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भूमाफिया लील रहे हैं तालाब
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भूमाफिया लील रहे हैं तालाब

जल समस्या से निपटने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की जल संवर्धन और जल संरक्षण नीति में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद सतना ज़िले को पानी की समस्या से उबारा नहीं जा सका है. ये सभी नीतियां फिलव़क्त तक अप्रभावी हैं. 25 जुलाई 2001 को सुप्रीम कोर्ट ने आज़ादी के पूर्व से अस्तित्व में रहे तालाबों को अतिक्रमणकारियों के क़ब्ज़े से मुक्त कराकर पुन: तालाब के रूप में विकसित किया जाने का फरमान जारी किया गया था. इस फैसले के तहत माननीय न्यायालय ने पशु-पक्षी, आदमी की ज़रूरतों को प्रमाणित करते हुए शहर के पेयजल स्त्रोतों के रिचार्ज होने में तालाब की भूमिका को स्पष्ट किया था.

सतना शहर में भूमाफिया के कसते शिकंजे से वहां रहे चौबीस तालाबों में से अधिकांश खत्म हो चुके हैं.  भूमाफिया निजी फायदे के लिए शहर के तालाबों के अस्तित्व को समाप्त कर रहे हैं और प्रशासन बे़खबर सो रहा है. यहां वर्तमान और भविष्य में होने वाले जल संकट को दर किनार कर तालाबों को समाप्त करके धड़ल्ले से नई कालोनियां बसाने का इंतजाम हो रहा है. शहर में पेयजल के स्त्रोंतो की घटती हुई संख्या पर प्रशासन अभी भी जागरूक नहीं हो पाया है.

सतना ज़िले में जगतदेव तालाब, बजरहा तालाब, रती तालाब, अमोधा तालाब अधिकतम सात हेक्टेयर तक की ज़मीन में फैले हुए थे. सरकारी दस्तावेजों में शहर की जल आपूर्ति के लिए तालाब एकमात्र स्त्रोत है और तालाबों के अस्तित्व का शहर से पूरी तरह समाप्त होना संकट की घंटी है. परिणामस्वरूप सतना शहर में पेयजल की स्थिति भीषण हो गई है. पिछले पांच सालों से गर्मी में सतना ज़िले से सर्वाधिक पलायन की घटना होती है.

ज़िला प्रशासन जब तक तालाबों की स्थिति को शहर में सुरक्षित और सुनिश्चित नहीं करता तब तक सतना शहर के लिए पानी उपलब्ध करवा पाना संभव नहीं है. भूमाफियाओं के कड़े नियंत्रणों की ज़रूरत ज़िले के प्रबृद्ध नागरिकों द्वारा बार-बार उठाई जाती है परंतु सतनावसियों को आज तक प्रशासन द्वारा उठाने जाने वाले सख्त क़दमों का इंतजार है.

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