चीनी मानवाधिकार अनुसंधान संघ ने ‘अमेरिका में अमीरों और गरीबों की बढ़ती खाई से मानवाधिकार की स्थिति बिगड़ी’ शीर्षक लेख प्रकाशित किया। लेख में कहा गया है कि अमेरिका में मध्यम वर्ग की संख्या कम होती जा रही है और गरीबी दर भी ऊंचे स्तर पर बनी रही है। अमेरिका में सबसे अमीर 0.1 फीसदी परिवारों की संपत्ति अन्य 90 फीसदी परिवारों की कुल संपत्ति के बराबर है। मई 2019 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में गिनी सूचकांक 0.482 तक पहुंचा है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय चेतावनी के 0.4 से अधिक है।

संयुक्त राष्ट्र गरीबी और मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में चार करोड़ गरीब लोग हैं और उन में 1 करोड़ 85 लाख अत्यंत गरीब लोग शामिल हैं।

इस लेख में कहा गया है कि वर्ष 2020 में नये कोरोना वायरस महामारी फैलने से अमेरिकी सरकार की अक्षमता दिखने लगी जिससे गंभीर मानवाधिकार संकट पैदा हुआ। अमेरिकी समाज की असमानता उभरने लगी। अमेरिका में कई करोड़ लोगों के पास चिकित्सा बीमा नहीं है, जबकि नये कोरोना वायरस रोगियों का उपचार खर्च हजारों डॉलर तक होता है।

लेख में कहा गया है कि अमेरिका में पूंजी बाजार में अव्यवस्थित प्रतिस्पर्धा और दुर्भावनापूर्ण अधिग्रहण से मध्यम आय वाली नौकरियों में कमी आई है। इस के अतिरिक्त आवास कीमतों के बढ़ने से कम आय वालों को और अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। और तो और उच्च कीमत वाली चिकित्सा सेवा के खर्च तथा उच्च शिक्षा के शुल्क के कारण कम आय वाले समूहों को अवसरों से वंचित किया गया है।

लेख में कहा गया है कि अमेरिका की राजनीतिक व्यवस्था और सरकार पूंजीवाद के हितों का प्रतिनिधित्व करती है। अमेरिका सरकार वास्तव में अमीरों की प्रवक्ता बन गई है। पर अमेरिका में अमीरों और गरीबों का ध्रुवीकरण एक स्थिर दीर्घकालिक प्रवृत्ति है। इस स्थिति को कम समय में बदला नहीं जा सकता है। इससे अमेरिकी लोगों के मानवाधिकारों पर जो नकारात्मक प्रभाव है, वह भी अनिवार्य तौर पर बना रहेगा।

(आईएएनएस)

 

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