fbpx
Now Reading:
सरकार ने निकाला CAA के विरोध का तोड़, नागरिकता देने की पूरी प्रक्रिया हो सकती है ऑनलाइन
Full Article 3 minutes read

सरकार ने निकाला CAA के विरोध का तोड़, नागरिकता देने की पूरी प्रक्रिया हो सकती है ऑनलाइन

CAA Protest

नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर एक जुट हो रही विपक्षी पार्टियों और इसका विरोध करने वाले राज्यों से निपटने के लिए मोदी सरकार नागरिकता प्रक्रिया को ऑनलाइन करने पर विचार कर रही है. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि नागरिकता संशोधन एक्ट  को लागू करने में किसी तरह का अवरोध ना हो, इसको लेकर अब नागरिकता संशोधन एक्ट को पूरी तरह से ऑनलाइन करने की तैयारी चल रही है. इसके अलावा गृह मंत्रालय मौजूदा प्रावधानों को बदलने की भी सोच रहा है, अभी तक नागरिकता की प्रक्रिया डीएम के हाथ में है. लेकिन केंद्र सरकार इसे बदल सकती है.

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इस प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से राज्य सरकारों का इसमें कोई रोल ही नहीं रहेगा और ऐसे में जिसे नागरिकता चाहिए होगी वह आसानी से हासिल कर लेगा. अधिकारी के मुताबिक , संविधान के सातवें शेड्यूल की यूनियन लिस्ट के हिसाब से इस कानून पर राज्य सरकार का अधिकार नहीं है. यूनियन लिस्ट में ऐसी कुल 97 बातें हैं जो सिर्फ केंद्र के अधिकार में आती हैं, जिनमें नागरिकता, रेलवे, विदेश नीति और रक्षा नीति जैसे अधिकार आते हैं.

केरल विधानसभा में नागरिकता संशोधन एक्ट  के खिलाफ प्रस्ताव पास होने के बाद वैसा ही प्रस्ताव अब तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी लाने की मांग हो रही है. विपक्ष की मांग है कि विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर इस कानून का आधिकारिक विरोध होना चाहिए.

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन का कहना है कि नागरिकता संशोधन एक्ट के जरिए केंद्र सरकार देश को धार्मिक आधार पर बांटना चाहती है. अगर कानून संसद में पास हो गया, इसका मतलब ये नहीं है कि हम गैर-संवैधानिक कानून को राज्य में पास कर दें.

वहीं केरल, पंजाब, बंगाल समेत अन्य राज्यों की तरफ से हो रहे विरोध पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि संसद से पास हुए कानून को पूरे देश में लागू किया जाता है और नागरिकता देने का अधिकार राज्य नहीं सिर्फ केंद्र के पास है. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन एक्ट किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता नहीं छीनता है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के द्वारा जो कानून लाया गया है उसके तहत बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जाएगी.

Input your search keywords and press Enter.