बीसीसीआई यानी भारत का क्रिकेट बोर्ड चीनी कंपनी वीवो से करार खत्म नहीं करना चाहता। क्यूंकि बोर्ड को वीवो से हर साल 440 करोड़ रुपए मिलते हैं। स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी वीवो आईपीएल की स्पॉन्सर भी है। बीसीसीआई के ट्रेजरर अरुण धूमल ने कहा कि वीवो से हमारा करार 2022 तक है, इसके बाद ही स्पॉन्सरशिप का रिव्यू किया जाएगा

उन्होंने कहा- बोर्ड वीवो से होने वाली कमाई पर केंद्र सरकार को 42 फीसदी टैक्स देता है, यह एक तरह से देश की मदद है|

बीसीसीआई के ट्रेजरर का यह बयान उस वक्त सामने आया है, जब बीएसएनएल ने 4जी रिसोर्सेस के अपग्रेडेशन के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को बैन करने का फैसला किया है। रेलवे भी 471 करोड़ का करार रद्द करेगा।

धूमल ने कहा कि वीवो से स्पॉन्सरशिप करार के जरिए पैसा भारत में आ रहा है, न कि वहां जा रहा है। हमें यह समझना होगा कि चीनी कंपनी के फायदे का ध्यान रखने और चीनी कंपनी के जरिए देश का हित साधने में बड़ा फर्क है।

चीनी मोबाइल कंपनी ओप्पो पिछले साल सितंबर तक टीम इंडिया को स्पॉन्सर कर रही थी। हालांकि, इसके बाद से बेंगलुरु की ऐप बेस्ड एजुकेशन कंपनी बायजू भारतीय टीम को स्पॉन्सर कर रही है। बीसीसीआई ने बायजू से जो करार किया है, वह 5 सितंबर 2019 से 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगा|

सवाल ये है की क्या पैसे, देश प्रेम से बड़ा है|