दिवाली से पहले ही बाजार में पटाखों को लेकर लोगों में क्रेज भले ही हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद बाजार में पटाखे कम ही देखने को मिल रहे हैं. हालांकि गूगल पर ग्रीन क्रैकर्स अभी भी काफी ट्रेंड कर रहा है. आइए आपको बताते हैं आखिर क्या होते हैं ग्रीन क्रैकर्स और इन्हें क्यों ईको फ्रेंडली माना जाता है.

ग्रीन पटाखे दिखने, जलाने और आवाज में आम पटाखों की तरह ही होते हैं. हालांकि इन्हें जलाने के बाद सामान्य पटाखों के मुकाबले कम प्रदूषण होता है. पिछले दो सालों में बाजार में ग्रीन क्रैकर्स की पकड़ काफी मजबूत हुई है. भारत में हर साल गूगल सर्च में अक्टूबर के महीने में ही ‘ग्रीन क्रैकर्स’ काफी ट्रेंड करते हैं.

ग्रीन पटाखे क्यों है स्पेशल?
ग्रीन पटाखे उन पटाखों को कहा जाता है जिनके पास एक रासायनिक फॉर्मूलेशन है जो पानी के मॉलिक्यूल्स का उत्पादन करता है. ये उत्सर्जन के स्तर को काफी कम करता है और धूल को अवशोषित करता है. सामान्य पटाखों की तुलना में इन्हें जलाने से 40-50 प्रतिशत प्रदूषण कम होता है.

यह 30-35 प्रतिशत तक, नाइट्रस ऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों और पार्टिकुलेट मैटर (कणों) में कमी का वादा करता है. ऐसा बिल्कुल नहीं हैं कि इन ग्रीन पटाखों को जलाने के बाद प्रदूषण नहीं होगा. लेकिन इसे जलाने के बाद जानलेवा गैस और प्रदूषण कम होगा.

कितने प्रकार के होते हैं ग्रीन क्रैकर्स?-
ग्रीन पटाखे तीन प्रकार के होते हैं. इनके नाम सेफ वॉटर एंड एयर स्प्रिंकलर्स (SWAS), सेफ थर्माइट क्रैकर (STAR) और सेफ मिनिमल एल्यूमिनियम (SAFAL) हैं. ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों से कम लागत में तैयार होते है.