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अमृता राव की यादें
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अमृता राव की यादें

फरवरी रोमांस का महीना है. अमृता का कहना है कि आज मैं जो कुछ भी हूं अपने फैंस की वजह से ही हूं. दरअसल, हम लोग इतने बिजी रहते हैं कि समय ही नहीं मिल पाता है. सो मैंने इस बार अपने फैंस को शीप बार में मिलने की ठानी. मैं चाहती थी कि मुंबई नगरिया की भीड़-भाड़ से परे इन सब फैंस के साथ एक प्यार भरी शाम गुज़ारूं. वह अपने लिए पहली बार प्यार से व्याकुल किसी शख्स को याद करते हुए बोलीं, हां आज भी मैं उस दिन को याद कर शोक्ड हो जाती हूं. उस समय मैं केवल आठवीं कक्षा में थी. दरवाज़े की घंटी बजती है और मेरे पापा दरवाज़ा खोलते हैं. यह देखकर हम सब शोक्ड हो जाते हैं कि कोई बहुत ही सुंदर फूलों का गुलदस्ता मेरे लिए भेजता है. यह एक बेनाम गुलदस्ता होता है जिसे देखकर मेरे सारे रिश्तेदार जो घर पर मौजूद थे, मुझे शक की नज़रों से देखने लगते हैं. मैं बहुत ही शर्मिंदगी महसूस करती हूं. हालांकि मेरा कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं था, किंतु मेरे रिश्तेदारों को मैं यह बात कैसे बताती. खैर जैसे-तैसे बात टल गई, किंतु जब भी उस दिन को मैं याद करती हूं तो कुछ खट्टी-मीठी यादें ताज़ा हो जाती हैं. रोमांटिक फिल्मों के  बारे में भी उन्होंने कहा, मुझे रोमांटिक फिल्में ही पसंद हैं. ड्रामा और मारधाड़ वाली फिल्में मुझे पसंद नहीं हैं. मुझे प्यार में एक पॉजिटिव फीलिंग मिलती है. निगेटिव चीज़ों से मुझे परहेज़ है. अमृता की प्यार की परिभाषा के बारे में मेरा ऐसा मानना है कि प्यार कनडिंशनल नहीं होता है. यह तो जब होना है, जिससे होना है, हो जाता है. इस प्यार में न तो कोई उम्र की सीमा होती है और न किसी जात-पात की. बस जब होना है, हो जाता है. प्यार में हर औरत का ऐसा मानना है कि उन्हें शादी  से पहले जो प्यार उनके पति से मिलता है वह शादी के बाद नदारद हो जाता है. यह सच है कि हर आदमी यह चाहता है कि वह औरत का पहला प्यार हो, किंतु हर औरत यह चाहती है कि कोई भी मर्द उसका आ़खिरी प्यार हो.

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