योग, ध्यान एवं अध्यात्म के लिए अपनी अलग पहचान रखने वाले हिमालय की वादियों में पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा. यहां योग दिवस को हरित योग दिवस के रूप में मनाया गया. हज़ारों की संख्या में आए तीर्थ यात्रियों ने स्वामी चिदानंद जी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप वैदिक मंत्रों के बीच आसन और प्राणायाम का अभ्यास किया. एक घंटे तक चले योगाभ्यास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारी़फ करते हुए स्वामी जी ने उन्हें बधाई दी और कहा कि योग की मदद से उन्होंने पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में जोड़ दिया और वसुधैव कुटुंबकम की भावना प्रबल की. साध्वी सरस्वती ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि आज हम पहला विश्व योग दिवस मना रहे हैं. पूरी दुनिया एक साथ योग दिवस मना रही है. यह एकता का पर्व है. हम अपने दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस विशिष्ट उपलब्धि के लिए धन्यवाद करते हैं. इसके लिए हम संयुक्त राष्ट्र और उन सभी देशों का भी धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने का समर्थन किया. स्वामी जी ने कहा कि योग वह नहीं है, जो आप करते हैं, बल्कि वह है, जो आप स्वयं हैं. योग आपका आपसे साक्षात्कार कराता है.

हिमालय योग की जन्मस्थली है. हिमालय की शांत वादियों में योगाभ्यास मनुष्य के अंदर स्फूर्ति भर देता है. योग नगरी ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में भारत, अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, ब्रिटेन, कनाडा, चीन, चिली, कोलंबिया, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, इटली, इंडोनेशिया, इजरायल, लेबनान, जापान, मलेशिया, न्यूजीलैंड, नाइजीरिया, नेपाल, रूस, स्पेन, स्विट्‌जरलैंड, थाईलैंड एवं यूक्रेन सहित 30 देशों के नागरिकों ने हिस्सा लिया. विदेशी साधक यहां योग डे मनाकर काफी खुश थे. गंगा तट पर बड़े उत्साह के साथ योग दिवस की शुरुआत हुई. योग गुरु ने सभी साधकों को योग कलाओं का अभ्यास कराया. योग नगरी के रूप में पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुके ऋषिकेश में योग दिवस को कुछ अलग अंदाज़ में मनाया गया. इसे हरित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस नाम दिया गया. परमार्थ निकेतन के घाट पर सुबह छह बजे से बड़ी संख्या में देशी-विदेशी योग प्रेमी जुटने लगे और योग की गंगा बहने लगी. 30 देशों के विदेशी साधकों ने भारतीय योग की परंपरा को गंगा के तट पर आत्मसात किया और योग के जरिये स्वस्थ जीवन जीने का संकल्प लिया. साध्वी आभा सरस्वती एवं योगाचार्य इंदु शर्मा ने साधकों को योग के विभिन्न आसन कराए.

साधकों को संबोधित करते हुए परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज (मुुनि जी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि देवात्मा हिमालय के चरण तल में स्थित तीर्थ नगरी ऋषिकेश महर्षि पतंजलि की धरती है. नीलकंठ भगवान ने यहीं पर तप किया. योग विज्ञान की राजधानी कहे जाने वाले ऋषिकेश नगर से योग निकल कर आज दुनिया के हर कोने में पहुंच गया है. इस मा़ैके पर साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि योग को विश्व योग बनाने में तीर्थ नगरी ऋषिकेश की विशेष भूमिका है. उन्होंने उपस्थित साधकों से योग को अपने दैनिक आचार-व्यवहार में उतारने का आह्वान किया. प्रसिद्ध संत मोरारी बापू ने परमार्थ निकेतन स्वर्गाश्रम में श्रीराम कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के संदर्भ में कहा कि संभवामि युगे-युगे की तरह अब संभवामि योगे-योगे प्रकटा है.

मुरारी बापू ने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करते हैं कि वह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा-संस्कृति के संरक्षण और उसके विस्तार के लिए समर्पित हैं. योग हमारी उसी परंपरा का अमृत है. स्वामी चिदानंद जी ने लोगों को जीवन के सभी उत्सव जन्मदिन, छुट्टियां आदि को हरित उत्सव में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि योग स्थायी जीवन जीने की कुंजी है. हरित जीवन शैली के साथ हम अपने विचारों और कर्मों को संगठित करके प्रकृति के साथ वैश्विक परिवार की सेवा कर सकते हैं. योग, गंगा सेवा, गौ सेवा, ब्रह्म-विद्या की रक्षा और विस्तार केवल किसी वर्ग विशेष की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह धरती के हर मानव का कर्तव्य है. हरित जीवन शैली हमें शांति, प्रेम एवं सद्भाव के साधन के रूप में अपने समुदायों, शहरों, राज्यों और देशों में काम करने की अनुमति देती है.

Adv from Sponsors

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here