नई दिल्ली: मोदी सरकार में गृह मंत्री बनने के बाद भी अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर भी बने रह सकते हैं. सूत्र बता रहे हैं कि बीजेपी सफलता के शिखर पर है. मगर इस शिखर पर स्थिरता के लिए अभी संगठन को अमित शाह की जरूरत हैलोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए इलेक्शन विनिंग मशीन बने अमित शाह गृह मंत्री के साथ-साथ पार्टी अध्यक्ष भी बने रह सकते हैं.

आगामी हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर पार्टी किसी तरह का रिस्क उठाने के मूड में नहीं है. अमित शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के बाद से संगठन में कायम हुई हनक और नतीजों से कार्यकर्ताओं में पैदा हुए जोश को बीजेपी बनाए रखना चाहती है.

क्या नियम आड़े आएंगे?

बीजेपी में ‘एक व्यक्ति-एक पद’ सिद्धांत लागू होने की बात कही जाती है. मतलब कि संगठन में रहते सरकार में भूमिका नहीं निभा सकते. मगर पार्टी के सितंबर, 2012 में संशोधन के बाद तैयार हुए नए संविधान में इसका कोई लिखित में जिक्र नहीं मिलता. बीजेपी की वेबसाइट (bjp.org) पर मौजूद 46 पेज के संविधान में यूं तो राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर स्थानीय पदाधिकारियों के चुनाव तक के नियम-कायदे दर्ज हैं.

मगर इसमें अध्यक्ष पद के लिए कहीं ‘एक व्यक्ति-एक पद’ सिद्धांत की शर्तें नहीं दिखतीं. बीजेपी की वेबसाइट पर मौजूद यह संविधान, सितंबर 2012 में नए सिरे से तैयार हुआ था. बीजेपी की मई 2012 में मुंबई में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अध्यक्ष को तीन-तीन साल का दो कार्यकाल देने का प्रस्ताव पास हुआ था. जिसे सितंबर 2012 में सूरजकुंड की बैठक में मंजूरी मिली थी.

पहले सिर्फ तीन साल के एक कार्यकाल तक ही कोई राष्ट्रीय अध्यक्ष रह सकता था. हालांकि 2014 में जब राजनाथ सिंह मोदी कैबिनेट में शामिल हुए तो उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया था. सूत्र बता रहे हैं कि यह केस टू केस मामला हो सकता है. जरूरी नहीं कि जो पहले होता आया हो, वही इस बार अमित शाह के मामले में भी हो.