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सुजाता सिंह, जो अभी जर्मनी में भारत की राजदूत हैं, के भारत के अगले विदेश सचिव के रूप में नाम आने के बाद सरकार ने नियुक्तियों को लेकर नियमों के पालन का फैसला किया है, जो कि सामान्य तौर पर नहीं होता. रंजन मथाई की जगह लेने वाली सुजाता सिंह के अतिरिक्त कुछ और भी अधिकारी इस पद के दावेदार थे, जिन्हें फिलहाल किनारे कर दिया गया. एस. जयशंकर का नाम भी इस पद की दौ़ड में आगे था. यह भी बताया जा रहा था कि वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के काफी करीबी हैं. सूत्रों का कहना है कि एमईए में श्री सिंह के इस अधिकारी को लेकर गतिरोध था. कहा तो यह भी जा रहा है कि जयशंकर को वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफे की धमकी भी दे दी थी. इसलिए सुजाता सिंह की उम्मीदवारी के सामने जयशंकर की उम्मीदवारी काम न कर सकी और आखिरकार सुजाता सिंह वरिष्ठता के आधार पर जयशंकर सिंह को मात दे गईं.

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