Ranjan-Mathaiसाउथ ब्लॉक में अधिकारियों के सेवा विस्तार की संभावनाओं की चर्चा गर्म है. राजदूतों सहित वरिष्ठ एमईए (मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर) अधिकारियों के बीच इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि विदेश सचिव रंजन मथाई के अगले माह सेवानिवृत्त होने के बाद उनका स्थान कौन लेगा. हालांकि अभी तक स़िर्फ कयास ही लगाए जा रहे हैं और इसीलिए इस विषय पर अनिश्‍चितता बनी हुई है. अभी तक परंपरा रही है कि इस पद पर मौजूदा अधिकारी के रहने के दौरान ही अगले अधिकारी की नियुक्ति संबंधी घोषणा कर दी जाती है. हालांकि विदेश सचिव के पद पर सबसे वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी की नियुक्ति की परंपरा भी रही है, जैसा कि इससे पहले मथाई और उनसे पहले निरुपमा राव को नियुक्त किया गया था. लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि क्या इस बार भी विदेश सचिव की नियुक्ति में इस परंपरा का पालन किया जाएगा.
समीक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन 2006 में निरुपमा राव से पहले विदेश सचिव के पद पर नियुक्त हुए थे, तो उस समय 16 अधिकारियों की वरिष्ठता को नज़रअंदाज करके उनकी नियुक्ति की गई थी, जिसे लेकर उस समय कूटनीतिक गलियारे में खूब बवाल भी मचा था. एमईए के अधिकारियों में उस समय हुई इस नियुक्ति को लेकर आज अनिश्‍चितता बनी हुई है. इस बात की ज़्यादा संभावना है कि सबसे वरिष्ठ अधिकारी एवं जर्मनी में भारत की राजदूत सुजाता सिंह या चीन में भारत के राजदूत एस जयशंकर इस पद पर नियुक्त किए जाएंगे या फिर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा सुझाया गया कोई नाम इस पद की दौड़ में सबसे आगे होगा. ऐसा भी हो सकता है कि इन सारे नामों को पछाड़ते हुए कोई दूसरा नाम आगे आ जाए.

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