी हिस्सा मिलना था. इसके बाद यह कारोबार ठीक -ठाक चलने लगा. दर्जनों कंपनियों के साथ बीएसएनएल का समझौता हुआ.

ऑनमोबाइल वीएएस एग्रीमेंट

  1. क्लॉज 2 के मुताबिक़ इस कंपनी के साथ बीएसएनएल का तीन साल के लिए समझौता.
  2. मार्केटिंग क्लॉज के मुताबिक़ वीएएस सर्विसेज के मार्केटिंग, विज्ञापन और प्रमोशन के लिए ऑनमोबाइल और बीएसएनएल मिलकर काम करेंगे.
  3. व्यापारिक शर्तों के मुताबिक़ ऑनमोबाइल को यह छूट दी गई कि वह अपनी सहायक कंपनियों का इस्तेमाल वीएएस सर्विसेज मुहैया कराने के लिए कर सकती है.
  4. व्यापारिक शर्त के क्लॉज 7 के मुताबिक़ ऑनमोबाइल कंपनी को वीएएस सुविधा के व्यापारिक लॉन्च के लिए 3 महीने का व़क्तदिया गया.
  5. बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल कंपनी को मुना़फे की रक़म की अदायगी दस दिनों के भीतर कर देने का समझौता किया.
  6. 2008 में समान नीति अपनाने के बाद बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल के लिए समझौते की अवधि दो साल रखी.

अन्य कंपनियों के वीएएस  एग्रीमेंट

  1. अन्य कंपनियों के साथ बीएसएनएल का महज़ एक साल के लिए समझौता.
  2. अन्य कंपनियों को खुद ही वीएएस सर्विसेज के मार्केटिंग, विज्ञापन और प्रमोशन करने के लिए कहा गया.
  3. अन्य कंपनियों को यह सुविधा नहीं दी गई.
  4. अन्य कंपनियों को इसके लिए स़िर्फदो महीने का समय दिया गया.
  5. अन्य कंपनियों को भुगतान करने के लिए यह समय सीमा 30 दिन निर्धारित की गई.
  6. समान नीति अपनाने के बाद भी अन्य कंपनियों के लिए यह अवधि स़िर्फएक साल तय की गई.

लेकिन, 2008 के बाद से कहानी में एक मो़ड आता है. एस.एस. सिरोही को बीएसएनएल वीएएस शा़खा का डीडीजी नियुक्त किया गया. इसके बाद 2009 तक महज़ तीन कंपनियां ही इस धंधे में बच गईं. बाक़ी कंपनियों को विभिन्न कारण बताकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. उस व़क्तसंचार मंत्री ए. राजा थे और उनके सचिव आर.के चंदौलिया की तूती बोलती थी. एक तथ्य और है, जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है. जहां प्राइवेट दूरसंचार कंपनियां ज़्यादा से ज़्यादा फ्रेंचाइजी बनाने की कोशिश करती हैं, वहीं सरकारी कंपनी बीएसएनएल ने अपने फ्रेंचाइजी की संख्या घटाकर तीन कर दी. बहरहाल, बीएसएनएल के इस निर्णय से सीधे-सीधे एक खास कंपनी को फायदा पहुंचा. उस कंपनी का नाम है, मेसर्स ऑनमोबाइल. इसके चेयरमैन हैं अरविंद राव. देश-विदेश में यह कंपनी मोबाइल ग्राहकों को वैल्यू ऐडेड सर्विसेज मुहैया  कराने  का काम करती है. दिलचस्प रूप से जब बीएसएनएल ने ऍनमोबाइल कंपनी के साथ वीएएस सर्विसेज के लिए एग्रीमेंट किया तब न स़िर्फ तमाम नियम-क़ानूनों की अनदेखी की, बल्कि दो क़दम आगे ब़ढकर इसे हर तरह से मदद देने का भी काम किया. किसी अन्य कंपनी को वह सुविधा बिल्कुल भी नहीं दी गई, जो बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल कंपनी को दी, मसलन ऑनमोबाइल कंपनी के साथ बीएसएनएल का तीन साल के लिए समझौता, जबकि अन्य कंपनियों के साथ बीएसएनएल का महज़ एक साल के लिए समझौता किया गया. मार्केटिंग क्लॉज के मुताबिक़ वीएएस सर्विसेज के मार्केटिंग, विज्ञापन और प्रमोशन के लिए ऑनमोबाइल और बीएसएनएल ने साथ मिलकर काम करने का समझौता किया, जबकि अन्य कंपनियों को यह सुविधा नहीं दी गई. बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल कंपनी को मुना़फे की रक़म की अदायगी दस दिनों के भीतर कर देने का समझौता किया, जबकि अन्य कंपनियों के लिए यह समय सीमा 30 दिन तय की गई.

