magadh_universityमगध विश्वविद्यालय के सभी 44 कॉलेजों के ढाई हजार कर्मचारी इन दिनों आन्दोलन की राह पर हैं. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कॉलेजकर्मियों ने चरणबद्ध आन्दोलन की शुरुआत कर दी है, जिसके कारण पठन-पाठन से लेकर सत्र भी अनियमित होने लगे हैं. मगध प्रमण्डल के पंच जिले गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, नवादा, अरवल और पटना प्रमण्डल के दो जिले पटना और नालंदा कुल सात जिलों में विवि के अंगीभूत कॉलेज हैं. इन कॉलेज में विभिन्न पाठयक्रमों में लाखों छात्र-छात्राएं नामांकित हैं.

इन कॉलेज में शिक्षकेत्तर कर्मियों के बराबर आन्दोलनरत रहने से छात्र-छात्राओं को परीक्षा फॉर्म भरने व अन्य शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्यों में परेशानी होती है. वहीं, कॉलेजकर्मियों का कहना है कि मविवि के पदाधिकारी तथा मुख्यालय में कार्यरत शिक्षकेत्तर कर्मचारी खुद तोे सारी सुविधाएं ले रहे हैं, लेकिन राज्य के अन्य विवि में मिल रही सुविधाओं से यहां के कॉलेज कर्मियों को वंचित रखा है.

इन्ही वंचित सुविधाओं की मांग को लेकर कर्मचारी आंदोलनरत हैं. मविवि के कॉलेजकर्मियों के अनुसार, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के साथ-साथ मविवि मुख्यालय के कर्मचारियों को एसीपी का लाभ जून 2015 से मिल रहा है, जबकि मविवि के कॉलेज कर्मियों को आज तक उक्त सुविधाएं नहीं मिली हैं. सेवाकाल में मृत कर्मियों के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर विगत चार वर्षों से नियुक्ति नहीं हो रही है. स्वीकृत पद रिक्त हैं, फिर भी प्रोन्नति नहीं हो रही है.

सेवाकाल में मृत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को पेंशन नहीं मिल पा रहा है. इन्हीं मांगों को लेकर मविवि के कॉलेज कर्मियों नेे आन्दोलन का रुख अख्तियार कर लिया है. बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ मगध विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र के पदाधिकारियों नेे बताया कि आन्दोलन के तहत मविवि मुख्यालय में अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन, कलमबंद हड़ताल, कॉलेज में तालाबंदी व अंत में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का निर्णय लिया गया है.

बिहार के बड़े विश्वविद्यालयों में शुमार मविवि इन दिनों गैर शैक्षणिक कार्यों, वित्तीय अनियमितता और फर्जी डिग्री घोटालों के कारण देश भर में चर्चा में है. इस विश्वविद्यालय में पठन-पाठन से ज्यादा जमा राशि को ठिकाने लगाने के उपाय में पदाधिकारी लगे रहते हैं. शैक्षणिक गुणवत्ता तथा समय से विभिन्न पाठयक्रमों की परीक्षा लेना तो दूर की बात, परीक्षा फॉर्म भरने, पंजीयन, अंकपत्र निकालने, डिग्री लेने या अन्य छोटे-मोटे कार्यों के लिए छात्र-छात्राओं को कई-कई दिनों तक दौड़ना पड़ता है. इसके कारण विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल होने से इस विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों को वंचित होना पड़ता है. इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं विवि की व्यवस्था से असंतुष्ट तो हैं ही, मविवि के अंगीभूत 44 कॉलेजों के ढाई हजार कॉलेजकर्मी भी अपनी मांगों को लेकर आन्दोलन की राह पर हैं.

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