जनवरी 2008 में, बीएसएनएल की फ्रेंचाइजी कंपनी ऑनमोबाइल ने शेयर बाज़ार में अपना आईपीओ उतारने का फैसला किया. ज़ाहिर है, शेयर बाज़ार में सफलता पाने के लिए कंपनियों को अपना ज़ोरशोर से प्रचार-प्रसार करना प़डता है. सो, ऑनमोबाइल कंपनी ने भी यही किया और उसे बीएसएनएल से ज़बरदस्त सहयोग मिला. बीएएसएनएल के वीएएस शा़खा से मिले शॉर्ट कोड (12555) का जमकर इस्तेमाल किया गया. ऑनमोबाइल कंपनी की ब्रांडिंग के लिए बीएसएनएल ने भी जमकर पैसे खर्च किए. हालांकि यह सब वीएएस सर्विसेज के प्रचार-प्रसार के नाम पर किया गया, लेकिन इसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष फायदा ऑनमोबाइल कंपनी को ही मिला. अब सवाल उठता है कि बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए जनता का पैसा क्यों खर्च किया. क्या इस सबकी जानकारी बीएसएनएल के अधिकारियों या संचार मंत्री ए. राजा को नहीं थी. और अगर थी तो फिर यह सब कैसे और किसके आदेश पर हुआ? ज़ाहिर है, इन सवालों का जवाब एक निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है.
समझौते के मुताबिक़ बीएसएनएल कीसभी फ्रेंचाइजी को अपने शॉर्ट कोड का प्रचार-प्रसार खुद ही करना था, लेकिन क्या वजह है कि ऑनमोबाइल के शॉर्ट कोड के प्रचार-प्रसार पर बीएसएनएल ने अपना पैसा खर्च किया? उदाहरण के लिए महाराष्ट्र दूरसंचार सर्कल में बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल कंपनी के वीएएस शॉर्ट कोड 12555 के प्रमोशन के लिए दो करो़ड रुपये खर्च किए. इसके अलावा, रेल टिकट, फोन बिल, अ़खबारों में विज्ञापन (जिसमें प्रीति जिंटा बीएसएनएल का विज्ञापन कर रही हैं), बीएसएनएल की वेबसाइट, महाराष्ट्र सरकार के बिजली बिलों पर ऑनमोबाइल कंपनी के शॉर्ट कोड 12555 का जमकर प्रचार किया गया. और यह सब कुछ तब हुआ जब ऍानमोबाइल कंपनी का आईपीओ शेयर बाज़ार में आने वाला था, लेकिन सवाल यह कि इस सब खर्च के बाद बीएसएनएल को क्या मिला?
यह पूरा मामला असल में करो़डों रुपये की हेराफेरी की ओर इशारा कर रहा है. बीएसएनएल की हर एक फ्रेंचाइजी को एक शॉर्ट कोड मिला. ऑनमोबाइल कंपनी का शॉर्ट कोड है 12555. समझौते के मुताबिक़ बीएसएनएल की सभी फ्रेंचाइजी को अपने शॉर्ट कोड का प्रचार-प्रसार ़खुद ही करना था, लेकिन क्या वजह है कि ऑनमोबाइल के शॅर्ट कोड के प्रचार-प्रसार पर बीएसएनएल ने अपना पैसा खर्च किया? उदाहरण के लिए महाराष्ट्र दूरसंचार सर्कल में बीएसएनएल ने ऑनमोबाइल कंपनी के वीएएस शॉर्ट कोड 12555 के प्रमोशन के लिए दो करो़ड रुपये खर्च किए. इसके अलावा, रेल टिकट, फोन बिल, अ़खबारों में विज्ञापन (जिसमें प्रीति जिंटा बीएसएनएल का विज्ञापन कर रही हैं), बीएसएनएल की वेबसाइट, महाराष्ट्र सरकार के बिजली बिलों पर ऑनमोबाइल कंपनी के शॉर्ट कोड 12555 का जमकर प्रचार किया गया. और यह सब कुछ तब हुआ, जब ऑनमोबाइल कंपनी का आईपीओ शेयर बाज़ार में आने वाला था. लेकिन सवाल यह कि इस सब खर्च के बाद बीएसएनएल को क्या मिला? एक सवाल यह भी है कि जब ऑनमोबाइल कंपनी को इतनी सहूलियत दी गई तो अन्य कंपनियों को क्यों नहीं? इतना ही नहीं, बीएसएनएल ने स़िर्फ ऑनमोबाइल कंपनी को मीडिया नंबर 505 भी आवंटित कर दिया, जबकि बीएसएनएल कीनीति के मुताबिक़ यह नंबर किसी भी फ्रेंचाइजी को नहीं दिया जाना था. इसका इस्तेमाल टीवी कार्यक्रमों में वोटिंग के लिए होता है. ज़ाहिर है, बीएसएनएल के इस पक्षपात का अन्य कंपनियों पर बुरा असर भी प़डा. नासिक के आईआईएसटी इंफिटेक प्रा. लि. के एमडी दिलीप बाघ ने तो बीएसएनएल के दोहरे रवैये से तंग आकर इसके दिल्ली स्थित मुख्यालय में आकर ़खुदकुशी तक करने की कोशिश की. उनकी कंपनी का भी वीएएस सर्विसेज के लिए बीएसएनएल से क़रार हुआ था. इसके लिए उन्होंने बैंक से क़र्ज़ भी ले लिया था, लेकिन एक तो का़फी समय के बाद उनका क़रार एक्टिवेट हुआ और फिर जल्द ही उसे निरस्त भी कर दिया, क्योंकि बीएसएनएल को इस सबसे कोई फर्क़नहीं प़डने वाला था.

बहरहाल, इस पूरे मामले में तब महाराष्ट्र के दो सांसदों शिशुपाल पटेल और प्रकाश जाधव ने हस्तक्षेप करते हुए दूरसंचार विभाग और तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की भी मांग की थी, लेकिन न तो मंत्री ने और न ही विभाग ने उनकी मांग पर ध्यान दिया. नतीजतन, बीएसएनएल और ऑनमोबाइल कंपनी की मनमानी का शिकार अब भी आम जनता यानी मोबाइल कस्टमर हो रहे हैं, लेकिन यह मामला अपने-आप में कई सारे सवाल ख़डे करता है. मसलन, ऑनमोबाइल कंपनी, ए. राजा और उनके सहयोगी आर के चंदौलिया और बीएसएनएल वीएएस शा़खा के शीर्ष अधिकारियों के बीच ऐसी क्या बात है कि इस कंपनी के लिए बीएसएनएल तमाम नियम क़ानून की भी परवाह नहीं कर रहा? क्या यह सारा खेल बीएसएनएल के अधिकारियों और तत्कालीन संचार मंत्री ए. राजा के समर्थन से खेला गया और अब भी खेला जा रहा है? ज़ाहिर है, इन सवालों के साथ-साथ सवाल और भी हैं जिनकी जांच होनी चाहिए, ताकि स़फेद हाथी बन रहे बीएसएनएल को बचाया जा सके.

    इन कंइन कंपनियों का एग्रीमेंट निरस्त किया 

  • तानला सॅाल्यूशन लि.
  • आईआईएसटी इंफोटेक लि.
  • बियोंडबेसिकस इंफोटेक प्रा. लि.
  • वन97 कम्युनिकेशन प्रा.लि.
  • वॉयसगेट टेक्नोलॅाजीज इंडिया प्रा. लि.
  • वर्ल्ड फोन इंडिया
  • राजस्थान पत्रिका प्रा. लि.
  • कलकत्ता टेलीविजन नेटवर्क प्रा.लि.
  • साइलेक्स इंडिया लि.
  • इमिमोबाइल प्रा. लि.
  • वाईफाई नेटवर्क्स लि.
  • कंप्यूटर टेलिफोनी
  • लैटीस ब्रिज
  • कॉलनेक्स्ट सॅाल्यूशन लि.
  • टाइम्स इंटरनेट
  • इंडियाकॉम.

4 comments

  • shashishekhar

    Hamare desh me itna bhrastachar hai ki ab iska naam bharat se badal kar bharast+rat=BHARASTARAT kar dena chahiye.

  • shashishekhar

    हेल्लो .. हम तो ये ही कहेगे जेल जाने पर हाउ आर यू डाट .इन

  • shashishekhar

    AADAME APANE SVARATH KE LIYE KITNA GI DA

  • shashishekhar

    ye desh hi ghotalon ka hai kyon ki keval 15% log emandar hain 85% beiman satta ke galiyaron main

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